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जिस व्यक्ति का केवली प्ररुपित धर्म में मन लगता है उसे देवता भी नमस्कार करते हैं : विनय मुनि

एक वर्ष पहले
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समता भवन में श्वेतांबर जैन संत ने दिए व्याख्यान

धार्मिक साधना करने का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, कर्म निर्जरा, अखंड आनंद की प्राप्ति एवं शांति का महाद्वार खुले यह होना चाहिए। लेकिन शांति का महाद्वार तभी खुलेगा जब हम अपने विकारों का विमोचन करेंगे। अहंकार व ममकार इन दो चीजों को बाहर छोड़कर हमें धर्म स्थानक में प्रवेश करना चाहिए।

धर्म स्थानक में प्रवेश करते समय हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए। इससे हमें अच्छी ऊर्जा मिलेगी। यह बात श्वेतांबर जैन संत विनय मुनि ने गुरुवार को समता भवन में अपने व्याख्यान में कही। धर्म करना बहुत कठिन है। जिस व्यक्ति का केवली प्ररुपित धर्म में मन लगता है उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। सम्यक ज्ञान प्राप्त करने व मन को एकाग्र करने के लिए केवली प्ररुपित धर्म की शरण लेना पड़ेगी। अपने घर को स्वर्ग बनाने के लिए हमें निभना, निभाना एवं झुकना, झुकाना आना चाहिए। हमें कैंची की तरह तोड़ने का नहीं सुई की तरह जोड़ने का काम करना चाहिए। हमें दूसरों के साथ सद्भावनापूर्वक एवं सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। इसके पहले मधुर मुनि मसा ने भी व्याख्यान दिया।

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