ग्वालियर / स्वाइन फ्लू से मरने वाले 8 मरीजों में 5 महिलाएं, पाॅजिटिव भी 50% से ज्यादा

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 01:14 PM IST


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ग्वालियर। स्वाइन फ्लू पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। ग्वालियर सहित अंचल में अभी तक स्वाइन फ्लू से 8 मरीजों की मौत हुई है। इनमें से 5 महिलाएं हैं। वहीं ग्वालियर में 24 और पड़ौसी जिलों में 3 मरीज स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए गए हैं।


इनमें से 13 महिलाएं और 14 पुरुष हैं। जीआरएमसी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय पाल सिंह का कहना है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कम होती हैं। वह डॉक्टर को दिखाने तब पहुंचती हैं, जब तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है। इसी कारण महिलाओं में खून की कमी बनी रहती है, जिससे स्वाइन फ्लू या अन्य वायरस और इंफेक्शन की संभावना अधिक रहती है। वहीं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संजय धवले का कहना है कि महिला यदि गर्भवती है या फिर उसे डायबिटीज, किडनी या लिवर की परेशानी है या उम्र 60 वर्ष से अधिक है तो उन्हें स्वाइन फ्लू जानलेवा हो सकता है। 


बीमार महिला को जेएएच से डॉक्टरों ने लौटाया: गोल पहाड़िया स्थित जयश्रीराम कॉलोनी निवासी महेंद्र कुशवाह की पत्नी रजनी कुशवाह की 9 मार्च को स्वाइन फ्लू के कारण मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम बुधवार को रजनी के घर गई लेकिन टैमीफ्लू की दवा दिए बिना लौट आई। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर अनुराग चौधरी ने सीएमएचओ से इस मामले में नाराजगी जताई जिसके बाद पुन: टीम महेंद्र कुशवाह के घर गई और टैमीफ्लू की दवा देकर आई। 

 

महेंद्र कुशवाह ने बताया कि उनके छोटे भाई की पत्नी गर्भवती है और उसे भी वही परेशानी है जो रजनी कुशवाह को थी। जब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम ने देखने के बाद उन्हें छोटे भाई की पत्नी को जेएएच ले जाने के लिए कहा था। जब वह जेएएच लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर केआरएच भेज दिया कि वहीं दिखाओ। जब वह केअारएच पहुंचे तो डॉक्टरों ने जेएएच के स्वाइन फ्लू वार्ड लौटा दिया लेकिन भर्ती नहीं किया। इस मामले की शिकायत उन्होंने कलेक्टर से भी की है। सीएमएचओ को कई फोन लगाएं तब जाकर एक बार उनसे बात हुई अौर उन्होंने कह दिया कि शुक्रवार को सुबह जिला अस्पताल ले आना। 


मौत के कारणों की जांच नहीं करा रहे अफसर : जिले स्वाइन फ्लू से 1 फरवरी से अब तक 7 मरीजों की मौत हो चुकी है। इन मरीजों के कारणों की जांच कराने के मामले में सीएमएचआे डॉ. मृदुल सक्सेना गंभीर नहीं है। इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उनसे पूछा जाता है कि स्वाइन फ्लू से मरने वालों की मौत के कारणों की जांच क्यों नहीं हो रही है तो उनका एक ही जवाब होता है कि अभी दस्तावेज उन्हें मिले नहीं हैं। अगर परिजन मौत के कारणों की जांच कराना चाहते हैं तो दस्तावेज उन्हें उपलब्ध करा दें। ध्यान देने योग्य बात यह है कि 15 सितंबर को जगदीश प्रसाद गोयल की स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। श्री गोयल के पुत्र माेंटी गोयल का कहना है कि सीएमएचओ जांच कराने के लिए गंभीर नहीं हैं। मैं अपने पिता की मौत के कारणों की जांच कराना चाहता हूं और दस्तावेज भी देने तैयार हूं। यह बात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी कह चुका हूं लेकिन न तो जांच की और न ही मुझसे कागजात मांगे। सीएमएचओ को कलेक्टर ने नोटिस जारी किया है। 

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