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प्रधानमंत्री आवास: फूटी कॉलोनी के तीन मंजिल तक के फ्लैट महंगे होंगे, निगम 5% दर बढ़ाने की तैयारी में
एक बार फिर से फूटी कॉलोनी में बन रहे प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों (फ्लैट) की कीमतों में इजाफा होने जा रहा है। पहले दस प्रतिशत दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। अब 5% दरें और बढ़ाने की तैयारी हो रही है। नगर निगम कार्यालय से प्रशासक एमबी ओझा के पास 5% राशि बढ़ाने का प्रस्ताव आयुक्त के माध्यम से पहुंचाया जा चुका है। प्रशासक के हस्ताक्षर होते ही प्रधानमंत्री आवास योजना के 300 आवासों के दामों में पांच प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। इसके बाद इन एलआईजी आवासों की कीमत 18.25 लाख और एमआईजी आवास की कीमत 22 लाख रुपए होगी।
नगर निगम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मानपुर-1 और महलगांव में आवास बना रही है। यहां की बुकिंग पूरी हो चुकी है। इसके बाद निगम ने मानपुर-2 और फूटी कॉलोनी का प्रोजेक्ट तैयार कर काम शुरू कराया था। यह पूरा प्रोजेक्ट 245 करोड़ रुपए का है। फूटी कॉलोनी सिरोल मुख्य मार्ग पर है। इस वजह से निगम के अधिकारी इसे भविष्य का सिटी सेंटर मानकर चल रहे हैं।
इससे पहले 8 जनवरी को बढ़े थे: नगर निगम परिषद की 8 जनवरी को बैठक हुई थी। तब फूटी कॉलोनी के फ्रंट और कॉर्नर के आवासों में दस प्रतिशत का इजाफा किया गया। इससे उस वक्त एलआईजी आवासों की कीमत 17.50 लाख पहुंच गई थी। एमआईजी आवास की कीमत 21 लाख हो गई थी। अब यदि प्रशासक ने पांच प्रतिशत के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया। तब इनकी कीमत क्रमश: 18.25 लाख रुपए और 22 लाख रुपए हो जाएगी। यह कीमत 300 आवासों के लिए ही रहेगी। जो फर्स्ट फ्लोर से थर्ड फ्लोर तक के आवास होंगे।
824 में से 300 आवासों के दाम बढ़ाए जाएंगे
फूटी कॉलोनी में 824 आवास (फ्लैट) बनना है। ये फ्लैट 6 और 8 मंजिला इमारतों में बनाए जाएंगे। नगर निगम के अधिकारियों का प्लान है कि इन इमारतों के आवास, जो फर्स्ट से थर्ड फ्लोर के होंगे, उनके दामों में पांच प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा। इस तरह 300 आवासों के दाम 5% ज्यादा हो जाएंगे।
...तब निगम के अफसरों ने बंद कराया था काम
फूटी कॉलोनी प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी टेंडर के माध्यम से गाजियाबाद की मनीषा कंपनी को सौंपी गई थी। कंपनी ने वहां पर काम शुरू करा दिया था। लेकिन अचानक नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी से काम को बंद करा दिया था। सांसद विवेक शेजवलकर के हस्तक्षेप के बाद चार महीने बाद काम शुरू हुआ। इससे दामों में निर्माण लागत में भी इजाफा हो गया।