संयम व निर्मल मन ही कर सकता है अात्म कल्याण : विहर्ष सागर
जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाना हो अौर आत्म कल्याण करना है तो चार बातें जीवन में होना जरूरी हैं। पहली श्रद्धा, चाहे वो व्यक्ति के प्रति हो या ईश्वर के प्रति। दूसरी बात संयम। तीसरी बात संतोष अौर चौथी बात निर्मल मन। इन बातों को अपनाकर व्यक्ति जीवन में काफी अागे बढ़ सकता है। श्रद्धा के बिना जीवन चल ही नहीं सकता, इसलिए श्रद्धा अटूट होनी चाहिए यह बाद राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने चेतकपुरी स्थित जैन मंदिर में अायोजित धर्मसभा में कही।
इस अवसर पर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज अौर क्षुल्लकश्री विश्वोत्तर महाराज भी उपस्थित थे।
मुनिश्री ने की पांच मंदिरों में पहुंचकर वंदना: गुरुवार को मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज, मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने सुबह मुनि सुव्रतनाथ जैन मंदिर, शांतिनाथ जैन मंदिर, फालका बाजार जैन मंदिर, इंदरगंज जैन मंदिर अौर चेतकपुरी मंदिर पर अाराधना की। सभी मंदिरों पर समिति के पदाधिकारियों ने मुनिश्री के पाद प्रक्षालन अौर अारती उतारी। मुनिश्री ने 15 मार्च को आयोजित होने वाले पंच कल्याणक महोत्सव के लिए सभी मंदिर समितियों को आमंत्रित किया।
चेतकपुरी स्थित जैन मंदिर में प्रवचन करते विहर्ष सागर महाराज।