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इस साल से नहीं आएगी पीले पानी की समस्या

एक वर्ष पहले
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फैक्ट फाइल

इस साल मई-जून की भीषण गर्मी में तिघरा से शहर की दस लाख की आबादी को साफ पानी मिलेगा। जैसे ही तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक होगा नगर निगम तिघरा से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जगह मोतीझील रिजरवायर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की सप्लाई करेगा। मोतीझील पर इसके लिए चार-चार हजार लीटर क्षमता के दो नए टैंक बनकर तैयार हैं। इनमें फिटकरी (एलम), चूना व क्लोरीन का घोल रहेगा, जो फिल्टर प्लांट में पानी में छोड़ा जाएगा। इससे पानी की बदबू व पीलापन खत्म हो जाएगा। यह व्यवस्था हर साल केवल गर्मियों में दो से तीन माह के लिए की गई है।

रिजरवायर से मिलेगा पानी

नगर निगम अप्रैल-मई से शहर में पानी की सप्लाई व्यवस्था में परिवर्तन करने जा रहा है। अभी तक पानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सीधे टंकियों में आता था, फिर सप्लाई किया जाता था। नई व्यवस्था के तहत गर्मियों में अब पानी पहले मोतीझील रिजरवायर तक लाया जाएगा फिर यहां से स्पेशल टैंक के जरिए इसका पीलापन व बदबू दूर की जाएगी। पानी में आॅक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए रिजरवायर में 24 एरिएटर लगाए जाएंगे।

टैंक में रहेगा आठ घंटे का घोल

फिल्टर प्लांट पर बने दो टैंकों का उपयोग इस काम के लिए किया जाएगा। इस टैंकों में एलम, चूना और क्लोरीन का निश्चित मात्रा में घोल बनाकर डाला जाएगा। एक टैंक में लगभग आठ घंटे का घोल रहेगा। जिससे लगातार फिल्टर प्लांट में यह घोल मिलता रहेगा।

पीले पानी की शिकायत नहीं आएगी

पिछले साल शहर के कुछ इलाकों से पीले पानी की शिकायत आई थी। जिसको दूर करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन इस बार हम पहले से ही इसकी तैयारी करके चल रहे हैं। इसके लिए दो टैंकों में पूरा घोल रहेगा यह अपने आप पानी में मिलता रहेगा। इसके पानी साफ होता रहेगा।
संदीप माकिन, नगर निगम आयुक्त

एरिएटर की संख्या बढ़ाएंगे

गर्मी के दौरान पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती थी। जिससे कि हर बार दिक्कत आती थी। इसके लिए इस बार प्लान किया है कि तापमान बढ़ते ही हम पूरा पानी मोतीझील लाएंगे वहीं से सप्लाई करेंगे। साथ ही वहां पर 25 से अधिक अरिएटर लगाएंगे। इससे ऑक्सीजन की कमी नहीं आएगी।
आरएलएस मोर्य, अधीक्षण यंत्री पीएचई नगर निगम

सांकेतिक

} 15 लाख लोगों को तिघरा डैम और बोरिंग से की जाती है पानी की सप्लाई

} 20.25 करोड़ लीटर पानी की प्रतिदिन होती है सप्लाई

} 2195 ट्यूबवैल हैं शहर के विभिन्न क्षेत्रों में

} 100 से अिधक हैंडपंप भी पानी की जरूरत को पूरा करते हैं

} हर साल पांच करोड़ रुपए खर्च होते हैं शहर में पानी सप्लाई के लिए

} कुल पानी का 30 प्रतिशत लीकेज व वाष्पीकरण में हो जाता है बर्बाद

आॅक्सीजन कम होने से आती है दुर्गंध

तापमान बढ़ने के दौरान पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इस कारण उसमें बदबू आने और काई जमने की शिकायत अधिक हो जाती है। लेकिन इस बार यह शिकायत नहीं आए इसके लिए पहले से ही इंतजाम किया जा रहा है। मोतीझील के रिजरवायर पर 25 से अधिक एरियटर लगाए जाएंगे, जिससे आॅक्सीजन की कमी नहीं रहेगी। तीनों प्लांट का पानी मोतीझील लाया जाएगा। यहीं से पूरे शहर का पानी यहीं से सप्लाई किया जाएगा। जिससे कि शहर के किसी क्षेत्र में पानी में आने वाली गंध नहीं आएगी।
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