धुली रेत के चक्कर में गहरी कर रहे नर्मदा, जान जोखिम में डालकर निकाल रहे रेत

Harda News - प्रतिबंध के बाद भी नर्मदा नदी में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। नदी किनारे की बजाय, बीच नदी से निकलने वाली धुली रेत...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Handiya News - mp news narmada deepening in the dhundi sands lives in danger
प्रतिबंध के बाद भी नर्मदा नदी में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। नदी किनारे की बजाय, बीच नदी से निकलने वाली धुली रेत के रेट अच्छे मिलते हैं। इसलिए लोग जान जोखिम में डालकर बीच नदी से रेत निकाल रहे हैं। अलग-अलग घाटों से मजदूर और नावों की मदद से रेत निकाली जा रही है। रेत को किनारे पर जमा कर ट्रैक्टर-ट्राॅली से परिवहन किया जा रहा है। इस समय रेत निकालने का काम भमोरी, सुरजना, बगलातर, गोयत, मैदा, गौला घाटों पर किया जा रहा है।

रेत माफिया महंगे दामों पर रेत बेच रहे हैं। खनिज विभाग और प्रशासन का ध्यान नहीं होने से रेत माफिया बेधड़क इस अवैध काम में लगे हैं। शनिवार को उक्त घाटों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही थी। आसपास गांवों के ग्रामीण वाहनों की आवाजाही और आवाज से परेशान हैं। वे लंबे समय से प्रशासन से रेत माफियाओं पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है। लेकिन प्रशासन के आला अधिकारी सिर्फ दिखावे के लिए घाटों का निरीक्षण कर लौट आते हैं। जब-जब भी अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण उसके पहले ही रेत माफिया अपने तामझाम लेकर घाटों से गायब हो जाते हैं।

गहरे पानी से मजदूर निकाल रहे रेत, नावों से घाट पर और ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से पहुंचाई जा रही बेचने

हंडिया। घाट पर नाव से रेत खाली करते मजदूर।

एक नाव के 500 रुपए

ग्रामीणों की सूचना के अनुसार ठेकेदार अपने मजदूरों को 500 रुपए देकर एक नाव भरकर रेत पानी के अंदर से निकलवाता है। इसके बाद ठेकेदार एक ट्राॅली रेत को 3000 हजार रुपए से अधिक दाम पर बेचता है। मजदूर कुछ पैसों के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पानी से रेत निकाल रहे हैं। यह सिलसिला प्रतिदिन चलता है। मजदूरों की मदद से घाट पर ट्रैक्टर - ट्राॅली जाने के लिए रास्ता भी बनाया है। खनिज विभाग के अधिकारी इन क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। इस कारण घाटों पर रेत निकालने और परिवहन पर रोक नहीं लग रही है।

गहरे पानी से ला रहे रेत

एक नाव पर 5 मजदूर सवार रहते हैं। यह नाव लेकर गहरे पानी में जाते हैं। जहां मजदूर बारी-बारी से डुबकी लगाकर पानी से धुली रेत निकालकर नाव में जमा करते जाते हैं। बाजार में किनारे की रेत की अपेक्षा पानी से निकाली गई धुली रेत की कीमत अधिक मिलती है। धुली रेत आसानी से बिक भी जाती है। इसी कारण संबंधित ठेकेदार मजदूरों से गहरे पानी से रेत निकलवा रहे हैं। पिछले दिनों भी सुरजना व नेमावर के आसपास गहरे पानी में डूबने से मजदूरों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

हंडिया। गहरे पानी से रेत निकाल नाव में भरकर घाट पर लाते मजदूर।

रेत चोरों का सूचना तंत्र मजबूत

नर्मदा के घाटों पर लंबे समय से रेत निकालने का काम चल रहा है। जब-जब भी प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करनी चाही, वह असफल रहा है। अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही रेत माफियाओं के लोग घाटों से गायब हो जाते हैं। इससे पता चलता है कि रेत माफियाओं का सूचना तंत्र कितना मजबूत है। ग्रामीण कई बार यह आरोप लगा चुके हैं कि रेत माफियाओं से प्रशासनिक व खनिज विभाग के कुछ लोग मिले हुए हैं। यही कारण है कि घाटों पर अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही रेत माफिया भाग निकलते हैं।

तेज गति से भगा रहे ट्रैक्टर

घाटों से ट्रैक्टर-ट्राॅली में रेत भरकर रवाना किया जाता है। यह ट्रैक्टर-ट्राॅली गांवों से तेज गति से भगाई जा रही है। जिससे ग्रामीणों को दुर्घटना का डर सता रहा है। कार्रवाई के डर से ट्रैक्टर चालक गति का ध्यान नहीं रखते हैं। गांवों में कई बार ट्रैक्टर-ट्राॅली पलटने की दुर्घटना भी हो चुकी है।

कार्रवाई करेंगे


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