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बिना मीटर के भी बिजली का बिल आ जाता है, टेंपो कहीं भी खड़ा हो जाता है

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर। होली का पर्व आज है। होली पर चारों ओर रंग की फुहार के साथ माहौल गुलाल से सराबोर रहता है। यह रंग तब ओर चढ़ जाता है, जब इसमें हास्य व्यंग्य हो। होली के ऐसे ही बदलाव, सोशल साइट्स से रिश्तों में कम होती मिठास और शहर की व्यवस्थाओं पर साहित्यकारों ने सिटी भास्कर के लिए कलम चलाई। पेश है होली पर यह खास रिपोर्ट...


शहर की सड़क और जाम

होली खेलन हम गए लेकर हाथ गुलाल, पर गड्डों ने सड़क का हाल किया बेहाल। हाल हुआ बेहाल अजब कोहराम देखकर, फूलबाग से हाईकोर्ट तक जाम देखकर। हाय व्यवस्था हम सब तेरे डसे हुए हैं, बाड़े पर भी लोग जाम में फंसे हुए हैं।

-रवीन्द्र रवि

स्वर्णरेखा की निर्मल धारा फिर...

नदिया का यह रूप सलोना विकृत हो गया नाले में, स्वर्णरेखा की निर्मल धारा फिर सबकी प्यास बुझा पाए।

एक नई पहचान शहर को एजुकेशन हब के रूप में है, प्रतिस्पर्धा में हारे बिना सब अपनी मंजिल को पा जाए।

-सुनीता पाठक

परिवार में बढ़ती दूरियां

हम एक कमरे में बैठे हैं, पर एक कमरे में हैं नहीं।

क्योंकि हम मोबाइल में खोए हैं, वाट्सएप पर बातें कर रहे हैं।

हम अपनों को छोड़कर, अपने ढूंढ रहे हैं फेसबुक पर। पिता बैठा है वॉट्सएप पर और बेटा बैठा है फेसबुक पर।

-कमलेश कटारिया \\\"कमल\\\'

घर की गुजिया अब हुई बाजार...

होली कितनी बदल गई, घर की गुजिया अब हुई बाजार की।

इसमें स्वाद तो है लेकिन प्यार कहां। गाेबर से कौन हाथ बिगाड़े, बाजार की रेडीमेड गुलरिया हैं यहां। मेल मिलाप कम हुआ, क्योंकि जिओ का इंटरनेट है यहां।

-हेमंत कुमार शुक्ल विजय

चोरी का उत्पाद बिकता है मेरे शहर...

फालतू का हंगामा दिखता है, मेरे शहर में। चोरी का भी उत्पाद बिकता है, मेरे शहर में। बिना मीटर के भी बिजली का बिल भी आ जाता है, टेंपो-ऑटो कहीं भी खड़ा हुआ पाया जाता है। शिक्षक गैर हाजिरी के मजे ले रहे हैं ग्वालियर में।
-प्रमोद मुरली


स्वच्छता अभियान

आओ पर्यावरण को बचाएं, अपना शहर स्वच्छ बनाएं।

जल ही जीवन है, जीवन संभालें, जल की हर बूंद अमृत सी जानें। व्यर्थ ही में इसे न बहाएं, अपना शहर स्वच्छ बनाएं। हो कचरे का समुचित प्रबंधन, स्वच्छ हो द्वार, देहरी, घर-आंगन।

-प्रतिभा द्विवेदी
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