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19वें दिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना जारी

अपने हक एवं अधिकार के लिए बीते 19 दिनों से संघर्षरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को काले वस्त्र धारण कर बस...

Danik Bhaskar | Mar 06, 2018, 03:30 AM IST
अपने हक एवं अधिकार के लिए बीते 19 दिनों से संघर्षरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को काले वस्त्र धारण कर बस स्टैंड सभा मंच पर धरना प्रदर्शन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने 15 फरवरी से आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखकर प्रदेश व केंद्र सरकार के समक्ष अपनी 5 सूत्रीय मांगों को रखा है।

34 वर्ष से महिला एवं बाल विकास विभाग में सेवाएं दे रहीं नसीम बानो, गुलाब बाई विश्वकर्मा ने बताया कि जब मात्र 125 रुपया मानदेय मिलता था, उस समय से सेवाएं दे रहे हैं। गांव तक आने जाने के भी कोई साधन नहीं थे। तब भी कई किमी पैदल चलकर विभाग को सेवाएं दीं, विभाग केवल मानदेय दे रहा है। न तो वेतन निर्धारित किया गया न ही स्थाई हुए न ही पेंशन की पात्रता। यह तो केवल शोषण की श्रेणी में आता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की ब्लाक अध्यक्ष अनुराधा प्रजापति ने बताया कि संघ के द्वारा 19 दिन से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। हटा ब्लॉक के सारे केंद्र बंद पड़े हैं। केंद्रों के माध्यम से संचालित सारी सेवाएं बंद हैं। मालती ठाकुर, रीना व्यास, उमा विश्वकर्मा, किरण राजपूत ने बताया कि विभाग केवल मानदेय पर हम से काम करा रहा है। जबकि विभागीय कार्य के अतिरिक्त जनगणना, स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम यहां तक कि चुनाव में भी हम सभी की ड्यूटी लगाई जा रही है।





कमरून निशा, मुन्नी चौरहा, माया खटीक, शारदा परमार, खुशबू राय, मंजू रिछारिया, जुलेखा बी ने बताया कि आए दिन बैठक, मीटिंग, नेताओं अधिकारियों के कार्यक्रम में भागीदारी, भीड़ एकत्रित करने में हम सभी को आगे किया जाता है लेकिन आज जब वेतन निर्धारित करने, स्थाई करने की बात करते हैं तो सारे जनप्रतिनिधियों को कुछ सुनाई नहीं देता है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सरकार की सबसे महत्वपूर्ण आमजन से जुड़ी योजनाएं संचालित की जाती हैं। जिनमें शिशु के गर्भधारण करने से लेकर 6 वर्ष तक उसका लालन पालन देखते हैं, इसके बावजूद भी सरकार हमें सरकारी कर्मचारी नहीं मानती है। हम सभी को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।

मजदूरों से कम मिल रहा वेतन: प्रेमलता तिवारी, रजनी यादव, माया खटीक, सुषमा जैन, स्नेहलता तिवारी, फूलबाई, साधना गर्ग, मीना बिदुआ ने कहा कि केंद्र में इतना अधिक कार्य रहता है कि परिवार के लिए भी समय नहीं निकाल पाते हैं। सारा दिन मजदूरों के भांति कार्य करते हैं और वेतन न्यूनतम मजदूरी से भी कम दिया जा रहा है। कम से कम 18 हजार रुपए वेतन निर्धारित होना चाहिए। प्रीति विश्वकर्मा, नीलम अहिरवार, सरस्वती कोरी, रेखा राजपूत, प्रभा नामदेव, रश्मि नामदेव ने सभी कार्यकर्ताओं को भविष्य निधि, चिकित्सा सुविधा, ग्रेच्युटी सहित सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ एवं पेंशन सुविधा का लाभ दिलाने की मांग की है।

65 वर्ष की जाए सेवानिवृत्ति आयु: कृष्णा पाठक, मीना पटैल, रजनी पटेल, सारिका सैनी, सुधा श्रीवास्तव ममतारानी, मालती, गुलाब बाई, राजकुमारी ने मप्र न्यूनतम वेतन सलाहकार परिषद के निर्णय का लागू करते हुए न्यूनतम वेतन की अधिसूचना शीघ्र जारी करने की मांग की है। साथ ही सेवानिवृति आयुसीमा 65 वर्ष करने की मांग उठाई।