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नगर में एकात्म यात्रा का फीका रहा आयोजन

नगर में एकात्म यात्रा का फीका रहा आयोजन भास्करसंवाददाता| हटा नगरमें एकात्म यात्रा का प्रचार प्रसार विगत एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 05, 2018, 03:35 AM IST

नगर में एकात्म यात्रा का फीका रहा आयोजन

भास्करसंवाददाता| हटा

नगरमें एकात्म यात्रा का प्रचार प्रसार विगत एक माह से चल रहा था, इसको लेकर एसडीएम ने तीन बैठक भी आयोजित की, जनपद पंचायत कार्यालय एवं नगर पालिका में भी आयोजन को सफल बनाने के लिए बैठकें हुईं, इसके बाबजूद भी आयोजन में आयोजन समिति कोई भीड़ एकत्रित नहीं कर पाए। मंच के आसपास केवल सरकारी कर्मचारी अधिकारी ही नजर आए।

यात्रा के आगमन का समय 3 बजे का बताया गया लेकिन यात्रा 8.30 बजे आयोजन स्थल पर पहंुची। जबकि यात्रा के प्रभारी संत समाज सायंकाल ही मंच पर गए थे। मंच के समाने गांव एवं नगरीय क्षेत्र के विभिन्न वार्डों के कलश रखे जाने थे। हटा एवं पटेरा जनपद पंचायत क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायत के कलश आए थे, लेकिन पटेरा नगर पंचायत के किसी भी वार्ड से एक भी कलश मंच पर नहीं आया साथ ही नगर पालिका के 15 वार्डो में से मात्र दो वार्ड नवोदय वार्ड, संजय वार्ड के ही कलश मंच के समाने दिखाई दिए।

सुनार नदी का उल्लेख पुराणो में भी: डॉ. श्यामसुंदर

भीड़एकत्रित करने के लिए पहले स्थानीय लोकगीत गायकों का सहारा लिया गया, इसके उपरांत संस्कृत बैंड धु्रवा के द्वारा अपनी प्रस्तुति दी गई। मुक्तिबोध सृजनपीठ के निदेशक, पूर्व काॅलेज प्राचार्य डाॅ. श्याम सुंदर दुबे ने संतों एवं अतिथियों को नगर के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि नगर से निकलने वाली सुनार नदी एवं हटा नगर का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। एकात्म यात्रा में निरंतर साथ चल रहे महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद महाराज ने यात्रा का उद्देश्य बताते हुए आदि शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1200 साल पहले आठ साल के बालक ने देश की विभिन्न जातियों को एकत्रित करने का सद प्रयास किया था, आज प्रदेश की सरकार ने पुनः आदि शंकराचार्य की यात्रा प्रदेश के सभी जिलों में निकाल कर समाजिक समरसता लाने की पहल कर रही है। कोई भी जाति से छोटा नहीं होता है, यदि उच्च जाति में जन्म लेने वाला बुरा कर्म करता है तो वह छोटा होता है। जन्म नहीं कर्म से महान बने। छुआछूत समाज के लिए पाप, अभिशाप है कानून की दृष्टि में यह अपराध भी है। साथ आए आत्मानंद जी महाराज ने आदि शंकराचार्य को भगवान का अवतार बताया। इसके अलावा सच्चिदानंद शेवडे महाराष्ट्र, सुल्तान सिंह शेखावत ने भी अपने विचार रखे।

छुआछूत एक पाप, अभिशाप, अपराध है: महामंडलेश्वर

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