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20 लाख का भवन, 5 साल में कभी नहीं लगी क्लास, अब मजदूरों का बसेरा

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 03:17 AM IST

Harda News - मुझ से सुनिए मेरी दास्तां... राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन की बदौलत मैं महात्मा गांधी स्कूल परिसर में अस्तित्व...

Harda News - mp news building of 20 million class never took place in 5 years now the labor camp
मुझ से सुनिए मेरी दास्तां...

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन की बदौलत मैं महात्मा गांधी स्कूल परिसर में अस्तित्व में आया। मुझे बनाने में जनता की पाई-पाई से जमा होने वाले टैक्स में से सरकार ने 19.96 लाख रुपए फूंके। 2 जुलाई 2013 का वह ऐतिहासिक दिन आज भी याद है जब आरईएस ने मुझे यह कहते हुए शिक्षा विभाग के सुपुर्द कर दिया कि लो संभालो अपनी अमानत..। उस दिन मेरा मन खुशी से झूम रहा था कि अब मेरी छत के नीचे देश का भविष्य तैयार होगा। युवा पढ़ेंगे और इतिहास रचेंगे। पर मेरी नीयति को कुछ और मंजूर था। खुशी कुछ ही दिन में काफूर हो गई जब जिम्मेदार यहां क्लासेस ही शुरू नहीं करा सके। राह देखते-देखते पांच साल गुजर गए और तब तक शिक्षा के मंदिर की जगह मेरा परिसर गुंडे-मवालियों, जुअारियों की नजर में चढ़ चुका था और मुझे अपनी अनैतिक गतिविधियों का अड्‌डा बना लिया।

2018 में फिर एक बार जब शहर को मॉडल कॉलेज की सौगात मिली तो उसके पास भवन नहीं था। तब भी मेरी याद आई तो मुझे लगा कि अब तो दिन फिरेंगे। मेरा सपना पूरा होगा। प्रस्ताव बने और गए भी पर कुछ नहीं बदला। शायद मेरी ही किस्मत खराब है, जिम्मेदार तो बहुत जिम्मेदार हैं..? जिस कॉलेज को यहां लगना था उसके प्रबंधक ने खिड़की, दरवाजे, पानी की सुविधा, लेट बाथ के ऊपर पानी की टंकी, बिजली न होने और सुरक्षा इंतजामों की कमियां गिनाकर यहां मेरे जख्मों को कुरेदकर चले गए। अब तो मैं खुद ही अपने अस्तित्व पर सवाल करने लगा हूं कि मैं इस धरती पर बोझ बनकर क्यों खड़ा हूं। क्यों मुझ पर जनता की गाढ़ी कमाई और पाई-पाई से जमा होने वाले टैक्स को यूं बर्बाद कर दिया गया। मुझे पता है कि नेताओं के लिए रातोरात लाखों के तम्बू तान देने वाले अफसरों को मेरे ढांचे पर मरहम लगाने की कभी तो याद आएगी.. कभी तो मेरा सपना पूरा होगा, कभी तो अपनी छत के नीचे बच्चों को पढ़ने का अवसर देकर जनता की उस गाढ़ी कमाई का कर्ज चुका पाऊंगा।

...ताे शायद न होती

ऐसी तस्वीर

ठेकेदार ने मजदूरों काे ठहराया

15 दिन पहले यहां गर्ल्स हॉस्टल बनाने आए ठेकेदार ने अपने मजदूरों के परिवारों को ठहराने के लिए मेरी चोरी जा चुकी खिड़कियों की जुड़ाई कराई। सामान की सुरक्षा के लिए उनके पास उपलब्ध दरवाजे लगाए। जिससे मजदूरों को सर्दी में भीतर ठिठुरना न पड़े।

शोकॉज जारी कर डीईओ ने प्राचार्य को ठहराया था जिम्मेदार

20 लाख के भवन की इस दुर्दशा के लिए तत्कालीन डीईओ भावना दुबे ने मगां हासे स्कूल की तत्कालीन प्राचार्य शोभा शकरगाए को जिम्मेदार माना था। 27 अगस्त 15 को इन शोकॉज जारी किया। इसमें पूछा आपने कमरों का उपयोग नहीं किया, न ही देखभाल की। इससे असामाजिक तत्वों ने क्षति पहुंचाई। विभाग की छवि खराब हुई। आपके पास चौकीदार सुविधा व पर्याप्त राशि होने पर भी इनका उपयोग व सुरक्षा नहीं की। आपका यह कृत्य गैर जिम्मेदाराना होकर पदीय दायित्व के निर्वहन अनुकूल नहीं है।

रसमा के ये 4 नए कमरे बनने के दौरान डीईओ ने अपने आॅफिस के लिए इन्हें मांगा था। तत्कालीन प्राचार्य शोभा शकरगाए ने बच्चों की दर्ज संख्या ज्यादा होने से इनकार कर दिया। इस बीच डीईओ अॉफिस उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में शिफ्ट हो गया। यदि डीईओ को ये मिल जाते तो शायद यह तस्वीर इतनी बदरंग न होती।

17 जुलाई 2016 की है यह तस्वीर

महात्मा गांधी बालक उमा हायर सेकंडरी स्कूल में पहले डीईओ कार्यालय भी लगता था। विद्यार्थियों के लिए कमरे कम पड़ने लगे। रमसा ने 4 कमरे बनाने 19.96 लाख रुपए दिए। आरईएस ने 2013 में कमरे बनाकर तत्कालीन प्राचार्य शोभा शकरगाए को हैंडओवर किया।

जिम्मेदाराें पर कार्रवाई करेंगे


मरम्मत के लिए नहीं थी राशि


क्याेंकि...

प्राचार्य ने नहीं ली सुध, चाेरी हाे गए खिड़की अाैर दरवाजे

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