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मंडी में 25 साल बाद भी शुरू नहीं हुई खरीदी 100 से अधिक गांवों के किसान परेशान

भास्कर संवाददाता | हंडिया/रहटगांव तहसील मुख्यालय पर किसानों की सुविधा के लिए उप मंडी शुरू की थी, लेकिन कुछ समय...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:00 AM IST
भास्कर संवाददाता | हंडिया/रहटगांव

तहसील मुख्यालय पर किसानों की सुविधा के लिए उप मंडी शुरू की थी, लेकिन कुछ समय बाद ही मंडी में खरीदी बंद हो गई। तब से अब तक करीब 25 साल हो गए हैं, लेकिन फिर से मंडी में खरीदी शुरू नहीं हो पाई। इसे देखते हुए किसानों ने रबी सीजन में मंडी में खरीदी शुरू करने की मांग की।

किसानों की सुविधा के लिए 14 मार्च 1992 को तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे ने उप मंडी की शुरुआत की, लेकिन वर्तमान समय में मंडी में खरीदी नहीं हो रही है। मंडी में टीन शेड और माल गोदाम का निर्माण भी किया। इसकी सुरक्षा के लिए मंडी में दो कर्मचारी भी पदस्थ है। किसान अवंतिका प्रसाद का कहना है कि कुछ समय तक खरीदी करने के बाद से अब बंद है। करीब 25 साल से हंडिया मंडी वीरान पड़ी है। खरीदी नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को गेहूं बेचने के लिए भाड़ा लगाकर हरदा और खातेगांव जाना पड़ रहा है।

रहटगांव। मंडी में नहीं है बाउंड्रीवॉल।

रहटगांव में 31.35 लाख में बनेगी बाउंड्रीवॉल

रहटगांव उप मंडी में बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जाएगा। बाउंड्रीवॉल 31 लाख 35 हजार की लागत से बनेगी। इससे अनाज की सुरक्षा रहेगी। मंडी सदस्य माखन पटेल ने बताया मंडी प्रांगण में बाउंड्रीवॉल के टैंडर की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। अब तक बाउंड्रीवॉल के अभाव में मवेशी अनाज में मुंह मारते रहते थे। वहीं मंडी में घूमने से जहां-तहां गंदगी फैली रहती थी। शाम होते ही असामाजिक तत्व भी डेरा डाल देते थे। सुविधाओं के बढ़ने से किसानों को आसानी होगी।

100 गांव के किसान हो रहे परेशान

हंडिया में कृषि उप मंडी में अनाज खरीदी शुरू नहीं होने से परेशान किसानों ने जल्द से जल्द मंडी शुरू करने की मांग की। मंडी में खरीदी शुरू नहीं होने से क्षेत्र के 100 गांवों के किसानों की परेशानी बनी हुई है। हरदा मंडी में भीड़ अधिक होने पर उन्हें खातेगांव और कन्नौद मंडी भी लेकर जाना पड़ता है। किसानों ने सुविधा के लिए जल्द से जल्द मंडी शुरू करने की मांग की।

50 किमी दूर जाते हैं किसान

किसान महेंद्र दरबार का कहना है कि हंडिया उपमंडी शुरू नहीं होने से कांकडदा, साल्याखेड़ी, चीराखान, नयापुरा, जोगा के किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी आ रही है। उन्हें हरदा मंडी में उपज बेचने के लिए 50 किमी का सफर करना पड़ रहा है। कृषि उप मंडी देखरेख के अभाव में टीन शेड जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं। एक ट्रॉली माल बेचने में किसानों को दो से तीन दिन का समय लगता है। इससे ट्रैक्टर और मेटाडोर का भाड़ा अधिक लगता है। मंडी शुरू हो जाती है तो किसानों की परेशानी हल हो जाएगी।

अधिकारियों को समस्या को लेकर पत्र लिखेंगे