भास्कर स्टिंग / आठ रु. लीटर में बन रहा सिंथेटिक दूध, 40-50 रुपए लीटर बेच रहे



ग्वालियर-भिंड सीमा पर स्थित मालनपुर के घिरौंगी गांव में सिंथेटिक दूध बनाता युवक। ग्वालियर-भिंड सीमा पर स्थित मालनपुर के घिरौंगी गांव में सिंथेटिक दूध बनाता युवक।
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ग्वालियर-भिंड सीमा पर स्थित मालनपुर के घिरौंगी गांव में सिंथेटिक दूध बनाता युवक।ग्वालियर-भिंड सीमा पर स्थित मालनपुर के घिरौंगी गांव में सिंथेटिक दूध बनाता युवक।

  • लगातार कार्रवाई के बाद भी नहीं रुका मिलावट का कारोबार
  • कैमरे के सामने युवक ने बताया कैसे बनता है मिलावटी दूध 

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 02:15 AM IST

ग्वालियर. मिलावट के खिलाफ जुलाई से शुरू हुई कार्रवाई के बाद भी  सिंथेटिक दूध का कारोबार चल रहा है। यह दूध डेयरियों तथा डोर-टू-डोर डिलेवरी में सप्लाई हो रहा है। सिर्फ 8 से 10 रुपए के खर्च में एक लीटर दूध तैयार हो जाता है और लोगों को ये दूध शुद्ध बताकर 40 से 50 रुपए लीटर बेचा जा रहा है। इस दूध में केमिकल, यूरिया, स्टार्च आदि घातक चीजों की मिलावट होती है मिलावट पर चल रही कार्रवाई के बीच दैनिक भास्कर ने मालनपुर के घिरौंगी, बरेठा में सिंथेटिक दूध तैयार करने वाले एक व्यक्ति से ऐसा दूध तैयार कराकर देखा। उसने अपना नाम, पहचान छिपाने की शर्त पर ऐसा किया और 1 घंटे में 200 लीटर का ड्रम भरकर दूध भी तैयार करके दिखा दिया।
खुली डेयरी और घर-घर पहुंचता है ये दूध

 

सिंथेटिक दूध को खपाने का जरिया इन दिनों शहरी क्षेत्र में खुली डेयरियां और घर-घर दूध पहुंचाने वाले दूधिए हैं। डेयरियों पर ये दूध 40 से 50 रुपए लीटर और घर पहुंचाने पर 50 से 52 रुपए लीटर ये दूध बिक रहा है। प्रशासन ने अब तक मिल्क प्लांट और चिलर टैंक पर कार्रवाई की है। डेयरियों व ऐसे दूधियों की सप्लाई पर कार्रवाई नहीं हुई। इसका फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं। 
 

डिटर्जेंट, तेल व यूरिया से 60 मिनट में तैयार कर दिया 200 लीटर नकली दूध

दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने दूध कारोबारियों से उन जगहों का पता लगाया, जहां सिंथेटिक दूध तैयार होता है। उसमें मुरैना, भिंड की बहुत सी जगह के नाम सामने आए। सबसे नजदीक जगह मालनपुर इंडस्ट्रियल एरिया के पास पता चली। यहां घिरौंगी-बरेठा में भी सिंथेटिक दूध तैयार होकर सप्लाई किया जाता है। रिपोर्टर को क्षेत्र के एक रहवासी की मदद लेनी पड़ी और उसने ऐसा दूध तैयार करने वाले एक युवक से मुलाकात कराई। पहले वह मना करता रहा, काफी देर बाद जब उसे भरोसा हो गया तो उसने शर्त रखी कि मेरा नाम-पहचान नहीं खुले। फिर उसने बरेठा के एक मकान में ले जाकर सिंथेटिक दूध बनाना शुरू किया। उसने पहले थोड़ा सी मात्रा में सही दूध लिया। जिसमें झाग और मात्रा बढ़ाने के लिए लिक्विड वॉशिंग डिटर्जेंट डालकर मिलाया। उसने इसे काफी देर फैंटने के बाद उपयोग किया हुआ रिफाइंड तेल मिलाया और फिर उसे फेंटना शुरू किया।

 

ये प्रकिया उसने उनमें दूध जितनी चिकनाहट लाने के लिए की। 15 किलो रिफाइंड से 100 लीटर दूध तैयार होता है। फिर उसने दूध जैसे कलर के लिए उसमे यूरिया मिलाया। युवक ने बताया कि 10 लीटर दूध के लिए 600 से 700 ग्राम यूरिया मिलाया जाता है साथ ही स्टार्च या आटा और अमोनिया मिलाकर इसे करीब आधा घंटे तक रखा रहने दिया। उसके बाद दोबारा उसे घोंटना शुरू किया। ताकि तेल और डिटर्जेंट को दूध में अच्छी तरह मिलाया जा सके। अंत में जरूरत के हिसाब से पानी और हल्का मीठा करने के लिए सेक्रीन मिलाई।  ऐसे 50 से 60 मिनट में 200 लीटर दूध तैयार कर लिया गया।
 

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