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शिवालय में उमड़ी भक्तों की भीड़, घर-घर बने शिवलिंग

उपकाशी में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। देवश्री गौरीशंकर मंदिर में देवश्री का...

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 05:20 AM IST
शिवालय में उमड़ी भक्तों की भीड़, घर-घर बने शिवलिंग
उपकाशी में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। देवश्री गौरीशंकर मंदिर में देवश्री का विशेष श्रंगार किया गया। विद्वान पंडितों के निर्देशन में मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया गया। पुजारी रामसुजान पाठक ने बताया कि दुल्हावेश में माता पार्वती के साथ स्थापित शिवप्रतिमा अलौकिक है। मंदिर स्थापना के साथ ही यहां महाशिवरात्रि का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। भक्तों की भीड़ से पूरे मंदिर परिसर में मेला लगता है। दूर-दूर से व्यापारी एवं दुकानदार आकर अपनी दुकानें भी लगाते हैं। भक्तों के द्वारा शिव अर्चन के साथ मेला का भी आनंद लिया जाता है।सायंकाल देवश्री गौरीशंकर मंदिर से भगवान शिव की बारात भी निकली, जिसमें नगर के गणमान्य नागरिकों के साथ विभिन्न भेषधारी जीवजन्तू भी बारात में शामिल हुए। बारात में चल रहे शिव जी का जगह जगह तिलक अभिवादन हुआ।

सुनार नदी किनारे पुरानी अस्पताल के पास भूतेश्वर मंदिर में भी महाशिवरात्रि के अवसर पर एक सप्ताह से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान का समापन विशाल भंडारे के साथ हुआ। मंदिर में पंचमुखी हनुमान जी एवं माता पार्वती की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसी अवसर पर श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन भी हुआ। महाशिवरात्रि पर विशाल भंडारे में दूर दूर से भक्त आये। इसके अलावा नगर के समस्त शिव मंदिरों में उत्सव का महौल रहा। जगह जगह भोला के गीत सुनाई दिये। भक्तों के द्वारा मंदिर के साथ अपने अपने घरों में भी पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया गया। रूद्राभिषेक के साथ सायंकाल शिवलिंग को सुनार नदी में विसर्जन किया गया।

हटा। महाशिवरात्रि पर नगर में निकाली गई शिवजी की बारात।

माता सती के साथ हुआ था स्वयंभू जागेश्वरनाथ शिवलिंग प्रादुर्भाव

बनवार। बुंदेलखंड ही नहीं अपितु संपूर्ण भारत में जागेश्वरनाथजी के दिव्य शिव लिंग की महिमा दिनों बढ़ती जा रही है। 13वे ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्यताओं की बात की जाए दो शताब्दी पूर्व 1772 में शिवलिंग का उद्भाव है। तभी से उनके नित्य चमत्कारों से जनमानस परिचित होता चला आ रहा है। मान्यता है कि सती माता की प्रतिमा के साथ स्वयंभू शिवलिंग का उद्भव हुआ था और आज भी सती माता की प्रतिमा शिव लिंग की पूजन करने की मुद्रा में दिव्य शिवलिंग की जलहरी के समुख मंदिर की दीवार ओर बने स्थान पर विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी दुर्गेश सीतू पंडा ने बताया कि स्वयंभू शिव लिंग के साथ ही सती माता की प्रतिमा भूगर्भ से निकली थीं, जिससे जागेश्वरनाथ दिव्य स्वंभू शिवलिंग को प्रजापति दक्ष के प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है। सती माता से शक्ति पीठों की स्थापना धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है इसलिए देवश्री जागेश्वरनाथ के दर्शनों के किए बिना चार धामों की यात्रा का पुण्य नहीं मिलता है। यहां विराजमान भगवान जागेश्वरनाथ की 13वें ज्योतिर्लिग के रूप में मान्यता है।

ग्राम गड़ोलाखाड़े में नंदी पर बैठकर निकले शिव-पार्वती, पूरा गांव हुआ बारात में शामिल

भास्कर संवाददाता|बटियागढ़

ग्राम गढोलाखांडे में शिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शिवजी की लगन की तैयारी की गई। इसके बाद भगवान बैल पर शिवजी की झांकी को तैयार कर गांव में बारात निकाली गई। नंदी पर विराजमान संजीव झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

इस दौरान आसपास के गांव लोग भी बड़ी संख्या में बारात में शामिल हुए। बारात में शिवजी के गण व भूत-प्रेत के वेष में अनेक महिला पुरुष साथ में चल रहे थे। इस दौरान डीजे की धुन पर बजे रहे धार्मिक गीतों की धून पर युवा थिरक रहे थे। पूरा गांव बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा। भगवान की बारात में विधायक लखन पटेल, जिपं सदस्य बृजेंद्र सिंह, सरपंच शिवसिंह, राजकिशोर मिश्रा सहित अनेक लोग शामिल रहे। बीते कई सालों से हर साल शिवजी की बारात धूमधाम से निकाली जाती है। जिसमें पूरा गांव शामिल होता है।

धूमधाम से निकाली बारात

तेंदूखेड़ा/झलौन।
महाशिवरात्रि पर डां. निहाररंजन विश्वास द्वारा वर पक्ष का आयोजन तथा रेवाराम विश्वकर्मा द्वारा वधु पक्ष का आयोजन कर भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह कराया गया। कार्यक्रम में वर एवं वधु पक्ष से नगर एवं आसपास के ग्रामों से आमंत्रण में पधारे गणमान्य नागरिकों को भोज कराया गया। भगवान शिवजी की बारात में कन्या, कलश धारण किए हुए चल रहीं थीं। ग्राम के प्रमुख देवालयों पर बैंडबाजों के साथ राई नृत्य, डीजे की धुन पर पूजा अर्चना की गई। ग्राम गुहंची, मगदूपुरा, सेहरी, धनेटा, उमरिया आदि ग्रामों सैकड़ों लोग बारात में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान वधु पक्ष ने बारात की आगवानी कर सत्कार कर स्वल्पाहार दिया। इसके बाद अशोक तिवारी द्वारा भगवान शिव पार्वती के विवाह की वेद मंत्रों के साथ विवाह की रस्म पूर्ण की गईं।

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