ऐसी होगी नई पीढ़ी की दुनिया

Gwalior News - टाइम मैग्जीन ने मौजूदा समय को ध्यान में रखते हुए भावी दुनिया की तस्वीर पेश की है। 21 वीं सदी में जन्म लेने वाले...

Jan 26, 2020, 07:20 AM IST
Gwalior News - mp news the new generation world will be like this
टाइम मैग्जीन ने मौजूदा समय को ध्यान में रखते हुए भावी दुनिया की तस्वीर पेश की है। 21 वीं सदी में जन्म लेने वाले बच्चे अब अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं। कई देशों में युवा नेतृत्व सामने आया है। इस पीढ़ी की प्रेरणा आंदोलन और एक्टिविज्म भी है। हांगकांग की सड़कों, सेंटियागो, बगदाद सहित कई स्थानों में उनके उग्र तेवर बदलाव का रास्ता तैयार कर रहे हैं। मैग्जीन ने इन हालात के साथ भविष्य के खान-पान और कुछ इनोवेशन पर नजर डाली है।


पिछले एक वर्ष से एशिया, अफ्रीका, यूरोप, लेटिन अमेरिका और मध्य पूर्व देशों में लोगों, खासकर युवाओं ने असमानता, कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। हांगकांग के युवा अपनी एक भी मांग छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। संसार भर में स्कूली बच्चे पर्यावरण के पक्ष में खड़े हुए हैं।

इन आंदोलनों की अगुआई कर रहे युवा अपने हाथ में सत्ता की कमान संभाल रहे हैं। फ्रांस, आयरलैंड, आस्ट्रिया, यूक्रेन में युवा नेताओं की नेतृत्व शैली अलग है। फिनलैंड में 34 वर्षीय सना मारिन विश्व की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी हैं। आस्ट्रिया में सेबास्टियन कुर्ज (33 वर्ष) दोबारा चांसलर बने हैं। 30 से 40 वर्ष की आयु के कुछ और नेता हैं- न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न (39), यूक्रेन के प्रधानमंत्री ओलेस्की हॉनचारुक (35), एल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नईब बकेले (38)।

जीवन को सुविधा संपन्न और आसान बनाएंगे ये अाविष्कार

सेहत के डिवाइस

शरीर में पहने जाने वाले गैजेट्स की संख्या बढ़ेगी। कान के इयरिंग से नब्ज का पता लगेगा। टैटू स्किन का हाल बताएंगे। ऐसे गैजेट संवाद करने वाले एप से जुड़ेंगे। इनमें हमारा जेनेटिक प्रोफाइल होगा। ये बीमारियों की भविष्यवाणी में डॉक्टरों की मदद करेंगे।

विशेष अनुबंध
के तहत सिर्फ
दैनिक भास्कर में


कई देशों में युवाओं के आंदोलन से परिवर्तन की लहर

हवा से प्रोटीन

सोलर फूड्स पानी, न्यूट्रिएंट्स और कार्बन डाइ ऑक्साइड से गेहूं के आटे जैसा प्रोटीन बना रही है। इसमें खमीर उठाने जैसी प्रक्रिया के लिए सूक्ष्म जीवों का उपयोग करते हैंं।

मछली जैसा प्रोडक्ट

ओडोनटोला कंपनी ने जलीय पौधों- एल्गी, माइक्रो एल्गी को मिलाकर सालमन मछली के स्वाद जैसा शाकाहारी प्रोडक्ट बनाया है। यूरोप के शाकाहारी स्टोर में इसकी बिक्री होती है। 2020 में संसार के कई देशों में इसकी बिक्री की तैयारी है।

वर्टिकल फार्म

दक्षिण सैनफ्रांसिस्को में प्लेंटी कंपनी ऑटोमैटिक फार्म में सालभर हरी सब्जियां उगाती है। पौधों को हवा और सौर ऊर्जा से चलने वाली एलईडी लाइट्स से रोशनी मिलती है।

भोजन का विकल्प

हुएल कंपनी ऐसे पाउडर और पेय बनाती है जिनकी पौष्टिकता एक समय के भोजन के बराबर होती है। इनमें 27 विटामिन, मिनरल, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, फाइबर होते हैं। कंपनी ने 80 देशों में पांच करोड़ से अधिक प्रोडक्ट बेचे हैं।

सेलेब्रिटी दर्जे की जगह समानता ज्यादा जरूरी: सना

साफ होंगे समुद्र

कुछ वर्ष के भीतर समुद्रों में मछलियों से अधिक प्लास्टिक होगा। इधर, नई टेक्नोलॉजी से उम्मीद बंधी है। इससे अगले दस साल में समुद्र काफी हद तक साफ हो जाएंगे।

सबसे तेज राइड

कई ग्लोबल कंपनियों ने हाइपर लूप प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। भूमिगत यात्री रेलगाड़ियां लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। 2030 तक अमेरिका के कई शहर हाइपर लूप ट्रेन से जुड़ जाएंगे।

रोबोट से स्पेस की सफाई

अंतरिक्ष में घूम रहे बेकार सैटेलाइट और मलबा दूसरे उपग्रहों के लिए समस्या पैदा करते हैं। इसकी सफाई के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर बना रही है। इसे 2025 में अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा।

ऑनलाइन पीढ़ी

अध्ययनों से पता लगा है, आज 40% जोड़े ऑनलाइन मिलते हैं। 2037 में जन्म लेने वाले आधे बच्चे उन जोड़ों के होंगे जिनके बीच पहली बार इंटरनेट पर संपर्क हुआ था।

अधिक कार फ्री जोन

विश्व में कई सिटी सेंटरों, द्वीपों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों में कारों पर रोक बढ़ेगी। अमेरिका में कुल्डेसेक टेम्पे पहली ऐसी जगह होगी जहां निजी कारों पर पूरी तरह बंदिश रहेगी। यह इस वर्ष किसी समय शुरू हो जाएगी। स्कूटर, मोटरबाइक, राइड शेयरिंग सेवाओं को अनुमति दी जाएगी।

जानवरों के अंग

चीनी वैज्ञानिकों ने अभी हाल में सुअर के ऐसे बच्चों को जन्म दिया है जिनमें बंदरों की कोशिकाएं हैं। कैलिफोर्निया साल्क इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने मानव और बंदर की कोशिकाओं के भ्रूण बनाए हैं। इनसे मानव अंग बन सकेंगे।

सूर्य की अतिरिक्त रोशनी

अंतरिक्ष में घूम रहे पावर स्टेशन दिन में 24 घंटे सौर ऊर्जा से बिजली बनाएंगे। इसे लेजर या माइक्रोवेव एंटिना के जरिये धरती को भेजा जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोनॉट अकादमी के अनुसार 2040 तक यह टेक्नोलॉजी सस्ती हो जाएगी।

मशरूम के कपड़े

भविष्य के चमड़े जैसे गारमेंट मशरूम से बनेंगे। सैनफ्रांसिस्को की माइको वर्क्स सहित कई कंपनियां पशुओं के चमड़े का विकल्प तैयार कर रही हैं। यह पर्यावरण के लिए बेहतर होगा। इसकी रंगाई और सिलाई आसानी से हो सकेगी।

एलाना सैमुअल्स

आज जिस तरह की खेती हो रही है, वह धरती के लिए ठीक नहीं है। खाने-पीने की चीजों को पैदा करने के तरीकों में परिवर्तन जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र की 100 से अधिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जमीन और जल के बेतहाशा उपयोग से मनुष्य के लिए अपना खाना पैदा करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए कई आंत्रप्रेन्योर ऐसी फूड टेक्नोलॉजी में पैसा लगा रहे हैं जिससे धरती को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कई देशों में 47 से अधिक कंपनियां पौधों से मीट और डेयरी प्रोडक्ट बना रही हैं। इन कंपनियों ने पिछले एक दशक में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक जुटा लिए हैं। डच कंपनी मोसा मीट और सैन डिएगो की कंपनी ब्लूनालू ने 7800 करोड़ रुपए जुटाए हैं। ये कंपनियां कोशिकाओं से मांस और मछली जैसा प्रोटीन बनाती हैं। नीदरलैंड्स, जापान और न्यूजीलैंड ने भी लैब में मांस बनाने की रिसर्च में पैसा लगाया है। कंपनियां मीट से आगे जाकर सोच रही हैं। प्लेंटी, कैलिफोर्निया और एरोफार्म, न्यूजर्सी ने 200 करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया है। दोनों कंपनियां बड़े भवनों में फसल पैदा कर रही हैं। इन्हें वर्टिकल फार्म कहते हैं। एमिरेट्स फ्लाइट केटरिंग के साथ क्रॉप वन कंपनी दुबई में एक लाख 30 हजार वर्गफुट में विश्व का सबसे बड़ा वर्टिकल फार्म बना रही है।

(© 2019 Time Inc.) सर्वाधिकार सुरक्षित। टाइम मैग्जीन से अनुवादित और Time Inc. की अनुमति से प्रकाशित। पूर्व अनुमति के बिना किसी भी भाषा में पूरा या आंशिक रूप में प्रकाशित करना प्रतिबंधित। टाइम मैग्जीन और टाइम मैग्जीन लोगो Time Inc. के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुमति लेकर किया गया है।

देश संक्रमित

जापान 2
थाईलैंड 5
द. कोरिया 2
अमेरिका 2
ऑस्ट्रेलिया 1

देश संक्रमित

फ्रांस 3
मलेशिया 3
सिंगापुर 3
नेपाल 1
वियतनाम 2

भारत की क्या स्थिति है?

देश में 11 संदिग्ध जरूर मिले हैं। सौ से ज्यादा लोगों को निगरानी में रखा गया है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई सहित कुल 14 एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी किया गया है। 7 एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था शुरू की गई है । चीन और हॉन्गकॉन्ग से भारत आने वाले लोगों की जांच की जा रही है। लगभग 17 साल पहले भी सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा पैदा हो गया था।

कितने देशों में पहुंच?

चीन सहित 11 देशों में अभी तक संक्रमित लोग सामने आ चुके हैं। संक्रमितों की सर्वाधिक संख्या चीन में है। लेकिन दुनियाभर में ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। चीन के अलावा अन्य देशों की स्थिति इस लिस्ट में देखिए।

फोटो चीन के बीजिंग की है। यहां लॉन्गटन पार्क में नए साल की तैयारियों का जश्न मनाया जाना था। लेकिन कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच इसे अब रद्द कर दिया गया है।

इकोनॉमी पर असर

{2003 में सार्स का खतरा सामने आया। इससे 50 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। यानी करीब 3.55 लाख करोड़ रुपए। सार्स से ही सबक मिला था, कि कोई वायरस किस तरह इकोनॉमी को प्रभावित कर सकता है। मई 2003 में चीन में यात्रियों की संख्या 2002 के मुकाबले 40 फीसदी तक घट गई थी। स्विस बैंक यूबीएस के अनुसार विकास दर 12.5 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी रह गई थी।
{इसी तरह 2014-2016 के दौरान इबोला की वजह से गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियाेन जैसे देशों को 2.2 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
{वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार-फ्लू जैसे क्रॉस बॉर्डर आउटब्रेक्स की वजह से एक सदी पूर्व पांच करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इससे स्वास्थ्य को तो नुकसान हुआ ही। आर्थिक तौर पर भी घाटा हुआ। इन्हें आर्थिक नुकसान के तौर पर देखा जाए तो यह आंकड़ा 570 अरब डॉलर तक जाएगा।

चीनी नववर्ष का उत्साह फीका हुआ वायरस से

एक करोड़ से अधिक आबादी वाला वुहान चीन का सातवां सबसे बड़ा शहर और एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। यहीं पर कोरोना वायरस का पहला केस मिला। अब 18 शहरों में ट्रैवल बैन लगाया जा चुका है। लॉक डाउन में 5.60 करोड़ लोग फंसे हुए हैं। वुहान शहर में पर्यटकों को रोका हुआ है। 14 दिन की मेडिकल ऑब्जर्वेशन के बाद ही ये लोग होटल छोड़ सकते हैं। कोरोना आउटब्रेक के बाद चीन का शेयर मार्केट 5 फीसदी गिर गया था। चीन में अभी नववर्ष का उत्सव वायरस की वजह से फीका पड़ गया है। लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है। ऐसे में नए साल के सारे आयोजन रद्द कर दिए गए हैं।

चीन में भारतीय किस स्थिति में हैं?

पहली मरीज| प्रीति माहेश्वरी को चाहिए 1 करोड़ रु.

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- चीन के शेनझेन में प्रीति पहली भारतीय हैं, जो कोरोना वायरस से ग्रस्त पाई गई हैं। जैसे-जैसे चीन में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका इलाज महंगा होता जा रहा है। इलाज की दर अभी 10 लाख चीनी युआन पड़ रही है। यानी भारतीय मुद्रा में करीब एक करोड़ रुपए। प्रीति कोरोना वायरस टाइप-1 से ग्रस्त हैं। उन्हें मल्टीपल आॅर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम और सेप्टिक शॉक की शिकायत है। वे वेंटिलेटर पर हैं। उनका डायलिसिस और ब्लड प्योरिफिकेशन प्रोसेस चल रहा है। प्रीति के परिवार ने मदद के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क किया है। दूतावास ने भी चीन में रह रहे भारतीयों से संपर्क के लिए दो हॉटलाइन +8618612083629 और +8618612083617 शुरू की हैं।

चीन मास्क में

}भास्कर एक्सपर्ट

एंटीबायोटिक भी बेअसर साबित हो रही हैं, कोई समुचित इलाज नहीं है...

कोरोना वायरस के संबंध में सबसे खराब बात यह है कि फिलहाल इसका कोई इलाज दुनिया में कहीं पर नहीं है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि इस पर किसी भी एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है। ऐसे मेंं व्यक्ति के इसके चपेट में आने पर उसे बचाने के लिए डाॅक्टर्स बहुत कुछ नहीं कर सकते। ऐसा मामला सामने आने पर सबसे पहले आइसोलेट करना जरूरी है। ताकि संक्रमण को रोका जा सके। अच्छी बात यह है कि अभी तक देश में कोई केस पॉजिटिव नहीं आया है। जो संदिग्ध सामने आए हैं, उनमें अभी तक कोराेना की पुष्टि नहीं हुई है।

- डॉ. संदीप नायर
डायरेक्टर एवं एचओडी,
चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी डिज़ीज, बीएलके
सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली

चीन से फैलने वाला यह तीसरा बड़ा वायरस

{बर्ड फ्लू : 1996 में पहली बार चीन से फैला। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2003 से लेकर अब तक लगभग 440 लोगोंं की मौत बर्ड फ्लू से हो चुकी है।

{इबोला : 2014 से 2016 के बीच फैले इस वायरस से अकेले पश्चिमी अफ्रीका में ही 11,316 लोगों की मौत हुई थी। वहीं दुनिया के अन्य हिस्सों में 1597 लोगों ने वायरस के चलते जान गंवाई।

{सार्स : 2003 में दक्षिणी चीन से निकले इस वायरस ने 26 देशों के 8000 लोगों को प्रभावित किया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में इस वायरस से 774 लोगों की मौत हुई।

{मर्स : सितंबर 2012 से अब तक 27 देशों में इसका प्रकोप रहा है। 2494 लोग संक्रमित हुए। आठ सौ से ज्यादा मौतें हुई।

{स्वाइन फ्लू : 2009 में सामने आया। 2016 में भारत में सर्वाधिक मौतें हुईं। कुल 2,992 मौतें इससे हुईं।

चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग अक्सर अधिकारियों को अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली अप्रत्याशित घटनाओं से सचेत रहने की चेतावनी देते हैं। लोग अक्सर अनुमान लगाते हैं कि उनका मतलब बैंकों में गड़बड़ी या व्यापार में तनाव से संबंधित होगा। लेकिन इस बार यह अलग मामला था। चीन जानलेवा वायरस कोरोना से पीड़ित है। यह संक्रमण चीन में 17 साल पहले फैली बीमारी सार्स से सैकड़ों मौतों की काली याद को सजीव करता है। इससे चीन की विकास दर लगभग ठप पड़ गई थी। दिसंबर 2019 के अंत में कोरोना वायरस के सामने आने के बाद से अब तक यह खतरा 11 देशों में पहुंच चुका है। वायरस से प्रभावित मरीज अमेरिका, जापान, दक्षिण काेरिया और थाईलैंड में भी पाए जा चुके हैं। बता दें 2002 से 2003 के बीच सार्स वायरस से चीन और अन्य देशों में आठ हजार से ज्यादा लोग पीड़ित हुए थे। इनमें से दस फीसदी की मौतें हुई थीं। 2003 में चीन की विकास दर 12.5 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी ही रह गई थी। हालांकि, 2003 की तुलना में चीन आज ज्यादा गतिशील है। लगभग 4 लाख 50 हजार लोग रोज वुहान की राजधानी हुबेई से यात्रा करते हैं। 2018 में दो लाख पांच हजार लोगों ने रोज चीन से दूसरे मुल्कों के लिए उड़ान भरी। यह सार्स के दिनों से छह गुना अधिक है। 2003 के मुकाबले आज चीन की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है। उस दौर में निर्यात 35 फीसदी तक बढ़ गया था। 2019 में निर्यात की वृद्धि दर केवल 0.5 फीसदी रही। कोरोना का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा रहा है। इसके फैलने की खबर से चीनी शेयर बाजार में 5 फीसदी की गिरावट आई है। सार्स के दौरान हॉन्गकॉन्ग का सूचकांक 20 फीसदी गिरा था। सार्स के समय सर्विस सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। यह जीडीपी का 40 फीसदी था, आज यह 50 फीसदी है।

यह वायरस है क्या ?

यहां जिस खतरे की बात हो रही है। उसका नाम है- नोवेल कोरोना वायरस। दरअसल, कोरोना वायरस अकेला वायरस नहीं है। यह कई वायरस का समूह है। बाकी अन्य वायरस की तरह यह भी जानवरों से फैलता है। शुरुआत में जो भी संक्रमित सामने आए, वे सभी वुहान के सी फूड मार्केट में या तो काम करते थे, या वहां से अक्सर खरीदारी करते थे। कोरोना वायरस के दूसरे प्रकार पहले तबाही मचा चुके हैं। जैसे- सार्स। सार्स यानी सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम। यह 2002-2003 में फैला था। इससे आठ हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे। साढ़े सात सौ से ज्यादा जानें गई थीं। वहीं मर्स यानी मिडिल ईस्टर्न रेस्पिरेटरी सिंड्रोम की मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण की दर कम थी। लेकिन जान जाने की दर बहुत ज्यादा थी। ढाई हजार संक्रमित लोगों में से 35 फीसदी की मौत हो गई थी।

इसके लक्षण क्या हैं?

वायरस से निमोनिया होता है। कफ, बुखार और सांस लेने में तकलीफ शुरुआती लक्षण हैं।

कितना खतरनाक है?

निमोनिया के बाद मरीज की स्थिति ऑर्गन फेलियर तक जा सकती है। चूंकि, यह वायरल निमोनिया है, ऐसे में इसके िखलाफ एंटी-बायोटिक्स बेकार हैं। एंटी-वायरल ड्रग्स का भी कोई असर नहीं होगा। अस्पताल में भर्ती कराने की स्थिति में लंग्स और बाकी ऑर्गन्स को सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है। रिकवरी कब, कैसे होगी, यह सिर्फ इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। जिनकी मौतें हुई हैं, उनमें अधिकतर का इम्यून सिस्टम कमजोर था। कुल मिलाकर कहें तो अभी इसके खिलाफ कोई सटीक और समुचित उपचार की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

चीन में असर.

18 शहरों में ट्रैवल बैन, 5.60 करोड़ लोग घरों
में फंसे, शेयर मार्केट
में 5 फीसदी गिरावट

अब तक 41 मौतें, 1300 से ज्यादा संक्रमित, इस वायरस का खतरा कितना बड़ा?

कोरोना वायरस. वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए**

11 देशों में असर, वर्ल्ड इकोनाॅमी को खतरा, 2003 में सार्स से हुआ था ~3.55 लाख करोड़ का नुकसान

चीन का कोरोना वायरस

इन आंदोलनों की अगुआई कर रहे युवा अपने हाथ में सत्ता की कमान संभाल रहे हैं। फ्रांस, आयरलैंड, आस्ट्रिया, यूक्रेन में युवा नेताओं की नेतृत्व शैली अलग है। फिनलैंड में 34 वर्षीय सना मारिन विश्व की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी हैं। आस्ट्रिया में सेबास्टियन कुर्ज (33 वर्ष) दोबारा चांसलर बने हैं। 30 से 40 वर्ष की आयु के कुछ और नेता हैं- न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न (39), यूक्रेन के प्रधानमंत्री ओलेस्की हॉनचारुक (35), एल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नईब बकेले (38)।

ये नेता युवा हैं पर इन्हें कठिन अनुभवों से गुजरना पड़ा है। कई लोगों ने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी और ग्लोबलाइजेशन की संभावनाओं को विफल होते देखा है। सोशल मीडिया ने आर्थिक, राजनीतिक भ्रष्टाचार को सामने रखा है। ब्रिटेन की सबसे युवा सांसद 23 साल की नाडिया व्हिटमोर कहती हैं, हम उन लोगों के आसपास पले-बढ़े हैं जिन्हें भोजन के लिए तक संघर्ष करना पड़ता है। मंदी के बाद खर्च में कमी के सरकारी उपायों के कारण यूरोप में युवाओं के बीच सामाजिक सुधारों के लिए प्रतिबद्धता पैदा हुई है।

अनुभवों से गुजरना पड़ा है। कई लोगों ने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी और ग्लोबलाइजेशन की संभावनाओं को विफल होते देखा है। सोशल मीडिया ने आर्थिक, राजनीतिक भ्रष्टाचार को सामने रखा है। ब्रिटेन की सबसे युवा सांसद 23 साल की नाडिया व्हिटमोर कहती हैं, हम उन लोगों के आसपास पले-बढ़े हैं जिन्हें भोजन के लिए तक संघर्ष करना पड़ता है। मंदी के बाद खर्च में कमी के सरकारी उपायों के कारण यूरोप में युवाओं के बीच सामाजिक सुधारों के

ये नेता युवा हैं पर इन्हें कठिन अनुभवों से गुजरना पड़ा है। कई लोगों ने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी और ग्लोबलाइजेशन की संभावनाओं को विफल होते देखा है। सोशल मीडिया ने आर्थिक, राजनीतिक भ्रष्टाचार को सामने रखा है। ब्रिटेन की सबसे युवा सांसद 23 साल की नाडिया व्हिटमोर कहती हैं, हम उन लोगों के आसपास पले-बढ़े हैं जिन्हें भोजन के लिए तक संघर्ष करना पड़ता है। मंदी के बाद खर्च में कमी के सरकारी उपायों के कारण यूरोप में युवाओं के बीच सामाजिक सुधारों के लिए प्रतिबद्धता पैदा हुई है।

हांगकांग, भारत और सूडान में युवाओं के नेतृत्व ने अनुदारवादी और दमनकारी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोला है। वे ईराक और चिली में भ्रष्टाचार के खात्मे की मांग कर रहे हैं। लेबनान में युवा वर्ग ध्वस्त राजनीतिक सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहा है। अरब युवकों के नए सर्वे के अनुसार सरकारों के दमन और आर्थिक सुस्ती के कारण 2010 की क्रांति (अरब वसंत) के दौर में जागी युवाओं की उम्मीदें टूट गई हैं।

कई देशों में 47 से अधिक कंपनियां पौधों से मीट और डेयरी प्रोडक्ट बना रही हैं। इन कंपनियों ने पिछले एक दशक में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक जुटा लिए हैं। डच कंपनी मोसा मीट और सैन डिएगो की कंपनी ब्लूनालू ने 7800 करोड़ रुपए जुटाए हैं। ये कंपनियां कोशिकाओं से मांस और मछली जैसा प्रोटीन बनाती हैं। नीदरलैंड्स, जापान और न्यूजीलैंड ने भी लैब में मांस बनाने की रिसर्च में पैसा लगाया है। कंपनियां मीट से आगे जाकर सोच रही हैं। प्लेंटी, कैलिफोर्निया और एरोफार्म, न्यूजर्सी ने 200 करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया है। दोनों कंपनियां बड़े भवनों में फसल पैदा कर रही हैं। इन्हें वर्टिकल फार्म कहते हैं। एमिरेट्स फ्लाइट केटरिंग के साथ क्रॉप वन कंपनी दुबई में एक लाख 30 हजार वर्गफुट में विश्व का सबसे बड़ा वर्टिकल फार्म बना रही है।

कई वैज्ञानिक कुछ कंपनियों के इन दावों पर संदेह जताते हैं कि वे दस साल बाद बड़े पैमाने पर कोशिकाओं से मछलियां और मीट बना सकेंगी। वर्टिकल फार्म्स पर सवाल उठे हैं। इन्हें चलाना खर्चीला है। उनमें बिजली की जरूरत पड़ती है। परंपरागत खेती में फसल को रोशनी सूर्य से मिलती है। दूसरी तरफ फूड टेक्नोलॉजी कंपनियों का कहना है कि युवा पीढ़ी को पुराने लोगों की तुलना में धरती की अधिक चिंता है। इसलिए वे पौधों से बने प्रोटीन को बढ़ावा देंगे। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के सर्वे में बताया गया कि पौधों से बने मीट खाने वाले आधे लोगों की आयु 40 वर्ष से कम है।

47 कंपनियां पौधों से मीट बना रहीं, दस साल में 16 हजार करोड़ रुपए जुटाए


लीजा अबेंड/ हेलसिंकी

दुनिया की सबसे युवा राष्ट्रप्रमुख फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन का रवैया बहुत व्यावहारिक है। वे चाहती हैं कि उन्हें किसी महिला की बजाय सामान्य तौर पर लिया जाए। किसी खास दर्जे की जरूरत नहीं है। कई लोग मानते हैं कि वे युवा महिला रोल मॉडल की बढ़ती कतार में अलग जगह बना सकती हैं। वैसे, वे ऐसे किसी लेबल से इनकार करती हैं। सना का कहना है, मौजूदा रोल मॉडल को उनके जेंडर या आयु ने विशेष हस्ती नहीं बनाया है। ग्रेटा थनबर्ग लड़की होने के कारण रोल मॉडल नहीं हैं। ग्रेटा ने जलवायु के पक्ष में आवाज उठाई है इसलिए वे रोल मॉडल हैं। वे मुद्दों के बारे में बात करती हैं लिहाजा लोगों को प्रेरित करती हैं।

दिसंबर में सत्ता संभालने वाली 34 वर्ष की सना फिनलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं। उनकी पार्टी की चार प्रमुख नेता महिलाएं हैं। उनके 19 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 12 महिलाएं हैं। सना आमराय से काम करना चाहती हैं। वे सप्ताहांत में अपने पति और छोटी बेटी के पास घर आ जाती हैं। सना बताती हैं, वे स्थानीय जनरल स्टोर में किसी अन्य व्यक्ति के समान शॉपिंग करती हैं।

, ग्वालियर, रविवार 26 जनवरी, 2020 | 10

डॉन स्टीनबर्ग

भविष्य के इनोवेशन

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