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प्रकृति का कर्ज चुकाना संभव नहीं है: तंतुवाय

युवाओं ने शीतला घाट में चलाया सफाई अभियान भास्कर संवाददाता | हटा नगर से निकली सुनार नदी के शीतलाघाट पर रविवार...

Dainik Bhaskar

Mar 05, 2018, 03:10 AM IST
प्रकृति का कर्ज चुकाना संभव नहीं है: तंतुवाय
युवाओं ने शीतला घाट में चलाया सफाई अभियान

भास्कर संवाददाता | हटा

नगर से निकली सुनार नदी के शीतलाघाट पर रविवार को सफाई अभियान चलाया गया। जिसमें तंतुवाय समाज के वरिष्ठों के साथ युवाओं ने सामूहिक रूप से घाटों के आसपास के कचरे को उठाकर बाहर फेंका। इस दौरान युवाओं ने संकल्प लिया कि यह अभियान प्रत्येक रविवार को चलाया जाएगा। ताकि नदी के आसपास फैलने वाले पालीथिन, कपड़ा व कचरा को नदी से बाहर निकाला गया। मुकेश तंतुवाय, माधव कोरी ने बताया कि इस अभियान में हर व्यक्ति को सहयोग करना चाहिए।

नदी का जल किसी के साथ भेदभाव नहीं करता, प्रकृति सभी के लिए बराबर है, इसका कर्ज चुकाना संभव नहीं है। जिस गति से नदी का जलस्तर गिर रहा है, उससे लग रहा है भविष्य में नगर में जल संकट गहरा सकता है। नदी हमें विरासत में मिली है। दिनों-दिन नदी घाटों को छोड़ रही है, इसे सहेजने का सभी का धर्म बनता है। इसमें कार्य करने के लिए न्यौता का इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं हरिशंकर, हेमंत तंतुवाय ने बताया कि नदियां प्रकृति की सबसे बड़ी देन हैं, लेकिन मनुष्य द्वारा लगातार प्रकृति के साथ की जा रही छेड़छाड़ के कारण अब नदियां भी हमें रूठ गई हैं। पहले सुनार नदी में गर्मियों तक पानी रहता था, लेकिन अब मार्च-अप्रेल में ही नदी सुख जाती हैं। हम हर साल नदियों से भरपूर पानी, अच्छी फसल तो ले रहे हैं, लेकिन बदले में नदी में कचरा, पूजन सामग्री डाल रहे हैं, यह कहां तक उचित है। अब समय आ गया है कि सभी लोग जागरूक हों और नदी में कचरा न डाला जाए इसक लिए स्वयं के साथ दूसरों को भी समझाइश दें।

उन्होंने कहा कि यदि हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियों को भयंकर दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। रोहणी तंतुवाय ने जलसंरक्षण पर अपनी बात रखते हुए बताया कि जल है तो कल है, यदि हम हमेशा ही जल का अपव्यय करते रहेंगे तो एक दिन बंूद-बंूद पानी को तरसना पड़ेगा। इसलिए अब भी समय है जल का संरक्षण करो, जितनी जरूरत है उतना ही पानी का उपयोग करो। इस अवसर पर भागीरथ तंतुवाय, दशरथ कोरी, छोटू तंतुवाय, अमित तंतुवाय, महेंद्र, सौरव के साथ बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति रही।

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