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जरूरतमंद के द्वारा बेरोजगारों को फंसाता था ठग एडीपीअाे

एक वर्ष पहले
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पुलिस ने शनिवार काे ठग शैलेंद्र अाैर साथ देने वाले विवेक त्रिपाठी का अामना-सामना कराया। दाेनाें काे साथ बैठाकर पूछताछ की। इसमें दाेनाें ने एक-दूसरे काे पहचानने से मना कर दिया। वहीं यह भी पता चला कि ठग एडीपीअाे शैलेंद्र सिसाेदिया ने फर्जी नियुक्ति पत्र अाैर सील साइन का उपयाेग किया। वह जरूरतमंद लाेगाें की मदद से ही दूसरे बेरोजगारों फांसता था, इसके बाद साथी के जरिए ही रुपए लेता था। माेटी रकम खुद शैलेंद्र रखता अाैर कमिशन अपने साथी काे दे देता। उसके ठगी के इस गिराेह में अन्य लाेग भी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस ने उनके नामाें का खुलासा नहीं किया है।

पुलिस के मुताबिक गिराेह के लाेग एक-दूसरे काे नहीं जानते। ठग एडीपीअाे शैलेंद्र उनसे अलग-अलग स्थानों पर मुलाकात के लिए बुलाता था। उसने हरदा के अलावा देवास, भाेपाल, अनूपपुर, मुरैना सहित अन्य जिलाें के बेरोजगारों काे ठगा है। भाेपाल के अलग-अलग थानाें में लिखित शिकायत भी हुई है।

टीअाई जयंत मर्सकाेले ने बताया कि ठग एडीपीअाे शैलेंद्र अाैर विवेक ने शहर के पति-प|ी अाैर देवास जिले के सुंद्रेल निवासी शुभम व सचिन से नाैकरी दिलाने नाम पर रुपए ठगे थे। दाेनाें आरोपियों काे शनिवार काे काेर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया है। उन्होंने कहा कि भाेपाल व देवास पुलिस काे भी आरोपियों की सूचना दी गई है।

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