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- Gwalior News Mp News Lokayukta Started Investigation In The Case Of Benefiting Rairo Distillery 4 People Were Found Guilty Earlier
रायरू डिस्टलरी काे फायदा पहुंचाने के मामले में लोकायुक्त ने शुरू की जांच, पूर्व में 4 लोग पाए थे दोषी
रायरू स्थित शराब फैक्टरी ग्वालियर एल्काेब्रो (रायरू डिस्टलरी) के लिए नियमों के विपरीत लैंड यूज बदलने के मामले में लाेकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। भाेपाल से लोकायुक्त के तकनीकी विशेषज्ञ मधूसूदन मिश्रा शनिवार को जांच के लिए ग्वालियर पहुंचे। वे रविवार तक शहर में रहेंगे और इस दौरान दस्तावेज परीक्षण के साथ वे उस जमीन का मौका निरीक्षण भी कर सकते हैं, जिसका उपयोग बदला गया। इस मामले में 2018 में शिकायत की गई थी और तत्कालीन संभागीय आयुक्त बीएम शर्मा ने इस प्रकरण में तत्कालीन साडा अध्यक्ष राकेश जादाैन, तत्कालीन सीईओ तरुण भटनागर, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य व उपयंत्री नवल सिंह राजपूत को दोषी पाया था। इसके अलावा साडा दफ्तर में अलमारी तोड़कर सबूत नष्ट किए जाने की भी जांच की गई थी। उक्त चारों जिम्मेदारों ने श्री शर्मा को अपने जवाब में बताया था कि हमें अनुमति की कोई जानकारी नहीं थी। जबकि, अनुमति पर उक्त लोगों के हस्ताक्षर हैं।
यह है मामला: लैंड यूज बदलकर मिटाए सबूत
ग्राम जिनावली के सर्वे नंबर 232 से 236, 153 से 157, 181, 192/1, 192/2 एवं मिलावली के सर्वे नंबर 3, 4, 5 और निरावली के सर्वे नंबर 1049,1050 की कुल जमीन 26.59 हेक्टेयर पर औद्योगिक विकास के लिए ग्वालियर एल्कोब्रो कंपनी को भवन अनुमति विकास योजना के विपरीत जारी कर दी गई। जबकि, उक्त सर्वे नंबरों की जमीन के उपयोग विकास योजना 2011 के अनुसार अलग-अलग था। साथ ही कंपनी से इसके लिए 14 लाख 4 हजार 741 रुपए जमा कराने के आदेश 7 मई 2016 को जारी कर दिए गए। इसके बाद 10 जून 2016 को उक्त कंपनी को नियमों के विपरीत अनुमति जारी कर दी गई।
जांच में खुलासा: हर नियम तोड़ा गया
{विकास योजना 2011 के विपरीत खसरा पैनल प्राधिकरण द्वारा कब एवं किसके द्वारा तैयार किया गया, इसका अनुमोदन प्राधिकारी द्वारा कब किया गया? इसका कोई भी अभिलेख साडा के पास नहीं मिला। जांच में पाया गया कि ग्वालियर एल्कोब्रो को लाभ देने के लिए ही यह पैनल तैयार किया गया है।
{इस पूरे मामले में साडा के उपयंत्री नवल सिंह राजपूत की भूमिका अग्रणी साबित हुई। क्योंकि, सभी प्रश्नाधीन प्रचलित कार्यवाही विषयक नस्तियाें पर प्रमुख रूप से उनके द्वारा टीप अंकित की गई और वास्तविक तथ्यों को नहीं रखा गया।
{ग्वालियर एल्काेब्रो द्वारा राशि जमा कराए जाने की नोटशीट पर सीईओ तरुण भटनागर ने लिखा कि नियमानुसार हो तो कार्रवाई करें। यह आदेश तथ्यहीन एवं अस्पष्ट है, लेकिन एल्काेब्रो प्रबंधन से 14 लाख 4 हजार 741 रुपए का मांग पत्र सीईओ के हस्ताक्षर से ही जारी है। इसलिए इन्हें इस अस्पष्ट टीप का लाभ नहीं दिया जाना था।
{इस अनुमति के संबंध में शिकायत होने पर अलमारी तोड़कर प्रमाण नष्ट करने के लिए यह फाइल गायब की गई।