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जंगलों से विलुप्त होने की कगार पर पहुंची फलदार वृक्षों की प्रजातियां

मड़ियादो। जंगलों में अचार के पेड़ों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। यह प्रजातियां खतरे में जंगलों में कुछ समय पहले...

Bhaskar News Network| Last Modified - Feb 03, 2018, 05:30 AM IST

जंगलों से विलुप्त होने की कगार पर पहुंची फलदार वृक्षों की प्रजातियां
जंगलों से विलुप्त होने की कगार पर पहुंची फलदार वृक्षों की प्रजातियां
मड़ियादो। जंगलों में अचार के पेड़ों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

यह प्रजातियां खतरे में

जंगलों में कुछ समय पहले तक चिरोंजी, आम, तेंदू, महुआ, आंवला, वेल, बहेड़ा सहित अन्य फलदार वृक्ष बड़ी संख्या में हुआ करते थे, लेकिन लगातार पेड़ों की कटाई से पेड़ों का सफाया हो चुका है। हालांकि तेंदू और महुआ अभी शेष हैं। ब्रजमोहन आदिवासी का कहना है जंगलों में एक दशक पहने तक आय के बहुत स्रोत हुआ करते थे। जंगलों से बेल फल, गोंद, बहेड़ा, चिरोंजी के अलावा महुआ और तेंदूपत्ता से आय होती थी, लेकिन अब महुआ और तेंदूपत्ता ही आय का जरिया बचे है चिरोंजी बहुत कम ही प्राप्त होती है।

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