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संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसने गलती न की हो, इसलिए हमें दूसरों की गलतियों को मन में रखकर नहीं बैठना चाहिए

Gwalior News - चेंबर में आयोजित क्षमावाणी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से हाथ जोड़कर क्षमा मांगते पूर्व केंद्रीय मंत्री...

Sep 17, 2019, 07:35 AM IST
चेंबर में आयोजित क्षमावाणी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से हाथ जोड़कर क्षमा मांगते पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया। दूसरे चित्र में मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर उनके आशीर्वाद स्वरूप पुष्प का इंतजार करते हुए। इनसेट में वह पुष्प, जिसके लिए वे इंतजार कर रहे थे।

सिटी रिपोर्टर| ग्वालियर

संसार में एेसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसने जीवन में कोई गलती नहीं की हो। लेकिन हमें किसी की गलती को मन में रखकर नहीं बैठ जाना चाहिए। जब तक हम मन की कटुता दूर नहीं करेंगे तब तक क्षमावाणी पर्व मनाने का कोई अर्थ नहीं। जैन धर्म हमें क्षमा करना सिखाता है। हमें भी रोजमर्रा की कटुता, कलुषता को भूल कर एक-दूसरे से माफी मांगकर गिले-शिकवे दूर कर लेने चाहिए। माफी करने वाला महान होता है। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चेंबर अॉफ कॉमर्स में अायोजित क्षमावाणी पर्व महोत्सव में कही।

श्री सिंधिया ने कहा कि दिल से मांगी गई क्षमा हमें सज्जनता और सौम्यता की अोर ले जाती है। हो सकता है जिसने गलती की हो वह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो अौर हम उसकी जरा सी गलती के लिए माफ न करते हुए उसे खो दें। इसलिए हमें माफ करने अौर तुरंत माफी देने की अादत डाल लेनी चाहिए। जो हमें निश्चित ही बहुत ही ऊंचाइयों पर ले जाएगी। क्षमावाणी के इस पावन पर्व से समाज के हर व्यक्ति को प्रेरणा लेना चाहिए। क्षमावाणी पर्व को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। श्री सिंधिया ने कहा कि मेरे पिता ने मुझे 8 वर्ष की आयु में जैन मंदिर के दर्शन कराए थे। मैं खुद भी जैन धर्म का प्रशंसक हूं। मैं यहां देश को धर्म, संस्कृति, प्रेम अौर क्षमा का जैन धर्म के अपने परिवार के बीच आया हूं। श्री सिंधिया ने मंच से सभी से हाथ जोड़कर क्षमा याचना की। इस अवसर पर प्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि क्षमावाणी पर्व मन की सफाई का पर्व है। हमारे मन में सबके प्रति दया की भावना रखना चाहिए। क्षमावाणी का यह पर्व पूरे विश्व में जैन समाज के लोगों को अलग ही पहचान दिलाता है। आज देश में कितनी कटुता फैली है हर कोई चाहता है कि उसकी चले लेकिन जैन समाज सबको साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक मुन्नालाल गोयल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, कार्यक्रम संयोजक दिनेश जैन, चेंबर के मानसेवी सचिव प्रवीण अग्रवाल, डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, प्रतिष्ठाचार्य पं. अजीत शास्त्री, जैन महिला परिषद की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. आदर्श दीवान, पूर्व महाधिवक्ता आरडी जैन आदि उपस्थित थे।

साफा पहनाकर किया सम्मान

क्षमावाणी पर्व समारोह का शुभारंभ श्री सिंधिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। जैन समाज के लोगों ने श्री सिंधिया का साफा पहनाकर सम्मान किया। मंगला चरण मधु अजमेरा अौर महिला परिषद की महिलाओं ने किया। इस अवसर पर पं. अजीत शास्त्री ने क्षमावाणी पर्व का महत्व बताया।

कुलगुरु हजरत मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर सिंधिया ने की पूजा, 66 मिनट बाद मिला बाबा का आशीर्वाद

ग्वालियर| गोरखी देव घर स्थित हजरत श्री मंसूर शाह औलिया बाबा का उर्स सोमवार को मनाया गया। उर्स समारोह का शुभारंभ सोमवार शाम 5 बजे पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। देवघर पहुंचकर श्री सिंधिया ने कुल गुरु की पूजा-अर्चना की। पूजा अर्चना के करीब 66 मिनट बाद श्री सिंधिया को अाशीर्वाद के रूप में फूल मिला।

देवघर में श्री सिंधिया 5.30 बजे पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 6.20 बजे पूजा-अर्चना शुरू की। पूजा से पूर्व बाबा की गद्दी को सबसे पहले बेल पत्री से सजाया गया। उसके बाद उसके ऊपर गुल मेंहदी के सफेद अौर लाल फूलों से सजाया गया। इनके ऊपर लाल गुलाब के फूल डाले गए। गद्दी को फूलों से सजाने के बाद उस पर चादर अौर टोपी रखी गई। इसके बाद श्री सिंधिया ने पूजा-अर्चना कर कुल गुरु की आरती उतारी। आरती के बाद शाम 7.33 बजे अाशीर्वाद के रूप में उन्हें फूल मिला। अाशीर्वाद मिलने के बाद उन्होंने कुलगुरु की परिक्रमा लगाई। प्रसाद ग्रहण किया अौर तिलक लगाया। इसके बाद उन्होंने ढोलीबुवा मठ के महंत सच्चिदानंद महाराज अौर शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी का सम्मान किया। अंत में लोगों ने उन्हें नजराने भेंट किए, जिसमें कपड़े, इत्र, फल, मेवे, पान आदि शामिल थे।

फूलों से सजी मंसूर शाह औलिया की दरगाह।

फूल गिरने तक की जाती है बाबा की पूजा

गोरखी देवघर में कुलगुरु की पूजा तब तक चलती रहती है जब तक बाबा का आशीर्वाद नहीं मिल जाता। पूजा के दौरान देवघर में शहनाई वादन चलता रहा। वहीं शाम को कव्वाली का कार्यक्रम अायोजित हुआ अौल लोगों ने भंडारे में प्रसादी ग्रहण की।

हर साल पूजा करने आते हैं राजवंश के प्रमुख

बाबा मंसूर शाह का उर्स पर हर साल सिंधिया राजवंश के प्रमुख पूजा करने आते हैं। राजवंश में कोई भी शुभ काम करने से पहले गोरखी आकर अपने कुलगुरु बाबा मंसूर शाह की पूजा करने की परंपरा है। यह परंपरा सिंधिया महादजी सिंधिया के समय से चली आ रही है।

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