राजस्व से नप को हस्तांतरित नहीं होने से अटका छीपाबड़ तालाब का गहरीकरण व सौंदर्यीकरण

Harda News - खिरकिया। छीपाबड़ का तालाब जिसका हस्तांतरण अटका हुआ है। 34 साल बाद जिला पंचायत से नगर परिषद को हस्तांतरित हुआ...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:15 AM IST
Khirkiya News - mp news due to non transfer of revenue from the revenue the deepening and beautification of the shabby pond
खिरकिया। छीपाबड़ का तालाब जिसका हस्तांतरण अटका हुआ है।

34 साल बाद जिला पंचायत से नगर परिषद को हस्तांतरित हुआ तालाब

राजस्व रिकार्ड के यह तालाब अनुसार शहरी क्षेत्र में पटवारी हल्का नंबर 17 (छीपाबड़) के खसरा नंबर 617 में रकबा 18.117 हेक्टेयर (करीब 45 एकड़) में फैला हुआ है। छीपाबड़ 1982 के पहले ग्राम पंचायत क्षेत्र था। जिसका 1982 में नगर पालिका के गठन के समय खिरकिया में विलय हो गया था। तत्कालीन समय में विभागीय चूक की वजह से खिरकिया व छीपाबड़ क्षेत्र की शासकीय जमीन नगर पालिका को हस्तांतरित नहीं की जा सकी। इसलिए यह तालाब छीपाबड़ ग्राम पंचायत की संपत्ति मानते हुए जनपद पंचायत में दर्ज हो गया। तभी से यह तालाब जनपद पंचायत के आधिपत्य में है। वर्ष 2016 में 34 साल भी तालाब जनपद पंचायत से नगर परिषद को हस्तांतरित हुआ।

नप का सौंदर्यीकरण प्रस्ताव अटका

राजस्व विभाग से तालाब का हस्तांतरण नहीं होने से सौंदर्यीकरण को लेकर नगर परिषद की कार्ययोजना अटकी हुई है। साल 2016 और 2017 में नगर परिषद ने करीब 1 करोड़ रुपए तालाब के सौंदर्यीकरण पर खर्च करने कार्ययोजना बनाई थी। जिसमें तालाब की पाल पर टाइल्स लगाने ने, पाल पर पाथ-वे बनाने, पाल के किनारे पौधारोपण करने, फव्वारे लगाने और वोटिंग शुरू कराने की कार्य योजना शामिल है। वहीं तालाब का गर्मी में गहरीकरण करने के बाद उसमें सालभर पानी का भराव रखने ट्यूबवेल का पानी छोड़ने की योजना भी है।

शहरी क्षेत्र का सबसे बड़ा है तालाब

जिले में शहरी क्षेत्र में छीपाबड़ का यह सबसे बड़ा तालाब राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। लेकिन नगर परिषद के पास तालाब के आधिपत्य को लेकर कोई रिकार्ड नहीं होने से सौंदर्यीकरण कराने शासन स्तर से स्वीकृति नहीं मिल रही है। साल 2009 में तत्कालीन एसडीएम मंजूषा राय ने जनभागीदारी से तालाब के गहरीकरण की शुरुआत भी की थी। इसके बाद से हर साल नगर परिषद के माध्यम से तालाब का गहरीकरण होता है। वहीं सौंदर्यीकरण के काम अटके पड़े हैं। तालाब का गहरीकरण होने से बारिश के दिनों में भरपूर पानी जमा हाेने से आसपास के क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता है।

2002 में पारित जनपद का प्रस्ताव बना था आधार

नप को तालाब का आधिपत्य मिलने के लिए जनपद पंचायत का साल 2002 का एक प्रस्ताव आधार बना था। 30 अगस्त 2000 को जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में छीपाबड़ का तालाब नगर परिषद को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। इस प्रस्ताव के आधार पर नगर परिषद ने काफी जद्दोजहद करते हुए नए सिरे से फाइल बनाई और जनपद पंचायत से साल 2016 में तालाब पर आधिपत्य की एनओसी प्राप्त की थी।

आधिपत्य मिलते ही करेंगे सौंदर्यीकरण


जांच में मिलीं खामियां


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