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हमारा भाैतिक पदार्थाें के प्रति आकर्षण और लगाव से बढ़ रहा मानसिक प्रदूषण : मुनि
सुखी और स्वस्थ जीवन जीने के लिए एक मात्र साधन है तो वह ध्यान है। ध्यान से हमारा आभामंडल शुद्ध बनता है। मानसिक प्रदूषण से भी मुक्ति मिलती है। मानसिक प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण हमारा भौतिक पदार्थों के प्रति आकर्षण एवं लगाव है।
यही कारण है कि हम धर्म से जुड़ नहीं पाते। मानसिक प्रदूषण से बचने के लिए अहिंसा एवं मैत्री के महत्व को समझना होगा। यह बात श्वेतांबर जैन संत विनय मुनि ने बुधवार को समता भवन में व्याख्यान में कही। भगवान महावीर का आभामंडल अहिंसा व मैत्री से ओतप्रोत था। आत्म शक्ति को जागृत करने के लिए एकमात्र आधार है तो वह है जिनवाणी। जिनवाणी का मनोयोग पूर्वक अवलंबन लेने से व्यक्ति के जीवन में बदलाव होता है। इसके पहले मधुर मुनि मसा ने कहा कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र एवं तप मोक्ष मार्ग के आयाम हैं।
इनकी सम्यक आराधना करने से मोक्ष के निकट या मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। ज्ञान की शुरुआत नवकार मंत्र से एवं समाप्ति केवल ज्ञान पर होती है। दर्शन की शुरुआत श्रद्धा याने समकित से एवं समाप्ति क्षायिक समकित पर होती है। चारित्र की शुरुआत सामायिक से एवं समाप्ति यथाख्यात चरित्र पर होती है। तप की शुरुआत नवकारसी से एवं समाप्ति संलेखना संथारा पर होती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।