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नया सत्र शुरू, फिर भी 40 से अधिक स्कूल बसों में नहीं लग पाए कैमरे

स्कूलों में सोमवार से नया सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन बसों व वैन में कैमरे, स्पीड गवर्नर, जीपीएस सिस्टम लगाने का 50...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:20 AM IST

नया सत्र शुरू, फिर भी 40 से अधिक स्कूल बसों में नहीं लग पाए कैमरे
स्कूलों में सोमवार से नया सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन बसों व वैन में कैमरे, स्पीड गवर्नर, जीपीएस सिस्टम लगाने का 50 फीसदी काम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में सोमवार से एक बार फिर नियमों की अनदेखी कर ये बसें व वैन सड़कों पर बच्चों को लाते ले जाते हुए दिखाई देंगी। जिले के निजी स्कूलों में 80 बसें व वैन लगी हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद भी निजी स्कूल संचालकों ने आरटीओ व डीईओ को यह जानकारी नहीं दी कि उनके यहां कितने बच्चे किन-किन साधनों से राेज आते-जाते हैं।

महिला पर्यवेक्षक नियुक्त करें

बसों में छात्राओं की देखरेख के लिए एक महिला पर्यवेक्षक भी नियुक्त करना अनिवार्य किया है। जिससे स्कूल व घर आते-जाते समय किसी प्रकार की समस्या होने पर छात्राएं अपनी परेशानी सीधे महिला पर्यवेक्षक से साझा कर सकें। इस दिशा में अभी तक काेई कार्रवाई नहीं हुई है।

क्यों है सीसीटीवी लगाना अनिवार्य

छात्राओं के साथ बसों में छेड़छाड़ होना आम बात है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने बसों में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया है, जिससे बसों के भीतर विद्यार्थियों और चालक- परिचालक की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके। स्कूल बसों का टैक्स काफी कम है उसके बावजूद बस संचालक अभिभावकों से मोटा किराया वसूलते हैं। बसों से जाने वाले विद्यार्थियों को घर से लेने के बजाय, मुख्य सड़क पर आने की बात कहते हैं। वापसी में भी विद्यार्थियों को घर से काफी दूर उतार देते हैं, जिससे विद्यार्थियों को पैदल ही घर जाना पड़ता है। कैमरे लगने के बाद विद्यार्थियों की ये समस्या भी हल हो जाएगी।

ये करना जरूरी

स्कूल की बसों का रंग पीला होना चाहिए। बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगा होना चाहिए। आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए। यह वाहन संस्था के नाम से आरटीओ में रजिस्टर्ड होना चाहिए। इस पर मोबाइल या स्कूल का नंबर दर्ज होना चाहिए। बस की खिड़कियों पर शीशे के अलावा ग्रिल भी लगी होना चाहिए। बस के दरवाजे ठीक तरीके से बंद होना चाहिए। बसों में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।

कई रसूखदार बस संचालकों ने नहीं किया नियमों का पालन

निजी सवारी बसों में भी स्पीड गवर्नर, जीपीएस सिस्टम, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, दो दरवाजे आदि की सुविधा होना चाहिए। लेकिन अभी तक कई रसूखदार बस संचालकों ने इन सुविधाओं का इंतजाम नहीं किया। आरटीओ के अनुसार हरदा में करीब 50 सवारी बसें चलती हैं। जब फिटनेस के लिए वाहन आते हैं तो पहले पूरी सुविधाएं देखी जाती हैं। इसके बाद ही प्रमाण पत्र दिया जाता है।

कल से जांच करेंगे

जिले में करीब 80 स्कूल बसें व वैन हैं। इनमें से आधी में जीपीएस, सीसीटीवी, स्पीड गर्वनर आदि लगाने का काम सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन अनुसार हो चुका है। जिन बस संचालकों ने 31 मार्च तक ऐसा नहीं किया है, उनके खिलाफ कल से जांच कर कार्रवाई करेंगे। किन-किन स्कूलों में बच्चे किस तरह आते हैं, यह जानकारी भी अभी तक किसी स्कूल संचालक ने नहीं दी। राकेश अहाके,आरटीओ, हरदा

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