Hindi News »Madhya Pradesh »Hata» क्यों बढ़ाए कृषि उपज मंडियों के चुनाव

क्यों बढ़ाए कृषि उपज मंडियों के चुनाव

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों के चुनाव 6 माह के लिए क्यों बढ़ाए गए हैं। एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2018, 03:30 AM IST

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों के चुनाव 6 माह के लिए क्यों बढ़ाए गए हैं। एक जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने विधि एवं विधायी कार्यविभाग के प्रमुख सचिव, कृषि कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव, मप्र कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक, आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग और कृषि उपज मंडी बोर्ड भोपाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

खेतीहर किसान कल्याण संघ मध्यप्रदेश के अध्यक्ष आजाद सिंह दबनास ने याचिका दायर कर बताया कि कृषि उपज मंडियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव लंबित हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार ने दिसंबर 2017 में एक अधिसूचना जारी कर बिना कोई ठोस कारण के 6 माह के लिए कृषि उपज मंडी के चुनाव बढ़ा दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अतुलानंद अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि मंडियों के चुनाव पिछले एक साल से लंबित हैं। सरकार ने कहा है कि इस साल सूखा पड़ा है और कम बारिश हुई है, इसलिए अभी चुनाव नहीं करा सकते। उन्होंने दलील दी कि अधिनियम की धाराओं के तहत यह कोई ठोस वजह नहीं है। याचिका में मांग की गई कि मंडियों के चुनाव के लिए सरकार को आदेशित किया जाए।

प्रवेश निरस्त होने के बाद भी कैसे पढ़ रहे एनआरआई छात्र

जबलपुर | एनआरआई कोटे के तहत गलत तरीके से प्रवेश लेने वाले एडमिशन से बेदखल छात्रों की पढ़ाई निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा जारी रखने को हाईकोर्ट ने आड़े हाथों लिया। मामले पर सोमवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों को हलफनामे पर यह बताने कहा है कि एडमिशन निरस्त होने के बावजूद बेदखल छात्र कैसे पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि अगर उनकी पढ़ाई जारी है तो उसकी वजह क्या है। जस्टिस आरएस झा एवं जस्टिस राजीव दुबे की खंडपीठ ने 19 मार्च को अगली सुनवाई निर्धारित की है।

प्रांजल भाटिया सहित अन्य छात्रों की ओर से दायर याचिका में एडमिशन निरस्त करने को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर डीएमई ने एनआरआई कोटे के तहत आवंटित 114 एडमिशन की जांच की गई। इनमें से 107 एडमिशन गलत पाए गए। डीएमई ने 28 नवंबर को 107 एडमिशन निरस्त करने का आदेश जारी किया था। डीएमई ने निजी मेडिकल कॉलेजों को यह हिदायत भी दी थी कि जिन छात्रों के एडमिशन निरस्त किए गए हैं उन्हें रोल से हटा दें और उनकी फीस एवं दस्तावेज लौटा दें। डीएमई के इसी आदेश को चुनौती देते हुए कुछ एनआरआई उम्मीदवारों ने याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि डीएमई ने उनके एडमिशन निरस्त करने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया, जोकि अनुचित है। यह भी कहा गया कि अब वे एनआरआई की परिभाषा को चुनौती दे रहे हैं। वहीं, कैवियटकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि करीब 100 दिन होने के बावजूद उक्त एनआरआई छात्र अभी भी कॉलेज में अध्ययनरत हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Hata

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×