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पाश्चात्य संस्कति भले हावी हो जाए पर मातृशक्ति हिंदी मत छोड़ना : पं. नागर

एक वर्ष पहले
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अाधुनिकता के नाम पर हम अपना पहनावा अाैर रहन सहन बदल रहे हैं, लेेकिन हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि पाश्चात्य संस्कृति भले ही हावी हाे जाए पर हम अपनी मातृशक्ति हिंदी अाैर महिलाएं माथे पर बिंदी लगाना न छाेडें। कथावाचक पंडित कमल िकशाेर नागर ने इंदाैर राेड स्थित हीराकुंज काॅलाेनी में चल रही श्रीमद भागवत कथा के समापन माैके पर यह बात कहीं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि आप कितनी भी पढ़ी लिखी हो जाओ लेकिन हिंदी बिंदी कभी मत छोड़ना, फैशन कितने भी करो लेकिन बिंदी जरूर लगाना यह हमारी संस्कृति की निशानी है हमें हमारी संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखना।

उन्हाेंने कहा कि हम सबको गुणवान बनना चाहिए। राजा का देश में पूजन हाेता है। धनवान अपने क्षेत्र में पूज्यनीय हाेता है। लेकिन जिस पर सरस्वती की कृपा हाे जाए उसे पूरी दुनिया पूजती है। हम अपने रिश्तेदारों की सेवा करते हैं उनको पूछते हैं उनके संकट में काम आते हैं यह हमारा कर्म है लेकिन हम असहाय की सहायता करते हैं जिसका कोई नहीं उसकी सेवा करते हैं यह हमारा धर्म है।

उन्होंने कहा कि अन्याय का विरोध करो जहां कहीं भी अन्याय हो उसके विरोध में खड़े हो जाओ अगर सब लोग अन्याय के विरोध में खड़े हो जाएंगे तो अन्याय करने वाला डर जाएगा।

आज लोग गाय के ऊपर दिन-रात प्रवचन देते हैं


पं. नागर ने कहा कि आज लोग गाय के ऊपर दिन-रात प्रवचन देते हैं और गाय को पालने की विधि बताते हैं लेकिन वह खुद गाय को नहीं पालते। आज देश में गाय पर बोलने वाले ज्यादा हैं, लेकिन गाय को पालने वाले कम हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि घर में गाय होना जरूरी है और अगर गाय होगी गोबर होगा तो घर में लक्ष्मी का वास होगा इसलिए गाय पालना जरूरी है। उन्होंने कहा भजन भाव से होना चाहिए, भजन इच्छा रहित होना चाहिए, भजन कामना रहित होना चाहिए, भजन वासना रहित होना चाहिए, भजन भाव से हो करुणा रस से हो तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करने के लिए आ जाते हैं।

हरदा। कथा सुनने अाए लाेग।
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