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आग से डरे लोगों ने बंद कराईं दुकानें, बोले- यहां नहीं होने देंगे फोम और तेजाब का काम

एक वर्ष पहले
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मोची ओली की तीन मंजिला इमारत में बुधवार को भीषण आग लगने से दंपति की मौत के बाद से यहां के रहवासी दहशत में हैं। मोची ओली में जिस मकान में आग लगी, उसके ठीक सामने बने देवकृष्ण अपार्टमेंट के करीब आधा सैकड़ा लोगों ने शुक्रवार को उन दुकानदारों को खदेड़ दिया, जो अपार्टमेंट की पार्किंग में ही संचालित दुकानों में फोम, टायर और तेजाब बेचते हैं। इन लोगों ने नगर निगम अधिकारियों से दुकानें खाली कराने के लिए गुहार लगाई है। इन दुकानों को जब बंद कराया गया तो उन लोगों ने भी दुकानें बंद कर दीं, जो मकान के नीचे ही इन सामानों की बिक्री
करते हैं।

उधर, अग्निकांड में बुजुर्ग दंपति की मौत के बाद भी नगर निगम और प्रशासन नहीं चेता है। मोची ओली को लेकर न तो जिम्मेदारों यहां का जायजा लिया और न ही कोई प्लान बनाया, जिससे आगे इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

नियम विरुद्ध कोई दुकान संचालित है तो कार्रवाई होगी

प्रदीप वर्मा, सिटी प्लानर, नगर निगम

जिम्मेदार मौन.. फायर एनओसी है या नहीं, यह भी नहीं पता

मोची ओली के हर घर में यही काम हो रहा है। यानी हर मकान खतरे में है। लेकिन दो लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार मौन हैं। यहां यह तक नहीं जांचा गया कि किसके पास फायर एनओसी है और किसके पास नहीं। इतना खतरनाक काम यहां किया जा रहा है, उसके हिसाब से सुरक्षा के इंतजाम हैं या नहीं।


अकेले लश्कर में दस से ज्यादा हाई रिस्क जोन

लश्कर इलाके में मोची ओली के अलावा दानाओली, हलवाट खाना, टोपी बाजार, दही मंडी, चितेरा ओली, दर्जी ओली और बताशे वाली गली सहित दस से ज्यादा हाई रिस्क जोन है। यहां संकरी गलियों में सैकड़ों दुकानें चल रही हैं। अगर हादसा हुआ तो काबू पाने के लिए निगम की फायर ब्रिगेड तैयार नहीं है।

हर पल डर लगा रहता है, वो दृश्य आंखों के सामने से नहीं हटता


-विमला जैन, निवासी, देवकृष्ण अपार्टमेंट

यह हाल है हमारी
फायर ब्रिगेड का


{गाड़ियां: फायर ब्रिगेड में 10 बड़ी गाड़ियों में से 8 चालू हालत में हैं। इसके अलावा तीन टैंकर और दो बुलट हैं। सिर्फ 13 वाहनों के भरोसे पूरा शहर है। जिस गाड़ी से पानी फेंका जाता है, वही गाड़ी पानी भरने जाती है।

{पाइप: गाड़ियों के पाइप जर्जर हैं। जगह-जगह से लीकेज हैं।

{उपकरण: मोची ओली में शटर काटने के लिए कटर तक की व्यवस्था नहीं थी।

{हाईड्रेंट: लगातार पानी की उपलब्धता के लिए ऐसे इलाकों में हाईड्रेंट नहीं लगाए गए हैं।

{हाइड्रोलिक जैक: हाइड्रोलिक जैक है लेकिन उसकी चौड़ाई, ऊंचाई बहुत अधिक है। चार करोड़ की लागत से इसे बनवाया गया। संकरी गलियों के लिए छोटा हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नहीं है। यही कारण था कि यह मोची ओली में नहीं जा सका।


-रूबी गुप्ता, रहवासी

गंभीर चिंता: संकरी गलियों में नहीं लगाए हाईड्रेंट

मोचीओली की तीन मंजिला इमारत में बुधवार को भीषण आग लगने के बाद सड़क पर बिखरा पड़ा सामान और दुकानें बंद कराते रहवासी।
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