अफसर फेल, कचरा कलेक्शन की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी अब एनजीओ काे देने की तैयारी

Gwalior News - डाेर टू डाेर कचरा कलेक्शन के काम की माॅनीटरिंग करने में नगर निगम के अफसर फेल साबित हाे गए हैं इसलिए अब इस काम के लिए...

Oct 13, 2019, 07:35 AM IST
डाेर टू डाेर कचरा कलेक्शन के काम की माॅनीटरिंग करने में नगर निगम के अफसर फेल साबित हाे गए हैं इसलिए अब इस काम के लिए गैर सरकारी संगठन काे जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। निगम इंदौर की तर्ज पर एनजीओ को इसके लिए ठेका देगा। एनजीओ अपना एक-एक कर्मचारी कचरा वाहन पर लगाएगा। वह कर्मचारी देखेगा की कचरा वाहन में कहां-कहां से कचरा मिल रहा है। उन्हें एक रजिस्टर भी दिया जाएगा। उस रजिस्टर में कचरा नहीं देने वाले का नाम-पता भी दर्ज होगा। यह मॉडल पांच महीने पहले ग्वालियर नगर निगम के अफसर इंदौर जाकर देख आए थे। उसे अब धरातल पर लाने की तैयारी है।

शहर में कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी नगर निगम के अलावा ईको ग्रीन कंपनी भी संभाल रही है। 66 वार्डों में से 53 में ईको ग्रीन और 13 में नगर निगम कचरा कलेक्शन, सेग्रीगेशन का काम कर रहा है। 100 प्रतिशत सफलता नहीं मिलने पर अप्रैल में निगम के तीन अधिकारी इंदौर गए थे। वहां से उक्त व्यवस्था को देखकर आए थे। अब इस पर नगर निगम काम करने जा रहा है।

मौजूदा हकीकत...कर्मचारी कचरा उठाने की बजाय लगा रहे आग, प्रदूषण बढ़ने का खतरा

नगर निगम मुख्यालय से 100 मीटर की दूरी पर भी निगम के अफसर कचरा नहीं उठवा पा रहे। शनिवार की शाम काे यहां पड़े कचरे में सफाई कर्मचारियों ने आग लगा दी।

घर-घर जैविक खाद की तैयारी

इंदौर में कुछ कॉलोनियां हो कम्पोस्टिंग सिस्टम पर अपना रही है। वहां पर घरों से निकलने वाले कचरे से कॉलोनीवासी खाद बना रहे हैं। इसी तर्ज पर नगर निगम भी होम कम्पोस्टिंग का बढ़ावा देने की तैयारी में है। जिस एनजीओ को जिम्मेदारी मिलेगी। उसके लोग घर-घर जाकर लोगों को होम कम्पोस्टिंग की जानकारी देंगे। उन्हें सिखाया जाएगा कि होम कम्पोस्टिंग कैसे की जाती है। हालांकि 2 अक्टूबर को बाल भवन में आयोजित शहर सरकार आपके द्वार कार्यक्रम की ओपनिंग के वक्त प्रदेश के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष नोडल अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन श्रीकांत कांटे ने होम कम्पोस्टिंग का डेमो दिया था।

बाजारों में सफाई व्यवस्था की निगरानी

शहर में 80 से ज्यादा बाजार स्वच्छ भारत सर्वेक्षण के तहत चयनित है। यहां पर रोज शाम और सुबह सफाई होना है। कचरा भी दोनों वक्त उठना है। वर्तमान में ऐसा बहुत कम हो रहा है। इसकी भी मॉनीटरिंग नगर निगम कराएगा। बाजारों में सुबह और शाम को झाड़ू लग रही है या नहीं। कचरा उठाने के लिए वाहन आता है या नहीं। इसका पूरा रिकार्ड रखा जाएगा।

एनजीओ को ये भी मिलेंगी जिम्मेदारी








अभी निगम की ओर से यह है व्यवस्था

नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने शहर के 66 वार्डों का रूट मैप तैयार कराया था। यह काम ईको ग्रीन कंपनी को करना था। इस रूट मैप की मॉनीटरिंग के लिए आयुक्त ने निगम के अफसरों को एक-एक वार्ड की जिम्मेदारी दी थी। शुरूआत में अफसर घरों से निकले। लेकिन यह व्यवस्था ठप्प हो गई है। जिम्मेदार अधिकारी रोज सुबह वार्डों में जाकर मॉनीटरिंग नहीं कर रहे हैं।



एनजीओ के कर्मचारी रखेंगे नजर


1889 कर्मचारियों को दैवेभो बनाने का प्रस्ताव भेजा, हड़ताल जारी

नगर निगम में आउटसोर्स पर कार्यरत 1889 कर्मचारियों को दैनिक वेतन भोगी बनाने का प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया है। वहां से फैसला होने के बाद निगम इन कर्मचारियों को कलेक्टोरेट पर वेतन भुगतान और सुविधा देगा। आउटसोर्स के 989 सफाई संरक्षकों में से 50 प्रतिशत काम पर लौट आए हैं। लेकिन शेष हड़ताल पर होने के कारण शनिवार को भी कई जगह सफाई नहीं हुई। सड़कों पर कचरे के ढेर नजर आए।

गौरतलब है कि एक अक्टूबर से आउटसोर्स पर काम करने वाले सफाई संरक्षक हड़ताल कर रहे हैं। वे नियमित एवं विनियमित कर्मचारियों को भी काम करने से रोकते आ रहे हैं। इस कारण शहर से कचरा नहीं उठ रहा है। हालांकि नगर निगम ने शनिवार को कचरा उठाने का दावा जरूर किया है। फिर भी कचरे सड़कों और गलियों में पड़ा नजर आया। इधर भाकपा ने इसी मामले को लेकर कलेक्टर और िनगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।

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