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राष्ट्रीय सेमिनार: दुग्ध उत्पादाें में मिलावट के दाग से बचने के लिए मानक भी अपडेट हाेना चाहिए: डाॅ. दुबे

Gwalior News - वर्तमान में डेयरी उद्योग में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन भ्रम की स्थिति के कारण युवाओं को इस संबंध में कम जानकारी...

Nov 11, 2019, 08:11 AM IST
वर्तमान में डेयरी उद्योग में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन भ्रम की स्थिति के कारण युवाओं को इस संबंध में कम जानकारी है। दुग्ध उत्पाद के क्षेत्र में मिलावट, तकनीक का सही इस्तेमाल और जानकारी की कमी ऐसे विषय हैं, जिनके कारण कई नई चुनौतियां इस क्षेत्र के सामने उभरकर आ रही हैं। इसके निदान के लिए समय- समय मानकों को अपडेट करते रहना चाहिए। यह बात डीआरडीई के डायरेक्टर डाॅ. डीके दुबे ने कही। वह जीवाजी यूनिवर्सिटी के गालव सभागार में रविवार को शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे। ‘डेयरी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उद्यमिता मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर हुए यह सेमिनार जेयू के फूड टेक्नोलाॅजी विभाग, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल और दूध डेयरी व्यवसाय संघ की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान डेयरी खाद्य उत्पादों के उपकरण और मशीनरी संबंधी प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि एनडीआरआई करनाल के कुलपति व निदेश डाॅ. आरआरबी सिंह थे। जेयू की ओर से रजिस्ट्रार डाॅ. आईके मंसूरी, सीआईएफ को-आॅर्डिनेटर प्रो. डीडी अग्रवाल सहित प्रोग्राम कन्वीनर डाॅ. जीबीकेएस प्रसाद एनडीआरआई के कोआॅर्डिनेटर डाॅ. गोपाल सांखला व प्रोग्राम आॅर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी नरेंद्र मांडिल मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेयू की वीसी प्रो. संगीता शुक्ला ने की। एनडीआरआई के कुलपति डाॅ. आरआरबी सिंह ने कहा कि देश में हर साल 175 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है, जिसके एक तिहाई प्रतिशत में केवल असंगठित क्षेत्र का योगदान रहता है। इसका कारण तकनीकी की जानकारी न होना है। युवाओं, इस क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और किसानों को ट्रेनिंग देकर इन कमियों को दूर किया जा सकता है। जेयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि यह आंत्रप्रेन्योरशिप का जमाना है। यह युवाओं को तय करना है कि उन्हें जाॅब सीकर बनना है या जाॅब क्रिएटर। प्रो. डीडी अग्रवाल ने कहा कि इस व्यवसाय में पुराने मानकों को फाॅलो किया जा रहा है। हर दस साल में मानकों का अपग्रेड किया जाना चाहिए।

सेमिनार में बोले विशेषज्ञ

मिलावट: यह सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कई किसान और छोटे व्यापारी इस संबंध में जानकारी नहीं रखते, जिससे उन पर कार्रवाई हो जाती है। हाल ही में कई जगह सेपरेटा दूध के सैंपल पास होते हुए भी प्रशासन द्वारा उसके बेचने पर जुर्माना लगाया गया। इसका एक कारण देश में एक ही दुग्ध उत्पाद अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जिसे कुछ जगह बैन किया गया है। सरकार द्वारा सभी उत्पादों के नामों सहित उनके मानकों को भी क्लियर करना चाहिए।

कई व्यापारी और किसान क्वालिटी और मिलावट में अंतर नहीं समझते। यदि दूध में वसा की मात्रा अधिक या कम हो जाए, तो उसे लोग मिलावट समझ बैठते हैं। इस संबंध में प्रशासन द्वारा छोटे व्यापारी व किसानों को अवेयर किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सेमिनार में जानकारी में जानकारी लेतीं कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला।

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