महापौर को हाईकोर्ट से राहत नहीं सरकार के नोटिस को सही बताया

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार द्वारा दिए गए नोटिस के मामले में महापौर विवेक शेजवलकर को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने शेजवलकर के तर्क को खारिज कर दिया कि ऐसे ही मामले में छिंदवाड़ा की महापौर कांता सदारंग को राहत दी गई थी।

जस्टिस शील नागू ने कहा कि छिंदवाड़ा महापौर को भेजे गए नोटिस में जिस भाषा का प्रयोग किया था, उससे ये प्रतीत हो रहा था कि महापौर का पक्ष सुने बिना ही उन्हें दोषी ठहरा दिया था। लेकिन ग्वालियर महापौर को भेजे गए नोटिस में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। कोर्ट के मन में कोई संदेह नहीं है कि राज्य सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले महापौर को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

यह तीन आरोप थे नोटिस में
13 फरवरी को सरकार ने महापौर शेजवलकर को नोटिस दिया था। जिसमें रेस्टोरेंट को नियम विरुद्ध तरीके से लीज पर देने, शासन से अनुमति लिए बिना 2007 के बाद के दैनिक वेतन भोगियों को स्थायी करने सहित वित्तीय अनियमितता के आरोप थे। नोटिस में नगर निगम अधिनियम- 1956 की धारा 19-बी के तहत पद से हटाने की बात कही गई थी।

देना पड़ेगा जवाब : हाईकोर्ट के आदेश के बाद महापौर शेजवलकर को सरकार के नोटिस का जवाब देना ही होगा।

दस्तावेज आने के बाद ही जवाब देंगे

कोर्ट के आर्डर की जानकारी मुझे नहीं है। रही नोटिस के जवाब की बात तो मैंने शासन से जांच रिपोर्ट के साथ वे दस्तावेज भी मांगे हैं, दस्तावेज आने के बाद ही जवाब देंगे। - विवेक शेजवलकर, महापौर

खबरें और भी हैं...