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तिघरा प्लांट की क्षमता बढ़ाई नहीं, नई लाइनों में लीकेज इस बार भी गर्मी में लोगों को सताएगी पानी की समस्या

Gwalior News - तिघरा बांध के पास बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता का विस्तार हो जाता तो इस बार गर्मियों में दक्षिण और...

Feb 16, 2020, 07:31 AM IST
Gwalior News - mp news tighara plant39s capacity not increased leakage in new lines will persecute people in the heat this time too

तिघरा बांध के पास बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता का विस्तार हो जाता तो इस बार गर्मियों में दक्षिण और ग्वालियर पूर्व के लोगों को 70 लाख लीटर पानी रोजाना मिल सकता था। अमृत योजना में इसका प्रावधान भी है, लेकिन इस संबंध में न तो नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों ने कोई रुचि दिखाई और न ही काम का ठेका लेने वाली कंपनी ने इसे गंभीरता से लिया।

याद रहे, लश्कर क्षेत्र के लोग पिछले लंबे समय से पानी की परेशानी झेल रहे हैं। यहां जमीन में पानी न होने के कारण गर्मियों की शुरुआत के कारण नलकूप भी सूख जाते हैं। इसी आधार पर अमृत योजना में तिघरा प्लांट के विस्तार का प्लान शामिल किया गया था, लेकिन योजना की अवधि समाप्त होने लगभग एक माह शेष है, इसके बाद भी अभी तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन तक फाइनल नहीं हुआ है। यहां काम कब से शुरू हो जाएगा। इस पर अफसर चुप्पी साधे हैं। यदि इसका दायरा 45 एमएलडी से बढ़कर 52 एमएलडी हो जाता, तो शहर की बड़ी आबादी को हर दिन तिघरा जलाशय का फिल्टर किया 70 लाख लीटर पानी हर दिन अतिरिक्त मिलता। इतना ही नहीं अमृत प्रोजेक्ट के तहत जहां-जहां पानी की लाइन डाली जा चुकी हैं, उनमें लीकेज की समस्या अभी से आने लगी है। 100 से ज्यादा लीकेज नई लाइनों में आ चुके हैं। पीएचई के इंजीनियरों की शिकायतों के बाद भी निराकरण नहीं हो पा रहा है।

क्षमता बढ़ जाए तो मोतीझील व रक्कस से नहीं लेना पड़ेगी मदद

दक्षिण विधानसभा की जनता का पानी देने के लिए मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और रक्कस टैंक से पानी लेना पड़ता है। 60-70 एमएलडी पानी लेकर टंकियों को भरा जाता है। यदि तिघरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सही वक्त पर बढ़ जाती, तब इन दोनों जगह से पानी लेने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पानी ग्वालियर और ग्वालियर पूर्व विधानसभा में दिया जा सकता था।

तिघरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर जल्द शुरू करेंगे काम


निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट देखकर प्रशासक बोले- पानी का मामला है, समझौता नहीं करूंगा

ग्वालियर| शहर में पहली बार प्रशासक नगर निगम एमबी ओझा निगम के कामों को देखने के लिए फील्ड में निकले। वे सबसे पहले हनुमान बांध पहुंचे। यहां पर नई सीवर लाइन के प्रोजेक्ट को समझा, क्योंकि इस लाइन को डालने में अड़चन आ रही है। उन्हाेंने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। प्रशासक का सबसे ज्यादा ध्यान शहर में अमृत योजना के तहत चल रहे कामों के कारण खुदी सड़कों की ठीक कराने पर था। जलालपुर में बन रहे 165 एमएलडी के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर पहुंचकर प्रशासक ने साफ कहा, पानी का मामला है। इस पर कोई समझौता नहीं करूंगा, इसलिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना। ईई जागेश श्रीवास्तव ने बताया कि यहां पर राष्ट्रीय परीक्षण और अंश शोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएवीएल) से भी जांच कराते हैं। इस पर आयुक्त ने सुझाव दिया कि आगरा में इसकी एक और लैब है। वहां भी दूसरा नमूना भेजकर क्राॅस जांच कराई जा सकती है। प्रशासक ने इस पर सहमति दी। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए भी प्रशासक ने कहा।

ये भी दिए निर्देश: {जलालपुर में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर प्रशासक ने कहा, मानकों का ध्यान रखा जाए। उसी हिसाब से सरिया व मटेरियल डाला जाए।

{निगम अफसरों ने कहा, स्वर्ण रेखा पर एक पुल बन जाएगा तो सीवर और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का रास्ता नजदीक हो जाएगा। प्रशासक ने इस पर सहमति दे दी।

प्लांट की क्षमता 45 एमएलडी से बढ़ाकर 52 एमएलडी हो तो मिलेगा अतिरिक्त 70 लाख लीटर पानी

तिघरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट

तिघरा प्लांट: 52 एमएलडी क्षमता वाले पांच नए पंप लगाए जाएंगे

अभी तिघरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 45 एमएलडी की क्षमता वाले 6 पंप लगे हैं। 3 पंप प्लांट पर और दो पंप रा-वाटर पंप हाउस पर लगाए गए हैं। एक-एक पंप अतिरिक्त रखा जाता है। प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए 52 एमएलडी के हिसाब से पंप लगाए जाएंगे। बिजली के ट्रांसफार्मर को भी इसी हिसाब से बदला जाएगा। बता दें कि दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 20 पानी की टंकियां हैं। 5 जगह सीधी सप्लाई दी जाती है। यहां तक पानी तिघरा प्लांट, मोतीझील और रक्कस टैंक से लिया जाता है। यहां 8 नई टंकियों में से 2 तैयार हो चुकी हैं।

अमृत योजना: शहर में जहां नई लाइन चालू की, वहां हुए लीकेज

अमृत योजना के तहत शहर में 434 किलोमीटर क्षेत्र में पानी की लाइन डाली जा चुकी है, लेकिन कई लाइनें बिना डीएमए के चालू कर दी गई हैं। जहां पानी पहुंच रहा है, वहां लाइनों में लीकेज होने लगे हैं। ग्वालियर विधानसभा में ही 49 जगह लाइन टूटी है। इंजीनियरों ने लिखकर दे दिया है कि जितना पानी बहकर बर्बाद हो रहा है, उसका बिल विष्णु प्रकाश पुंगलिया कंपनी को भेजने वाले हैं। लश्कर क्षेत्र में 30 से 40 जगह लाइन में लीकेज सामने आए हैं। ग्वालियर विस में 15-20 जगह लीकेज रहता है।

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