कमीशन के लिए मरीज की जान का दांव
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों का आंकड़ा
जेएएच समूह के सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, ईएनटी, गायनिक, आॅर्थोपेडिक आदि सभी विभागों में मरीजों की दस हजार रुपए तक के पैकेज की माइनर सर्जरी तक डाॅक्टर टाल रहे हैं। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में तो स्पेशलिस्ट डाॅक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस के साथ-साथ ड्यूटी टाइम में आयुष्मान योजना में आने वाले मरीजों के आॅपरेशन करने पर 40 फीसदी तक इंसेंटिव मिलता है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग में यह नियम नहीं है। इसी विसंगति से छुटकारा पाने के लिए अपवाद स्वरुप कुछ डाॅक्टरों को छोड़कर शेष सभी ये हथकंडा अपना रहे हैं।
डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं
डाॅ. सरोज कोठारी , डीन जीआरएमसी
}आयुष्मान में पिछड़ने का कारण?
योजना का ग्राफ बढाने के प्रयास किए जा रहे है।
}पर कमीशन के लिए आॅपरेशन टालना ठीक है क्या है?
यह एनपीए वाले डॉक्टरों की बात है तो यह शासन स्तर का निर्णय है।
}स्वास्थ्य विभाग तो लाभ दे रहा है?
इसमें हम क्या कर सकते हैं।
}क्या किसी स्तर पर मॉनीटरिंग की व्यवस्था है?
सभी एचओडी की बैठक बुलाकर निर्देश दिए गए हैं कि आयुष्मान योजना को गंभीरता से लें, जिससे ग्राफ ऊपर आए।
हम पूरे मामले की समीक्षा करेंगे
एमबी ओझा, संभागायुक्त व अध्यक्ष गजराराजा मेडिकल कॉलेज
}आयुष्मान में पिछड़ने का कारण?
इसके कई कारण हैं।
}पर कमीशन के लिए आॅपरेशन टालना ठीक क्या है?
नहीं, हम पूरे मामले की समीक्षा कर निर्णय करेंगे।
}स्वास्थ्य विभाग तो लाभ दे रहा है?
योजना के नियम में है।
}एक जैसे नियम क्यों नहीं है?
यह शासन का निर्णय है।
}क्या किसी स्तर पर मॉनीटरिंग की व्यवस्था है?
हम लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं। दवाएं व सर्जरी पर फोकस है।
हम नियम से काम कर रहे हैं
निशांत वरवड़े , आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग मप्र
}आयुष्मान में पिछड़ने का कारण?
कई कॉलेजों का रिकाॅर्ड बेहतर है, कई में प्रयास चल रहे हंै।
}कमीशन के लिए आॅपरेशन टालना ठीक है क्या?
ऐसा कुछ नहीं है। हम नियम के हिसाब से काम कर रहे हैं।
}स्वास्थ्य विभाग तो लाभ दे रहा है?
यह निर्णय शासन स्तर का है।
}एक जैसे नियम क्यों नहीं है?
यह मुझे नहीं पता।
}क्या किसी स्तर पर मॉनीटरिंग की व्यवस्था है?
जीआरएमसी सहित अन्य कॉलेजों में योजना का ग्राफ बढ़ेगा।
ग्वालियर सबसे पीछे
इस माह के प्रथम सप्ताह में दिल्ली में हुई समीक्षा में स्वास्थ्य मंत्रालय के आला अफसरों ने मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों को आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही के लिए फटकार लगाई थी। बैठक में शामिल हुए अफसरों ने इसका कारण डाॅक्टरों को आयुष्मान पैकेज से वंचित करना बताकर पल्ला झाड़ लिया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों से योजना की समीक्षा का आग्रह कर इस विसंगति को दूर करने का निर्णय लेने के लिए कहा है।
मेडिकल काॅलेज के अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डाॅक्टर टाल रहे हैं आयुष्मान योजना के तहत होने वाले आॅपरेशन
जेएएच में भर्ती मरीज।
क्या है आयुष्मान योजना
आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का फ्री इलाज मरीज को दिया जाता है। आयुष्मान योजना के दायरे मे आने वाले परिवार आयुष्मान कार्ड बनवाकर प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज ले सकते हंै। जनवरी 2020 तक दस करोड़ कार्ड देश भर में बनाए जा चुके हंै।
ऑपरेशन हुए हैं ग्वालियर में**
9%**
इंदौर 44%
भोपाल 32%
जबलपुर 29%
DB Star Expose
यह है फायदा
मेडिकल काॅलेजों के अस्पतालों में जिला अस्पताल सहित आसपास के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से गंभीर मरीज रैफर होकर आते हैं। यहां स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट डाॅक्टर व इलाज की समस्त सुविधाएं रहती हैं। काॅलेज के टीचर ही अस्पताल में स्पेशलिस्ट डाॅक्टर के तौर पर सेवाएं देते हैं। जो डाॅक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करते हैं, उन्हें मूल वेतन का 25 फीसदी एनपीए मिलता है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल का यूनिट इंचार्ज (प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर) नाॅन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) नहीं लेता है जबकि स्वास्थ्य विभाग में यदि 10 हजार के पैकेज वाला आॅपरेशन आयुष्मान योजना के तहत होता है तो 4 हजार रुपए डॉक्टर व उसकी टीम को मिल रहे हैं और छह हजार रुपए अस्पताल की रोगी कल्याण समिति में जमा हो रहे हंै।
जीआर मेडिकल काॅलेज के जयारोग्य अस्पताल समूह में स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट डाॅक्टर आयुष्मान योजना में कमीशन के लिए हर सप्ताह 100 मरीजों के आॅपरेशन टाल रहे हैं। 10 हजार रुपए तक के छोटे पैकेज के आॅपरेशन पर डाॅक्टर व स्टाफ चार हजार रुपए का इंसेंटिव चाहते हैं, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग अस्पताल में नौकरी के दौरान े प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाॅक्टरों को यह लाभ देना नहीं चाहता है। इस फेर में प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेज के अस्पतालों में ग्वालियर का जेएएच आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में सबसे फिसड्डी आया है।