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जहां फंसे थे दंपति, पड़ाेस की दीवार तोड़कर वहां तक पानी पहुंचातेे तो बच जाती जानें

एक वर्ष पहले
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मोची ओली में बुधवार रात एक तीन मंजिला मकान में लगी आग बुजुर्ग दंपति की चिता बन गई। आग बुझाने में बरती गई लापरवाही के कारण दाे जिंदगियां जिंदा जल गईं। आग लगने के 10 घंटे बाद गुरुवार सुबह 7 बजे मकान की दूसरी मंजिल पर प्रेमनारायण शिवहरे (65) और उनकी प|ी राजकुमारी (61) की जल चुकीं हडि्डयां बरामद हुईं। बेटे हरीश शिवहरे ने अधजली शर्ट से पिता और पायल से मां की पहचान की। माेची ओली के जिस मकान में आग लगी, उसमें फाेम का गाेदाम था। रात 9 बजे धुआं उठना शुरू हुआ और एक घंटे में ही आग ने तबाही मचा दी। सिर्फ 15 फीट चाैड़ी गली हाेने के कारण यहां न साढ़े चार कराेड़ से खरीदा गया हाइड्रोलिक जैक प्लेटफार्म पहुंच सका और न पानी का इंतजाम समय पर हो पाया। अफसर सड़क से 40 फीट ऊंची इमारत पर पानी फेंकते रहे। यदि बिना रुके पर्याप्त पानी फेंकने के साथ पड़ोस की दीवार तोड़ी जाती तो न सिर्फ आग बुझती बल्कि दोनों जिंदगियों को भी बचाया जा सकता है।

लापरवाही बतातीं दो तस्वीरें...

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4 लापरवाही...कटर तक नहीं था, हथाेड़े से शटर ताेड़ने में 45 मिनट बर्बाद हो गए, तब तक जिंदगियां खाक


1. जिस मकान में आग लगी, उसके ग्राउंड फ्लोर पर स्थित गोदाम में शटर लगा था। इसमें फोम भरा था। यहीं से आग लगी। दमकल अमले के पास शटर के अंदर पानी डालने की जगह नहीं थी, क्योंकि शटर अंदर से बंद था। इसे काटने के लिए कटर नहीं था। शटर को हथोड़े से 45 मिनट में ताेड़ा। अगर तुरंत शटर कटता और आग पर पानी डाला जाता तो दो जिंदगियां बच जातीं।

2.गली की चौड़ाई 15 फीट है। इसके अंदर निगम का हाइड्रोलिक जैक प्लेटफाॅर्म नहीं पहुंच पाया। दमकल अमले ने इसे अंदर भेजने की कोशिश भी नहीं की। सीढ़ी लगाकर सीधे दूसरी और तीसरी मंजिल पर पानी नहीं फेंका गया। नीचे से ही दमकल कर्मी पानी फेंकते रहे।

3.डेढ़ घंटे बाद दमकलकर्मी पड़ोसी के मकान की छत पर चढ़ा। दूसरे मंजिल की दीवार जब तक तोड़ी, तब तक आग धधक चुकी थी।

4.जिस दमकल वाहन से आग बुझाई जा रही थी, वही पानी भरने के लिए ले जा रही थी। इस कारण जितनी देर में दमकल आग बुझाती और फिर पानी भरती, उतनी देर में आग फिर से भड़क जाती थी। दमकल वाहन के पाइप में भी लीकेज थे।

एक्सपर्ट व्यू


लगातार पानी फेंकते तो नहीं भड़कती आग


-देवेंद्र शर्मा, रिटा.फायर ऑफिसर

मोची ओली हादसा

मकान, जिसमें दंपति फंसे थे

सरकारी इंतजामों की खामियों की वजह से खाक हुए दंपति

प्रेमनारायण

राजकुमारी

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पहले फोटो में वह इमारत, जिसमें आग लगी और बुजुर्ग दंपति फंसे, लेकिन पड़ोस की दीवार नहीं तोड़ी। दूसरे फोटो में ग्राउंड फ्लोर पर गोदाम का शटर तोड़ने के लिए कटर की जगह हथौड़े और बल्ली का उपयोग करता अमला। (घेरे में)

दर्दनाक...बच्चाें काे सीढ़ियाें से फेंका मैं और प|ी कूदे, पापा की छड़ी फंस गई और मम्मी पलंग पर ही लेटी रह गईं

रात 9 बजे मैं परिवार के साथ तीसरी मंजिल पर था। अचानक घर की बिजली चली गई। अंधेरा हो गया और तेज धुंआ ऊपर आने लगा। इससे हमारा दम घुटने लगा। हम दूसरी मंजिल की तरफ गए तो यहां सिर्फ धुंआ ही धुंआ था। हम खिड़की की तरफ भागे। मैंने बच्चों को खिड़की से नीचे फेंका, जिन्हें पड़ोसियों ने पकड़ लिया। प|ी के साथ मैं भी कूदा। भाई, बहन छत पर चढ़ गए और पड़ोसी की छत से कूदकर आग से बचने के लिए भागे। पापा की छड़ी सीढ़ी में फंस गई, वो चल भी नही पाते थे, मेरे सामने ही आग में फंसे रह गए। मम्मी भी पलंग पर ही लेटी रह गईं। वह मानसिक रूप से बीमार थीं। मैं आखिर में उनका चेहरा तक नहीं देख पाया।

-हरीश शिवहरे, मृत दंपति के बेटे
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