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10 साल बाद भी, शहर में नहीं बन सके पार्किंग जोन

शहर की पार्किंग व्यवस्था को अमल में लाने में दस साल भी कम पड़ गए हैं। अफसरों के ट्रांसफर होते ही शहर विकास के...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:40 AM IST
शहर की पार्किंग व्यवस्था को अमल में लाने में दस साल भी कम पड़ गए हैं। अफसरों के ट्रांसफर होते ही शहर विकास के प्रस्ताव भी फाइलों में ही कैद होकर रह जाते हैं। शहर की बेतरतीब पार्किंग को व्यवस्थित करने 10 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर पुष्पलता सिंह ने शहर के 12 स्थान चिन्हित किए थे। उनके तबादले के बाद वे स्थान मूर्त रूप नहीं ले सके। बाद में तत्कालीन एसपी दीपक वर्मा ने भी जनता के साथ मिलकर पहल की। उनके ट्रांसफर के बाद फिर एक बार मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

मनमानी पार्किंग से लोग विशेषकर युवतियों व महिलाओं को बेहद परेशानी होती है। सड़क किनारे ठेले लगाने वालों व दुकानदारों के बीच आए दिन झगड़े होते हैं। शहर के मुख्य बाजार घंटाघर पर पार्किंग के लिए केवल बड़ा मंदिर के पास ही जगह है। लेकिन त्योहार व सीजन में यहां जगह कम पड़ जाती है। घंटाघर के पास नो पार्किंग जोन है। पुलिस सहायता केंद्र है। नगर सुरक्षा समिति के जवान तैनात रहते हैं।

शहर में करीब 25 से ज्यादा बैंक शाखाएं हैं। लेकिन 95 फीसदी बैंकों के पास पार्किंग की सुविधा नहीं है। तत्कालीन सूबेदार एवं यातायात प्रभारी नीतेश वाइकर ने सभी बैंक प्रबंधकों को पत्र लिखकर पार्किंग इंतजाम को कहा था। उनके ट्रांसफर के बाद यह मामला भी आगे नहीं बढ़ा। एसबीआई मुख्य शाखा के अलावा अधिकांश बैंकों के पास पार्किंग की जगह नहीं है। वे किराए के कांप्लेक्स या अन्य जगहों पर बीच मार्केट में संचालित हो रही हैं।

बाजार और बैंकों के सामने ट्रैफिक हुआ बेपटरी

हरदा। टाउन हाल के सामने पीएनबी के पास भी पार्किंग सुविधा नहीं।

यहां बनना था पार्किंग जोन


कार्रवाई करेंगे