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40 करोड़ से संवारी जाएगी स्वर्ण रेखा नीदरलैंड से मिलेगा तकनीकी सहयोग

नीदरलैंड के प्रतिनिधि लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से हनुमान बांध तक करेंगे सर्वे

Dainik Bhaskar

Sep 08, 2018, 11:40 AM IST
new project for swarn rekha river in gwalior

ग्वालियर। 40.43 करोड़ रुपए खर्च कर स्वर्ण रेखा का स्वरूप निखारा जाएगा। इस काम में नीदरलैंड से तकनीकी सहयोग मिलेगा। इसके तहत हनुमान बांध से कमानी पुल तक 6 किलोमीटर क्षेत्र में स्वर्ण रेखा की तली में बिछी सीवर लाइन के पानी का ट्रीटमेंट कर उपयोगी बनाया जाएगा। आस-पास लैंडस्केपिंग के साथ पार्क विकसित किए जाएंगे।

शुक्रवार को नीदरलैंड इंटीरियर मंत्रालय के प्रतिनिधि डेनियल लिप्सचिप, दो भारतीय सदस्यों के साथ ग्वालियर आए। स्मार्ट सिटी की टीम ने उन्हें स्वर्ण रेखा नदी के विकास की प्लानिंग को प्रजेंटेशन कर बताया। उन्होंने प्रोजेक्ट पर काम करने की सहमति दे दी है। शनिवार को टीम लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से हनुमान बांध तक का सर्वे करेगी। क्षेत्र चयन के बाद पहले डेढ़ किलोमीटर के हिस्से में विकास कार्यों पर होने वाला खर्च नीदरलैंड की सरकार वहन करेगी। 2006 में 60 करोड़ रुपए खर्च कर स्वर्णरेखा को पक्का कराया गया था।

4 सवालों के जरिएवह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं।

1. नीदरलैंड की टीम क्यों आई?
- भारत और नीदरलैंड के प्रधानमंत्रियों के बीच मई में हुई वार्ता के बाद स्मार्ट सिटी में काम करने के लिए नीदरलैंड सरकार इच्छुक थी।
2. किसके बुलावे पर ग्वालियर आया दल?
- स्मार्ट सिटी की टीम ने दिल्ली में नीदरलैंड से आए प्रतिनिधि मंडल को स्वर्ण रेखा प्रोजेक्ट के बारे में बताया था। इसके बाद स्मार्ट सिटी के अफसरों ने पत्राचार कर टीम को आमंत्रण दिया।
3. नीदरलैंड की क्या भूमिका होगी?
- नीदरलैंड के पास सीवर, वाटर ट्रीटमेंट व सौर ऊर्जा की बेहतर तकनीक है। इसलिए स्वर्ण रेखा के सीवर युक्त पानी को साफ करने और उसके उपयोग पर काम करेगी।
4. जो काम होगा, उसका खर्च कौन उठाएगा?
- पहले डेढ़ किलोमीटर के काम पर नीदरलैंड ही खर्च उठाया। आगे का काम स्मार्ट सिटी टेंडर कंपनियों को देगी और भुगतान करेगी।

यह काम किए जाएंगे


- स्वर्ण रेखा को रिवर फ्रंट डवलपमेंट योजना के तहत विकसित किया जाएगा।
- नीदरलैंड सरकार से एमओयू के बाद उनकी टीम की देखरेख में नदी के दोनों किनारों पर लैंडस्केपिंग व बगीचे विकसित कर स्मार्ट लाईट लगाई जाएंगी।
- तली में बिछी सीवर लाइन के पानी को विशेष तकनीकी से साफ कर उपयोगी बनाया जाएगा। साफ पानी को इसके डेढ़ किमी के हिस्से में भरा जाएगा।
- सीवर के पानी के ट्रीटमेंट के साथ गैस भी बनाई जाएगी। किनारों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बनाएंगे।

सफलता मिली तो पूरी नदी पर काम


- यदि नीदरलैंड की मदद से काम अच्छा हुआ तो पहले चरण में हनुमान बांध से रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल व दूसरे चरण में समाधि स्थल से उपनगर ग्वालियर तक काम होगा।

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