रिश्तों की जड़ें नहीं खंगालना चाहिए, शायद दुख ही मिले
Emotional Story
writerPreeti AgrawalIndore
इरा तुम भी पढ़ोगी तो हंसी नहीं रुकेगी। एक औरत 2 साल तक घर मे लगे पौधों को पानी देती रही। जब उन पौधों को हरा भरा देखती तो खुश होती। अपने खिले गुलदान को देख वो भी खिल जाती थी, सोचती थी उसकी मेहनत का सिला है जो उसका गुलशन इस कदर खिला है। लेकिन...**
सि ड तुम बकवास शायरी छोड़ो और बताओ कि इसमें कौन सी हंसने वाली बात है। तुम जानते हो मुझे भी बागवानी का शौक है, अच्छा लगता है उनसे बतियाना। अपना सब कुछ उनके साथ बांट लेती हूं इस तसल्ली के साथ कि वो चुपचाप सुन लेंगे। उनके पास न तो वक्त की तंगी का रोना होता है न का किसी से भेद न खोलने का डर। सिड, जब किसी फूल को खिलते देखती हूं तो मैं भी खिल सी जाती हूं और किसी मुरझाए से फूल के साथ होती हूं थोड़ी देर उदासी को भी जी लेती हूं।
इरा मैडम, अपने इंद्रधनुष के झरोखे से झांक कर जरा मेरी खबर पर गौर करने का कष्ट करेंगी। मैं तुम से उन मोहतरमा की बात कर रहा था और तुम अपनी बात बीच में ले आई। मुद्दे की बात तो सुनो। जब उन मोहतरमा ने उन पौधों को दूसरे गमले में शिफ्ट करने के लिए गमले से निकाला तो जानती हो क्या हुआ? मैडम सदमे में आ गई ये जान कर की वो पौधे नकली थे। सोचो 2 साल तक उन मैडम को पता ही नहीं चला कि उनके पौधे नकली थे।
इतनी मज़ेदार बात सुनकर भी तुमको हंसी नहीं आई। क्या यार तुम्हारी हंसी इतनी महंगी क्यों है?
सिड .............उन मोहतरमा को क्या कहें, वो तो 2 साल में समझीं की पौधे नकली थे। हम तो ताउम्र नकली रिश्तों को नरिश करते हैं सहेजते हैं, सम्भालते और एक उम्र के बाद जब नकली चमक से भरे रिश्तों की जड़े खंगालते हैं तो पाते हैं कि सब कुछ ही नकली था।
सिड कभी लगता है कि जड़े खंगालने की गलती ही नहीं करनी चाहिए। शायद दुख ही मिले। भरम बना रहे तो क्या हर्जा है बोलो?
इन सब दुनियावी बातों के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता इरा पर इतना जरूर जानता हूं, इरा कुछ पौधे गमलों में लगते हैं और कुछ जमीन की मिट्टी में। तुम दिल की मिट्टी में लगा दरख़्त हो जिसकी महीन महीन सी जड़े शिरा बनकर मेरे पूरे बदन में फैली हैं। इस दरख़्त की जड़ें खंगालना मतलब खुद को गहरे तक खोदना होगा पर उसके बाद भी जो हाथ आएगा वो भी तुम्हारा ही वजूद होगा इरा। बस इतना समझ लेना।