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नशे में घूमते मिले बेसहारा बच्चाें काे पढ़ाने के साथ सिखाया हुनर, बना रहे चादर-ताैलिया

Gwalior News - पढ़ाई छोड़कर शहर की सड़कों पर नशे में घूमते मिले बच्चों की जिंदगी जिला शिक्षा केंद्र का एक आवासीय छात्रावास बदल रहा...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:12 AM IST
Gwalior News - mp news teaching of destitute children found drunk taught with skills making chadar taaliya
पढ़ाई छोड़कर शहर की सड़कों पर नशे में घूमते मिले बच्चों की जिंदगी जिला शिक्षा केंद्र का एक आवासीय छात्रावास बदल रहा है। तिलकनगर स्थित इस छात्रावास में स्कूल छोड़ने वाले, स्कूल न जाने वाले और अनाथ करीब 100 बच्चों को रखा गया है। 4 साल पहले शुरू हुए इस छात्रावास में रहने वाले छात्रों को पढ़ाने के साथ अब एक और कदम आगे बढ़ाया है। यहां के छात्रों को स्वावलंबी बनाने के लिए एक प्रयास शुरू किया गया है। बच्चों को हथकरघा पर कपड़ा बुनना सिखाया गया अब यह बच्चे कपड़ा बुनना सीख चुके हैं। यह बच्चे अगर पढ़ाई के साथ चादर और तौलिया ज्यादा बनाते हैं तो उन्हें सरकारी विभागों में सप्लाई करने की योजना बनाई जा रही है।

गौरतलब है कि शहर के ऐसे अनाथ बच्चे जो नशे की लत में फंस रहे थे या ऐसे बच्चे जिनके मां-बाप काम पर चले जाते थे और बच्चे सड़कों पर घूमते थे इसके अलावा ऐसे बच्चे जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है उन्हें शहर भर से तलाश करके इस छात्रावास में लाया जाता है। बीमार बच्चों को इलाज कराया जाता है जो बच्चे नशा करते हैं, उन्हें नशा छोड़ने की काउंसिलिंग कराई जाती है। ऐसे बच्चे अब नशा छाेड़कर पढ़ाई में जुटे हुए हैं। पढ़ने के बाद जो समय मिलता है उसमें इन्हें हथकरघा का उपयोग कर कपड़े बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। ज्यादातर बच्चे कपड़े बुनना सीख गए हैं।

यह बच्चे अब 22 चादर और 10 तौलिया बना चुके हैं। अब इन बच्चों के साथ महिलाओं का समूह बनाया जा रहा है ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और बच्चे स्वावलंबी बन सकें। ज्यादा संख्या में उत्पादन होने के बाद इन्हें शासकीय विभागों में बेचा जाएगा। कुछ अिधकारियों ने इसके लिए पहले ही स्वीकृति दे दी है।

ज्यादा उत्पादन होने के बाद इन कपड़ों को शासकीय विभागों में बेचा जाएगा

तिलक नगर स्थित छात्रावास में हथकरघा से कपड़े बनाते छात्र।

बच्चे व्यस्त रहें इसलिए शुरू किया काम

कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को व्यस्त रखने के लिए पढ़ाई के साथ योग सिखाया जाता है। उन्हें खेलों में शामिल किया जाता है। इसके अलावा जो बच्चे हथकरघा सीखने के इच्छुक हैं, उन्हें इसके लिए तैयार किया जाता है। छात्रों की स्वावलंबन देने की शुरुआत पूर्व वार्डन आनंद नारायण गौड़ ने की थी। यह छात्रावास 2015 में शुरू किया गया था। इसमें फिलहाल 100 छात्र रहते हैं जिसमें 6 अनाथ हैं, 17 ऐसे हैं जिनके अभिभावकों में से सिर्फ एक ही उनके साथ रहता है। 40 ऐसे बच्चे हैं जो स्कूल छोड़ चुके थे जबकि 29 ऐसे बच्चे रहते हैं जिनके अभिभावक हैं, लेकिन वह काम पर चले जाते हैं और बच्चे अकेले रह जाते हैं।

लूम से चादर व तौलिया बनाना सीख रहे


गलत कामों से ध्यान हटाने की कोशिश


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