खूब मलिए गुलाल होली में रह न जाए मलाल होली में
सिटी रिपोर्टर . ग्वािलयर
संगम साहित्य संस्था ने मानस भवन में शुक्रवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। अध्यक्षता चेतराम सिंह भदौरिया ने की। मुख्य अतिथि मधुलिका सिंह भदौरिया थीं। संचालन संस्था सचिव अमित चितवन ने किया। गोष्ठी में गंगादीन भारती, कमलेश कैस ग्वालियरी, त्रिलोकीनाथ शुक्ला, शिवसिंह सरल, रेखा दीक्षित, अमरसिंह यादव, कादबंरी आर्य और धर्मपाल मधुकर ने रचना पाठ किया।
रंग होली के गुमसुम हैं, नदियां खून की बहती हैं, पर प्रहलाद बचेंगे सदा देश के, मातृ होलिका कहती है। - राजकिशोर वाजपेयी
आंखे मूंदे मौन हुए ये बहरे बड़े सिकंदर हैं।
-केके पांडे
खूब मलिए गुलाल होली में, रह न जाए मलाल होली में।
-राम अवध विश्वकर्मा
{संगम साहित्य संस्था की काव्य गोष्ठी में मौजूद कवि व कवयित्री।
kavya gosthi