जिस व्यक्ति की संकल्प शक्ति मजबूत होती है, उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं

Gwalior News - बुरी अादतें हमारे जीवन को गर्त में ढकेल सकती हैं। इन्हें बदलने के लिए आपको संकल्प शक्ति मजबूत करनी होगी। संकल्प...

Jan 24, 2020, 07:35 AM IST
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बुरी अादतें हमारे जीवन को गर्त में ढकेल सकती हैं। इन्हें बदलने के लिए आपको संकल्प शक्ति मजबूत करनी होगी। संकल्प शक्ति के बल पर हम उन ऊंचाइयों को छू सकते हैं, जिन्हें पाना आसान नहीं होता। यह बात अाचार्यश्री प्रसन्न सागर महाराज ने नई सड़क स्थित चंपाबाग बगीची में भगवान अादिनाथ के मोक्ष कल्याणक में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

आचार्यश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति की संकल्प शक्ति मजबूत है उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है। एेसा व्यक्ति बड़े से बड़े पहाड़ को अकेले की दम पर मैदान कर सकता है। संकल्प शक्ति बहुत ही बिरले लोगों में देखने को मिलती है। कुछ लोग संकल्प तो ले लेते हैं लेकिन समय के साथ उनके संकल्प कमजोर पड़ने लगते हैं। हमें अपनी बुरी अादतों को दूर करने के लिए संकल्प लेना चाहिए। संसार बिना सांसारिक ज्ञान के नहीं चलता। मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए ज्ञान जरूरी है। जीवन में निष्ठा बहुत ही जरूरी है। निष्ठा चाहे ईश्वर में हो गुरु में या किसी व्यक्ति के प्रति। हमें कभी भी अविश्वास नहीं करना चाहिए। जैसे बिना ड्रायवर पर विश्वास किए सफर नहीं होता और उसी तरह बिना निष्ठा के आपका कोई भी सही मार्गदर्शन नहीं कर सकता। ईश्वर की भक्ति से मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति होती है। ज्ञान हमारे विचार और आचरण में परिवर्तन लाता है। जैन समाज के लोगों ने गुरुवार को आचार्यश्री को आत्म हितंकर उपाधि से अलंकृत किया।

मोक्ष कल्याणक महोत्सव
मोक्ष कल्याणक महोत्सव की समाप्ति के बाद आचार्यश्री व मुनिश्री ने भिंड की ओर किया पदविहार

चंपाबाग बगीची में आयोजित धर्मसभा में आचाश्री प्रसन्न सागर महाराज के प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

अपनी वाणी अौर व्यवहार पर रखें काबू : मुनिश्री

मुनिश्री पीयूष सागर ने कहा िक हमें अपनी वाणी अौर व्यवहार को काबू में रखना चाहिए। वाणी अौर व्यवहार के गलत उपयोग से नजदीक से नजदीक व्यक्ति भी आप से दूर जा सकता है। इसलिए निरंतर अपने व्यवहार पर चिंतन करते रहें। हमें कभी भी अपनी वाणी अौर व्यवहार से किसी के दिल को नहीं दुखाना चाहिए।

24 परिवारों ने 24 तीर्थकरों को समर्पित किए अर्घ्य, निर्वाण लाडू भी चढ़ाए

जैन समाज 24 परिवारों ने गुरुवार को 24 तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित किए। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर उन्हें 24 किलो को निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। महोत्सव की समाप्ति के बाद आचार्यश्री और मुनिश्री ने भिंड की ओर पदविहार किया।

आचार्यश्री ने किया केशलोचन

आचार्यश्री की पदवी मिलने के बाद आचार्यश्री ने पहला केशलोचन किया। इसके बाद उपवास भी रखा। इसके साथ ही मुनिश्री पीयूष सागर ने भी केश लोचन किया।

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