पेड़ की अभिलाषा / मुझे तुमसे मिट्टी, पानी, खाद, देखभाल कुछ नहीं चाहिए, बस आजादी दो और मैं पत्थरों में भी अपनी जड़े जमाए रखूंगा



वटवृक्ष को फलने-फूलने की आजादी मिल गई और देखते ही देखते यह प्रकृति की एक अनुपम कृति की तरह बन गया।  वटवृक्ष को फलने-फूलने की आजादी मिल गई और देखते ही देखते यह प्रकृति की एक अनुपम कृति की तरह बन गया। 
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वटवृक्ष को फलने-फूलने की आजादी मिल गई और देखते ही देखते यह प्रकृति की एक अनुपम कृति की तरह बन गया। वटवृक्ष को फलने-फूलने की आजादी मिल गई और देखते ही देखते यह प्रकृति की एक अनुपम कृति की तरह बन गया। 

  • बजरंगगढ़ किले के एक बुर्ज पर पहरेदार की तरह डटा यह वटवृक्ष शायद यही संदेश दे रहा है

Dainik Bhaskar

Jul 31, 2019, 04:33 PM IST

गुना. बजरंगगढ़ किले के एक बुर्ज पर पहरेदार की तरह डटा यह वटवृक्ष शायद यही संदेश दे रहा है। इसे किसी पौधरोपण मुहिम के तहत नहीं लगाया गया होगा। इसका कोई बीज कहीं से उड़कर आया और अंकुरित होकर धीरे-धीरे विशाल आकार लेता रहा। न तो किसी ने इसके लिए मिट्टी का इंतजाम किया होगा, न ही पानी डाला होगा। बस इसे फलने-फूलने की आजादी मिल गई और देखते ही देखते यह प्रकृति की एक अनुपम कृति की तरह बन गया। 


एक पूरा जंगल इसी सिद्धांत पर विकसित किया 
कहा जाता है जंगल बनाए नहीं जाते, यह स्वत: विकसित होते हैं। बस इसमें इंसानी दखल को रोक दिया जाए। गुना से पाटई के बीच वन विभाग ने करीब 15-16 साल पहले अपनी जमीन पर ऐसा ही किया था। उन्होंने इस जमीन को सिर्फ चारों ओर से सुरक्षित कर दिया। आज यह हिस्सा घने वन क्षेत्र में तब्दील हो गया है। 

 

जीर्णोद्धार के दौरान वटवृक्ष को भी मूल ढांचे का हिस्सा मानकर छोड़ दिया गया 
विगत 3-4 साल के दौरान इस किले के जीर्णोद्धार का काम पुरातत्व विभाग की देखरेख में चल रहा है। विभाग के अधिकारियों ने वट वृक्ष को छेड़े बिना ही बुर्ज का जीर्णोद्धार किया। हालांकि कुछ को लगता है कि इससे आगे चलकर मूल ढांचे को नुकसान होगा। इस खतरे के बावजूद इसमें दखल नहीं दिया। 

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