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गड़बड़झाला / 13 राज्यों के 3000 क्रिकेटरों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1.77 करोड़ रुपए वसूले, खेलने का मौका सिर्फ 198 को मिलेगा

अंडर-18 नेशनल स्कूल क्रिकेट लीग 9 दिसंबर से ग्वालियर में...

बीसीसीआई के जीएम सबा करीम ने कहा कि इस लीग का बोर्ड से कोई संबंध नहीं है। बीसीसीआई के जीएम सबा करीम ने कहा कि इस लीग का बोर्ड से कोई संबंध नहीं है।
भोपाल की टीम भी इस लीग को खेलने गई है। भोपाल की टीम भी इस लीग को खेलने गई है।
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बीसीसीआई के जीएम सबा करीम ने कहा कि इस लीग का बोर्ड से कोई संबंध नहीं है।बीसीसीआई के जीएम सबा करीम ने कहा कि इस लीग का बोर्ड से कोई संबंध नहीं है।
भोपाल की टीम भी इस लीग को खेलने गई है।भोपाल की टीम भी इस लीग को खेलने गई है।

  • आयोजकों ने टूर्नामेंट को बीसीसीआई का बताकर हर बच्चे से 5900 रु. लिए 
  • बीसीसीआई के जीएम सबा करीम बोले- इस टूर्नामेंट का बोर्ड से कोई संबंध नहीं 

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 10:54 AM IST

विशाल सिंह भदौरिया। ग्वालियर. मप्र के ग्वालियर में रविवार से अंडर-18 नेशनल स्कूल क्रिकेट लीग शुरू हो रही है। इसे स्कूल गेम्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसजीएफआई) और आईजेपीएल स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी करा रही है। लीग में मप्र, छग, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली सहित 13 राज्यों के 3 हजार खिलाड़ियों के रजिस्ट्रेशन हुए। आयोजकों ने लीग को बीसीसीआई का बताकर प्रति खिलाड़ी 5900 रु. रजिस्ट्रेशन के नाम पर लिए। यानी 1.77 करोड़ से ज्यादा वसूले गए। इस टी20 लीग के लिए 192 खिलाड़ियों का चयन हुआ। ये खिलाड़ी 12 टीमों में खेलेंगे। मतलब बाकी 2808 खिलाड़ियों की राशि आयोजक हजम कर लेंगे। इस बीच, बीसीसीआई ने कहा है कि लीग का बोर्ड से संबंध नहीं है। जब भास्कर ने इसके आयोजन की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। 

 

एसजीएफआई के उपाध्यक्ष को भी लिखित में आयोजन की जानकारी नहीं है 
एसजीएफआई के उपाध्यक्ष आलोक खरे को इस आयोजन के बारे में कोई लिखित जानकारी नहीं है। एसजीएफआई के सचिव राजेश मिश्रा ने कहा, "हमने आलोक खरे को मौखिक रूप से सब बताया है।' एसजीएफआई के आयोजन के बारे में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को भी बताया जाता है। लेकिन मप्र लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक (खेल) एसके परसाई ने कहा, "मुझे इस लीग को लेकर अभी तक कुछ पता नहीं है।' 

 

अगर, यह टूर्नामेंट बोर्ड का होता तो स्टेडियम का किराया नहीं देना पड़ता 
लीग के बारे में मप्र क्रिकेट एसोसिएशन, ग्वालियर एसोसिएशन भी अनभिज्ञ है। उधर, आयोजकों ने 10 हजार रु. रोज के किराए पर कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम लिया है। अगर, यह टूर्नामेंट बोर्ड का होता तो किराए की नौबत ही नहीं आती, क्योंकि स्टेडियम एसोसिएशन का है। मप्र क्रिकेट एकेडमी के पूर्व चीफ कोच मदनलाल ने कहा, "ऐसे आयोजन का मतलब नहीं है, जो बीसीसीआई से रजिस्टर्ड नहीं है।' 

 

एसजीएफआई सचिव राजेश मिश्रा का भाई है लीग का सीईओ 
इस लीग के सीईओ प्रदीप मिश्रा हैं। प्रदीप मिश्रा एसजीएफआई के संयुक्त सचिव हैं। ये एसजीएफआई के सचिव राजेश मिश्रा के छोटे भाई हैं। राजेश ने ही लीग को प्राइवेट कंपनी से कराने की छूट दी है। वहीं, सीईओ प्रदीप मिश्रा ने कहा, "बीसीसीआई ऑफ रोल हमारी हेल्प कर रही है। यहां से चयनित टीम को एशियन टूर्नामेंट और वर्ल्ड स्कूल गेम्स में खेलने भेजेंगे। लीग के लिए लगभग 3 हजार बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराए। अगले साल से लीग हम खुद ही कराएंगे।' 

 

इसे बीसीसीआई का टूर्नामेंट बताना गलत 
इस लीग से बीसीसीआई का संबंध नहीं है। एसजीएफआई सरकारी बॉडी है। वह आयु वर्ग के हिसाब से स्कूल लेवल के टूर्नामेंट कराती है। इसे बीसीसीआई का टूर्नामेंट बताना गलत है। -सबा करीम, जीएम बीसीसीआई 

 

"लीग में एसजीएफआई के नेशनल क्रिकेटरों का चयन ही नहीं हुआ  मैं एसजीएफआई के नेशनल टूर्नामेंट में खेलूंगा। फिर भी लीग के लिए नहीं चुना गया। मैंने भी 5900 रु. जमा किए थे। टीम में सलेक्शन के क्या मानक थे? यह समझ नहीं आया।" -अंकित राजपूत, नेशनल क्रिकेटर, एसजीएफआई 

 

"भोपाल में ट्रायल में हम लोगों से कहा था कि बीसीसीआई का सपोर्ट है। मुझे टीम में जगह नहीं मिली। जबकि तीन बार एसजीएफआई के नेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट में जगह बना चुका हूं।" -आकाश लोधी, नेशनल क्रिकेटर, एसजीएफआई

 

यह बीसीसीआई का आयोजन नहीं 
 

इस लीग से बीसीसीआई का संबंध नहीं है। एसजीएफआई सरकारी बॉडी है। वह आयु वर्ग के हिसाब से स्कूल लेवल के टूर्नामेंट कराती है। इसे बीसीसीआई का टूर्नामेंट बताना गलत है।

-सबा करीम, जीएम बीसीसीआई 

 

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