जिनके खिलाफ जांच है वही अफसर हैं कार्यालय में पदस्थ
मप्र हाउसिंग बोर्ड के डिप्टी कमिश्नर एसके सुमन और एक अन्य कर्मचारी तेजेंद्र कुमार घोरपड़े के खिलाफ महाराजपुरा थाना पुलिस ने 30 नवंबर 2019 को आईपीसी की 10 विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। इन पर रोहित चड्ढा को आवंटित प्लाट फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार कर दूसरे को बेचने का आरोप है। फरीदाबाद निवासी रोहित ने 1994 में प्लॉट रजिस्टर्ड कराया था और उसका पूरा पैसा भी जमा कर दिया था। कुछ समय बाद जब रोहित प्लॉट पर निर्माण कराने पहुंचे तो पता चला कि उनके प्लॉट की रजिस्ट्री वर्ष 2005 में किसी दूसरे के नाम कर दी गई है।
एक ही दिन में हुई प्रक्रिया
खास बात यह है कि सात जुलाई 2005 को रोहित चड्ढा के फर्जी हस्ताक्षर से रजिस्ट्री का आवेदन दिया गया और उसी दिन तत्कालीन संपत्ति अधिकारी एसके सुमन एवं कर्मचारी तेजेंद्र कुमार घोरपड़े ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूखंड क्रमांक ईई-288 डी का मूल्य निर्धारण स्वीकृत किया। तत्काल ही एमआर के माध्यम से पैसा कार्यालय में ही एसके सुमन के द्वारा जमा करा दिया गया और रजिस्ट्री (लीज डीड) की कार्रवाई भी कर दी गई। आठ जुलाई 2005 को पंजीयन कार्यालय में फर्जी रोहित चड्ढा खड़ा कर रजिस्ट्री की गई। यानी ये सारी प्रक्रिया एक ही दिन में हो गई।
मैं जानकारी लूंगा
किसी अधिकारी पर केस चल रहा है और वह उसी कार्यालय में पदस्थ है। यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं इसकी जानकारी लेता हूं।
संजय दुबे , प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन
कैसे होगी निष्पक्ष जांच
जो लोग इस केस में आरोपी हैं वे ही यहां अधिकारी हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है। इन दोनों को वहां से हटाना चाहिए।
रोहित चड्ढा, शिकायतकर्ता
आप पुलिस से बात करें
इस केस के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। पुलिस की जांच कहां तक पहुंची, इस संबंध में आप पुलिस से ही बात करें।
एसके सुमन, उपायुक्त हाउसिंग बोर्ड
हमें दस्तावेज नहीं मिले हैं
हमें मामले से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले हैं। फाइल मिलने के बाद हम जांच करके कोर्ट में दस्तावेज पेश करेंगे।
आसिफ मिर्जा बेग, टीआई महाराजपुरा
ये है नियम: जिला अभियोजन अधिकारी लोकायुक्त अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग के सर्कुलर के अनुसार कर्मचारी अथवा अधिकारी के खिलाफ उस पद पर रहते हुए शिकायत की गई है तो उनका दूसरे जिले में ट्रांसफर होना चाहिए।
हाउसिंग बोर्ड के उपायुक्त एसके सुमन पर चल रही जांच में बोर्ड के अफसर ही बाधा बने हुए हैं। जहां जांच होनी है अफसरों ने श्री सुमन को वहीं पदस्थ कर रखा है, ऐसे में न तो पुलिस को अभी तक दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। इसके चलते तीन माह बीतने के बाद भी चालान पेश नहीं हो पाया है।