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भाईदूज पर चढ़ा धुलेंडी का रंग, बहनों ने भाइयों का तिलक कर सुख-समृद्धि की कामना की

एक वर्ष पहले
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भाईदूज पर बुधवार को बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक कर उनके दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना की। वहीं मंगलवार को बारिश के कारण जो बच्चे खुलकर होली नहीं खेल पाए थे, उन्होंने बुधवार को जमकर होली खेली।

मंगलवार सुबह हुई बारिश अौर कोरोना वायरस के खौफ के बीच भी लोगों ने उत्साह के साथ जमकर होली खेली। कॉलोनियों, गली-मोहल्लों में सुबह से ही बारिश के बीच छोटे-छोटे बच्चे होली खेलते दिखे। सड़कों पर भी युवा दिनभर हुड़दंग मचाते रहे। देर शाम तक लोगों की होली का उत्साह कम नहीं हुआ था। देर शाम तक रंगे-पुते लोग होली खेलकर घरों को लौट रहे थे।

शहर के अचलेश्वर मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, फूलबाग स्थित मारकंडेश्वर महादेव मंदिर, थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर, मुरार स्थित श्री मदन मोहन मंदिर, श्री गिर्राज जी मंदिर में मंगलवार को सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ रही। सराफा बाजार स्थित श्रीनाथजी की हवेली में होली उत्सव मनाया गया। दिनभर श्री नाथ जी की हवेली में भक्त ठाकुर जी के दर्शन करने अाते रहे अौर होली खेलते रहे। मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में ठंडाई वितरित की गई।

श्री नाथ जी की हवेली के मुखिया यमुनेश नागर ने बताया कि होली प्रभु श्रीनाथ जी का सबसे प्रिय त्योहार है। इसलिए श्रीनाथ जी की हवेली में होली उत्सव बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक चलता है। होली पर जब उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होता है उस समय प्रभु का डोलोत्सव मनाया जाता है। डोलोत्सव के भाव में यशोदा मैया गोपियों से कहती हैं कि लाला को इतनी होली खिलाओ कि लाला होली से ऊब जाए। श्री नाथ जी की हवेली डोलोत्सव में चार झांकियां होती हैं। इसमें पहली झांकी गोवर्धन पर्वत पर होली की होती है। दूसरी झांकी में कुंज की होली होती है। तीसरी झांकी में गोकुल में होली होती है अौर तथा चौथी यमुना में होली की झांकी होती है। इस दौरान मंदिर में लगातार रसिया गाए जाते हैं। अंतिम रसिया ढप धरदे यार गई परकी, खेलत खेलत देह पिरानी अौर मलीन भई तरकी... होता है। इसके रसिया के बाद ढप रख दिया जाता है अौर अगले साल बसंत पंचमी के दिन निकाला जाता है। इस अवसर पर मंदिर के मुखिया यमुनेश नागर, बृजेश नागर, उमंग ठाकोर, कृष्णकांत, रवि, डॉ. स्वाति अग्रवाल आदि उपस्थित थीं।

सराफा बाजार स्थित श्रीनाथजी की हवेली में होली खेलते श्रद्धालु।
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