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जिनकी सुविधा के लिए बनाए टॉयलेट उन्हीं ने नहीं रखा ध्यान, फ्लश टैंक और वॉशबेसिन तोड़े, टोंटियां तक उखाड़ीं

2 वर्ष पहले
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शहर को खुले में शौच मुक्त करने के साथ ही मुख्य मार्गों और बाजारों में जनसुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपए खर्च कर सर्वसुविधायुक्त टॉयलेट बनवाए थे। लेकिन जिन लोगों की सुविधा के लिए ये टाॅयलेट बनावाए गए, उन्होंने खुद ही इस सुविधा को बदहाली की कगार पर पहुंचा दिया। इनका इस्तेमाल करने वाले लोगों ने टायॅलेट सीट के ऊपर लगे फ्लश टैंक और वॉशबेसिन तोड़ दिए। इतना ही नहीं कुछ टॉयलेट से तो नल की टोंटियां तक उखाड़ ले गए। नगर निगम को ओडीएफ डबल प्लस घोषित करने के बाद दैनिक भास्कर ने शहर के टॉयलेट्स की जानकारी ली तो हालात गड़बड़ दिखाई दिए। निगम ने सबसे पहले शहर को खुले में शौचमुक्त कराने के लिए 19 हजार लोगों के घरों में व्यक्तिगत टॉयलेट बनवाए थे। उसके बाद प्रत्येक एक किलोमीटर के दायरे में मुख्य मार्गों और बाजारों में 155 टाॅयलेट्स का निर्माण कराया गया। इन सभी में पानी, प्रकाश और सफाई की सुविधा के साथ-साथ इस बात भी ध्यान रखा कि व्यवस्थाओं को लेकर लोगों का फीडबैक मिल सके।लोगों ने सुझााव तक नहीं िदए। इसके लिए बीएसएनएल की मदद से टाॅयलेट में मशीनें भी लगवाई गईं। 30 शौचालय बनेंगे, जहां नि:शुल्क मिलेगी सुविधा: हाल ही में नगर निगम सुलभ संस्था की मदद से 30 सर्वसुविधायुक्त टॉयलेट बनवा रहा है। इनका इस्तेमाल करने के लिए लोगों को चार्ज भी नहीं देना होगा।

देखिए... अब इसके लिए जिम्मेदार कौन, महिलाओं के लिए बने बाथरूम में नहा रहे थे पुरुष
ट्रॉमा सेंटर माधव डिस्पेंसरी: यहां पर महिला और दिव्यांग टॉयलेट में पुरुष नहा रहे थे। जबकि पुरुष टॉयलेट में कोई नहीं था। उपयोगकर्ताओं का कहना है कि पुरुष टॉयलेट बंद था इसलिए यहां नहा रहे थे। यहां मौजूद कर्मचारी रणधीर सिंह का कहना है कि रोजाना लोगों को समझाते हैं, लेकिन वे नहीं मानते बल्कि झगड़ा और करते हैं। महिला और दिव्यांग के टॉयलेट में पुरुष वैसे ही घुस गए थे। सुबह 4:30 से रात 9 बजे तक खोलते हैं।

सिंधी कॉलोनी कम्युनिटी टॉयलेट: वार्ड-52 में आने वाले टॉयलेट के अंदर नलों में टोंटी नहीं थी। फ्लश टैंक टूटे पड़े थे। यहां पर महिला टॉयलेट अलग से बना है। उसके भी हालात ऐसे ही थे। किसी कर्मचारी की तैनाती न होने के कारण लोग इसे मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। मानस भवन सार्वजनिक जन सुविधा केंद्र : यह हाल में नया बना हुआ है। यहां पर लगी फीडबैक मशीन भी खराब हो गई है।

जेएएच परिसर स्थित महिला शौचालय में नहाता पुरुष। दूसरे चित्र में कम्पू कस्तूरबा चौराहे पर शौचालय में टूटी टाइल्स।

सुलभ जनसुविधा केंद्र हनुमान टॉकीज: यहां फीडबैक मशीन बंद थी। जब कर्मचारी विशाल से पूछा तो उसने अंदर जाकर प्लग लगा दिया। यहां पर दिव्यांग टॉयलेट की कुंदी बाहर से टूटी पड़ी थी। गोविंदपुरी जनसुविधा केंद्र: इस टॉयलेट में लगीं नलों की टोटियां को लोगों ने तोड़ दिया है। शॉवर भी गायब था। यहां पदस्थ राजू का कहना है कि कब तक शिकायत करें, लोग मानने को तैयार नहीं हैं। अपने स्तर पर जितना बनता है, सुरक्षा करते हैं।

थाटीपुर कम्युनिटी टॉयलेट: टॉयलेट के बाहर और आस-पास से तीन बार अतिक्रमण हटाया जा चुका है।

9 टाॅयलेट बेहतर कराए हैं सर्वसुविधायुक्त टॉयलेट बनाने के बाद भी कुछ स्थानों पर लोग उन्हें मेंटेन नहीं रहने दे रहे हैं। हाल ही में 9 टॉयलेट में कई सामान दोबारा से लगवाए गए हैं। शेष में काम जारी है। -संदीप माकिन, आयुक्त नगर निगम

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