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सीबीआई की जांच में भी वही आरोपी, जिन्हें जीआरएमसी की टीम ने संदिग्ध माना था

एक वर्ष पहले
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पीएमटी फर्जीवाड़ा

गजराराजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा संदिग्ध छात्रों की जांच के लिए गठित की गई डॉ.एसी अग्रवाल की कमेटी ने जिन छात्रों को संदिग्ध माना था। छात्र आरोप लगा रहे थे कि डॉ. अग्रवाल ने चहेते छात्रों को बचाने के लिए उनका नाम संदिग्ध में डाल दिया है। सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट में उन्हीं छात्रों को संदिग्ध मानते हुए पर्याप्त सुबह होने की बात कही है। कॉलेज प्रबंधन सीबीआई की चार्जशीट में जीआरएमसी के छात्रों की छंटनी कर रही है।

जीआरएमसी में 7 अप्रैल 2009 में पत्र आया था जिसमें सत्र 2009 में कुछ छात्रों संदिग्ध बताते हुए पूरे बैच की जांच करने के लिए कहा गया था। डीएमई ने इसकी जांच की थी, जिसमें 6 मई 20011 को 36 छात्रों को संदिग्ध माना था। इसके बाद 30 नवंबर 2011 में प्रशासन को डीएमई कार्यालय से एक पत्र मिला था जिसमें 2006 से जांच करने के लिए कहा था। इस आधार पर तत्कालीन डीन ने डॉ. एसी अग्रवाल की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी से दस्तावेजों की जांच कराई थी। जांच कमेटी ने 30 अप्रैल 2012 को जो जानकारी भेजी थी,जिसमें सत्र 2006 के 29 छात्रों में से छह छात्रों को संदिग्ध माना गया था। 2010 बैच में 105 छात्रों की जांच की गई थी जिसमें 70 सही पाए गए थे। इसके उपरांत 2006 से लेकर 2012 तक के छात्रों की जांच की गई। 2014 में यह मामला सीबीआई को चला गया था। इन छात्रों के पूरे दस्तावेज सीबीआई ने एसआईटी से ले लिए। इस मामले की पूरी जांच सीबीआई करके 200 छात्रों का चालान न्यायालय में पेश कर दिया है। सीबीआई ने करीब डेढ़ दर्जन छात्रों को क्लीनचिट भी दी है। इन छात्रों में से अधिकांश या तो कॉलेज से पढ़ाई करके जा चुके हैं या फिर पहले ही निष्कासित हो चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट में 2006 के उन सभी छात्रों को पीएमटी फर्जीवाड़े का दोषी माना है जिन्हें डॉ.एसी अग्रवाल की कमेटी ने संदिग्ध बताया था।

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