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नवरात्रि पर्व: आज से मंदिरों में गूंजेंगे माता के जयकारे

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर के माता मंदिरों में प्रातःकाल से ही माता के जयकारे सुनाई देंगे। उपकाशी कही जाने...

Dainik Bhaskar

Mar 18, 2018, 03:50 AM IST
नवरात्रि पर्व: आज से मंदिरों में गूंजेंगे माता के जयकारे
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर के माता मंदिरों में प्रातःकाल से ही माता के जयकारे सुनाई देंगे। उपकाशी कही जाने वाली धर्म परायण हटा नगरी में सुनार नदी किनारे बने शीतला माता मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्तों को पहुंचना प्रारंभ हो जाता है।

इस श्रृंखला में मां चंडी जी मंदिर, मां पीतांबरा मंदिर, मां कलेही माता मंदिर, मां हरसिद्धी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ, नव निर्मित मां दुर्गा मंदिर पेट्रोल पम्प के पास, मां दुर्गा मंदिर नगर पालिका सहित नगर के सभी माता मंदिर में रंग रोगन के साथ सजावट की गई है। नगर के गणमान्य नागरिकों ने नववर्ष की एक दूसरे व आमजन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नगर में सारे पर्व गरिमामय तरीके से मनाए जाते हैं, उसी गरिमा को देखते हुए पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

सीएमओ प्रियंका झारिया ने बताया कि नगर के समस्त देवी मंदिरों के पास साफ सफाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के द्वारा जहां से भी कोई जानकारी व सुझाव मिलेंगे तत्काल कार्य किए जाएंगे। थाना प्रभारी प्रदीप सोनी ने बताया कि उत्सव को देखते हुए नगर के मंदिरों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

दासोंदा व चोंसठ योगनी के नाम से रखे जाते हैं घट

भास्कर संवाददाता। जबेरा/बनवार

शक्ति की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र रविवार से शुरू हो रहा है। नवरात्र व हिंदू नववर्ष के शुभारंभ को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल है। लोगों द्वारा नवरात्र के पहले अपने घरों की साफ-सफाई की गई है।

वहीं प्राचीन परंपरा अनुसार आज से शक्तिधामों व दिवारों में घट स्थापना की जाएगी। वहीं दसौंदा की बलखंडन माता, हटरी की चौसठ योगनी व रोंड गांव की मटेना शक्तिधाम में भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। इन शक्तिधामों में नौ दिनों तक हजारों की संख्या में जिले भर के श्रद्धालु पहुंचकर मातारानी के दर्शन कर आर्शीवाद लेते हैं। ताकि घर, परिवार में खुशहाली बनी रहे। इसी मंगल कामना को लेकर जवारे भी बोए जाते हैं। जिससे नवरात्र के अंतिम दिन हजारों की संख्या में घट माता के दरबार में लेकर जाते हैं। बलखंडन माता और हटरी की चौंसठ योगनी के नाम से दो घाटों की स्थापना होती है। जिसमें एक घट बलखड़न माता और दूसरा घट चौंसठ योगनी दरबार नवमीं को जाता है। जिसका भक्ति उत्साह देखते ही बनता है।

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