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फसल बेचकर फंसे किसान, कल आखातीज बैंक से नहीं मिल रहे रुपए, लेना पड़ रहा कर्ज

समर्थन मूल्य पर सोसाइटियों के जरिए सरकार को गेहूं बेचकर किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बुधवार को आखातीज पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:25 AM IST

समर्थन मूल्य पर सोसाइटियों के जरिए सरकार को गेहूं बेचकर किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बुधवार को आखातीज पर शादियों की भरमार है। जिले में 24 से ज्यादा जगह सम्मेलन होना है। लेकिन किसान गेहूं बेचने के बाद बैंक व सोसाइटियों के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। कुछ किसान तत्काल रुपए देने या गेहूं वापस लौटाने के भी आवेदन दे चुके हैं।

सोसाइटियों को गेहूं बेचने के 15-20 दिन बाद भी किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर नहीं हो रही है। रुपयों के लिए राेज किसान बैंकों व सोसाइटियों के चक्कर लगा रहे हैं। खातों में रुपया ट्रांसफर नहीं होने का कारण सहकारी बैंक को मांग के अनुसार नकद राशि की आपूर्ति नहीं होना बताया जा रहा है।

जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने 45500 किसानों ने पंजीयन कराया। इन किसानों से 88 केंद्रों पर खरीदी की जा रही है। अभी तक करीब 20 हजार किसान गेहूं बेच चुके हैं। इन किसानों से 194452.70 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। परिवहन की गति धीमी होने से 177568.10 मीट्रिक टन का ही परिवहन हो पाया है। जबकि कलेक्टर 7 दिन में सौ प्रतिशत उठाव के आदेश दे चुके हैं। समितियों को करीब 258 करोड़ का भुगतान हुआ है।

जल्द भुगतान का दावा

जिले में सहकारी बैंक से किसानों को करीब दो अरब रुपए की भुगतान हुआ है। यह राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर भी की जा चुकी है। वहीं नागरिक आपूर्ति निगम सहकारी समितियों के खातेे में करीब 258 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर चुका है। जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी केसी सारन की मानें तो नागरिक आपूर्ति निगम से बीते सप्ताह 8.50 करोड़ रुपए बैंक को ट्रांसफर हुए हैं, जिन्हें जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर करेंगे।

व्यापारी खरीद रहे कम दाम में

सोसाइटी में उपज बेचने पर लंबे समय तक भुगतान नहीं हो रहा है। लेट-लतीफी से वाकिफ किसान मजबूरी में व्यापारियों को कम दाम में फसल बेच रहे हैं। जरूरत की पूर्ति व शादी ब्याह के लिए साहूकारों से कर्ज लेना भी किसानों की मजबूरी बन गया है। जल्दी व नकद भुगतान के लालच में टेमागांव के दर्जनों किसानों ने बीते दिनों व्यापारी ओमप्रकाश सोनी को अनाज बेचा था। वह किसानों को 17 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान बिना दिए ही भाग गया।

ब्याज बचाने के लिए दे दिया गेहूं का रुपया

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो नॉन ने मार्च अंत में पहली किस्त सहकारी बैंक को ट्रांसफर कर दी थी। बैंक को नाबार्ड व अपेक्स बैंक का पुराना कर्ज 31 मार्च तक चुकाना था। ऐसा न करने पर ब्याज लगता। वहीं नए वित्त वर्ष में भी दिक्कत आ सकती थी। इससे बचने बैंक ने पहली किस्त की राशि ब्याज चुकाने में दे दी। नोडल अधिकारी केसी सारन इससे इनकार किया है।

वापस मांगा तो मिला भुगतान

गोलापुरा के मनीष शर्मा ने करीब 1800 क्विंटल गेहूं बेचा था। 13 दिन बाद भी रुपया नहीं मिले। परिवार में दो शादियां थीं। तारीख आगे बढ़ाना पड़ा। जन सुनवाई में आवेदन देकर कलेक्टर से रुपया या गेहूं दिलाने की मांग की। तब अगले दिन भुगतान हुआ।

सेंट्रल बैंक का खाता होल्ड होने से किसान नहीं निकाल पा रहा बेटी की शादी के लिए राशि

भास्कर संवाददाता| टिमरनी

किसान के घर बेटी की शादी है, लेकिन बैंक अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान की परेशानी बढ़ गई है। खाते में दोबारा राशि डालने का हवाला देकर 9 दिन पहले खाता होल्ड कर दिया। इससे किसान अब राशि निकालने बैंक के चक्कर लगा रहा है।

फुलड़ी निवासी अनिल राजेंद्र गौर ने बताया उन्होंने 8 माह पहले मंडी में मूंग बेची थी। तभी उसकी राशि बिल के अनुसार उसके सेंट्रल बैंक के खाते में आ गई, लेकिन 8 अप्रैल को जिला सहकारी बैंक ने किसान के खाते पर होल्ड लगा दिया। इस कारण अक्षय तृतीया पर होने वाली बेटी की शादी के लिए किसान राशि नहीं निकाल पा रहा है। परेशान होकर उसने सोमवार को मंडी सचिव एमके रायकवार से शिकायत की। इस संबंध में रायकवार का कहना है होल्ड एआरसीएस ऑफिस हरदा ने लगाया है। किसान को वहां जाकर शिकायत दर्ज करानी होगी।

भुगतान के संबंधितों को निर्देश दिए हैं, कल ही समीक्षा की जाएगी

सौ फीसदी परिवहन और जल्द भुगतान के संबंधितों को निर्देश दिए हैं। कल ही समीक्षा की जाएगी। जिसमें यह देखेंगे कि आखिर कहां दिक्कत आ रही है। अनय द्विवेदी, कलेक्टर, हरदा

स्थिति ठीक नहीं है कलेक्टर से चर्चा करेंगे

हम एक सप्ताह में किसानों के भुगतान की समस्या हल करने का आवेदन दे चुके हैं। अभी भी भुगतान की स्थिति अच्छी नहीं है। कलेक्टर से मिलकर चर्चा करेंगे। मोहन विश्नाेई, प्रदेश सचिव, किसान कांग्रेस

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