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4 राज्यों की सड़कों पर चले पैदल, बच्चों-महिलाओं के पैरों में पड़े छाले, ग्वालियर में मिला बिस्तर

Gwalior News - लॉकडाउन ने मजदूर और गरीबों को रात-दिन सड़कों पर चलने को मजबूर कर दिया है। दिल्ली, गुरुग्राम और आसपास के शहरों में...

Mar 31, 2020, 07:05 AM IST

लॉकडाउन ने मजदूर और गरीबों को रात-दिन सड़कों पर चलने को मजबूर कर दिया है। दिल्ली, गुरुग्राम और आसपास के शहरों में काम करने गए मजदूर मजबूरी में घर को लौट रहे हैं। साधन नहीं मिलने से पैदल-पैदल महिला, बच्चों के साथ चले जत्थे चार राज्यों की सीमा को पार कर सोमवार को ग्वालियर की सीमा में आए। पैदल चलते-चलते युवकों के ही नहीं महिला और बच्चों के पैरों में छाले पड़ गए हैं। कुछ के तो पैरों से खून तक निकल आया। इन मजदूरों के लिए नगर निगम ने झांसी और मुरैना रोड हाइवे पर अस्थाई आश्रय स्थल बनाए हैं। इनमें रहने, खाने आदि की सुविधा की गई है। मालवा कॉलेज झांसी रोड, वेदांता इंस्टीट्यूट बरौआ मुरैना रोड और माउंट लिटेरा पब्लिक स्कूल निरावली के अस्थाई आश्रय में 1125 मजदूरों को अभी तक रोका गया है। इसके लिए तीन अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव, दिनेशचंद्र शर्मा और राजेश श्रीवास्तव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इन लोगों ने मौके पर पहुंचकर सारी व्यवस्थाएं बनाईं।

मजदूरों का पलायन पिछले छह दिनों से चल रहा है। 24 घंटे में ग्वालियर की सड़कों से 15 हजार से ज्यादा मजदूर टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना जिले के लिए निकल गया है। यह पलायन अभी-भी चल रहा है। ये लोग हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और राजस्थान की सीमा से होकर निकल रहे हैं। रास्ते में चारों राज्यों के प्रशासन ने मदद नहीं की। उलटे कई जगह तो डंडे तक बरसा दिए। दिन के वक्त माधव नगर से झांसी जा रहे 18 लोगों का कहना था कि बस स्टैंड गए थे। वहां से पुलिस वाले भगा रहे हैं।

न सेनिटाइजर न मास्क, 35 बसों से 2500 मजदूर गए

न सेनिटाइजर न मुंह पर मास्क। उनके चेहरे पर कोरोना वायरस का भी खौफ नहीं था। डर था तो केवल भूख से मरने का। दिल्ली में मजदूरी का काम करने वाले रामपाल का कहना था कि साहब काहे का मास्क। बस चिंता तो बच्चों की सता रही है, क्योंकि दिल्ली से 30 किमी पैदल चलने के बाद वह ट्रक से ग्वालियर पहुंचे थे। उनका कहना था कि कोरोना से तो बच जाएंगे लेकिन यदि वह दिल्ली छोड़कर नहीं आते तो भूख से जरूरत मर जाते। वह छतरपुर के रहने वाले हैं। सरकार के रोक के बाद भी बोरों की तरह 35 बसों में 2500 मजदूर टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, भिंड, मुरैना के लिए रवाना हुए।

कहां पर कितने मजदूर रोके

मालवा कॉलेज 800

वेंदाता इंस्टीट्यूट 150

माउंट लिटेरा स्कूल 175

ये सुविधा दी नगर निगम ने

नगर निगम द्वारा अस्थायी आश्रय स्थलों पर कमरों में गद्दे और फर्श डलवा दिए गए हैं। यहां पर पीने और नहाने के लिए पानी का बंदोबस्त किया गया है। खाने की व्यवस्था समाजसेवी संस्था कर रही हैं। सुबह और शाम के वक्त चाय दी जाएगी। साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए पुलिस और चौकीदार का इंतजाम किया गया है।

लाॅकडाउन के दौरान लोग पैदल ही घर जा रहे हैं। स्थान: रेसकोर्स रोड।

आश्रय स्थलों के कमरों को किया सेनिटाइज

नगर निगम ने सबसे पहले आश्रय स्थलों को सेनिटाइज किया है। इसके साथ ही एक-एक मजदूरों को भी सेनिटाइज्ड किया गया है। यहां पहुंचे निगम के अधिकारियों की टीम ने इसके बाद खाना खिलवाया। जो छोटे-छोटे बच्चे थे, उनके लिए दूध तक की व्यवस्था की गई है। तीन जगह डाक्टरों की टीमें भी पहुंची है। जो इनके स्वास्थ्य का परीक्षण करेंगी। अब ये लोग यहीं पर रहेंगे। आगे जो भी आएगा। उसे रोक लिया जाएगा।

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