अपने भावों को संभालना ही सबसे बड़ी तपस्या है: मुनिश्री

Gwalior News - अपने भावों को संभालना ही सबसे बड़ी तपस्या है। मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर विजय पाने के प्रयास करने चाहिए।...

Mar 27, 2020, 07:11 AM IST

अपने भावों को संभालना ही सबसे बड़ी तपस्या है। मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर विजय पाने के प्रयास करने चाहिए। इंद्रियों पर विजय पाने वाला व्यक्ति ही महान अौर पुण्यात्मा होता है। यह बात मुनिश्री मुनिश्री विहर्ष सागर ने गुरुवार को तानसेन नगर में कही। मुनिश्री कोरोना वायरस से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं।

मुनिश्री ने कहा कि प्रभु की पूजा, गुरुओं की सेवा करने से सुख की प्राप्ति होती है। हमें स्वाध्याय में समय व्यतीत करना चाहिए। संयम का पालन करना चाहिए। तप करना चाहिए। जाप करना चाहिए। भक्तामर का पाठ करना चाहिए। जो व्यक्ति दया धर्म का पालन करता है वह ही ईश्वर का सच्चा भक्त होता है। धर्म का कार्य हमें संयम के साथ करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि हमें किसी के प्रति अपने विचार बुरे नहीं रखने चाहिए। हमें अपने भाव हमेशा शुद्ध रखने चाहिए। स्वार्थी व्यक्ति अौर अशुभ भाव रखने वाले व्यक्ति को हमेशा दुखों का सामना करना पड़ता है। मनु‌ष्य का स्वार्थ ही उसके दुख का कारण होता है।

कोरोना वायरस से बचने के लिए अखंड मौन

मुनिश्री विहर्ष सागर ने बुधवार से अखंड मौन शुरू किया है। इस दौरान वे भक्तों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं। मुनिश्री 2 अप्रैल तक अाराधना करेंगे।

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