दूसरे जुमे की नमाज अदा कर, शहर के अमन और चैन के लिए दुआ मांगी

Gwalior News - रमजान के दूसरे जुमे (शुक्रवार) को शहर की सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा कर शहर के अमन-चैन के लिए दुआ मांगी गई।...

May 18, 2019, 07:41 AM IST
रमजान के दूसरे जुमे (शुक्रवार) को शहर की सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा कर शहर के अमन-चैन के लिए दुआ मांगी गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने सुबह अजान से पहले सेहरी कर रोजे की नीयत बांधी। शाम को मगरिब की नमाज से पहले अफ़तार की दुआ मांगी और फिर खजूर खाकर रोजा खोला। इसके बाद तराबीह की नमाज अदा की गई।

रमजान के 11 वें दिन शुक्रवार को सुबह अजान से पहले मुस्लिम समाज के लोगों ने सेहरी कर रोजे की नीयत बांधी। इसके बाद दोपहर में जुमे की नमाज अदा की गई। सुनहरी मस्जिद, घोसीपुरा स्थित नूर मस्जिद, ईदगाह कंपू , फूलबाग स्थित मोती मस्जिद, कंपू स्थित एक मीनार मस्जिद, हुजरात रोड स्थित मस्जिद रंगरेजान सहित सभी प्रमुख मस्जिदों में नमाज अदा की गई। रात में लोगों ने अफ़तार की दुआ की। नमाज के बाद खजूर खाकर रोजा खोला। रात में मस्जिदों में तरावीह की विशेष नमाज अदा की गई, जिसमें हाफिजों ने कुरान शरीफ पढ़ी। शहर काजी अब्दुल हमीद कादरी ने इस अवसर पर रमजान के बारे में बताया।

गुनाह से तौबा करने वाले को अल्लाह कर देते हैं माफ: मुफ्ती जफर नूरी

मुफ्ती जफर नूरी ने बताया कि दूसरे जुमे की नमाज के साथ 11 वां रोजा पूरा हो गया है। अब मगफिरत के दिन हैं जिसमें अल्लाहताला फरमाते है कि इस अशरे में जो भी कोई अपने गुनाहों से तौबा करता है, अल्लाहताला उसके गुनाहों को माफ कर देते हैं। इस अशरे में हमें अपने गुनाहों से सच्ची तौबा करनी चाहिए। जब कोई अपने गुनाह से सच्ची तौबा करता है तो उसकी तौबा से अल्लाह इतना खुश होता है कि पैगंबर मोहम्मद ने बताया अगर किसी कोई मुसाफिर जिसका पूरा सामान ऊंट पर लदा हो और वह बीच जंगल में हो और उसे नींद आ जाए। उसका ऊंट और सामान गायब हो जाए तो उस आदमी को अपनी मौत के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा होता है, क्योंकि दूर-दूर तक जंगल में न तो कोई खाने-पीने के इंतजाम हैं और न ही कोई व्यक्ति दिखाई दे रहा होता है। वह अपनी मौत के बारे में ही सोचता रहता है। जब वह यह सोच रहा होता हैं तभी उसके ऊंट सामान सहित सामने आ जाते हैं। यह देखकर उसकी खुशी की कोई सीमा नहीं रहती है। इसी तरह से जब कोई व्यक्ति अपने गुनाह से तौबा करता है ताे अल्लाहताला उसी तरह से तरह से खुश होते हैं जिस तरह से जंगल में खोया सामान वापस मिलने पर व्यक्ति खुश होता है। इस अशरे में हर व्यक्ति को अपने गुनाह से अधिक से अधिक तौबा करना चाहिए।

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