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फरवरी में ही सूख गई बकराऊ नदी

समूचे जिला में जल का संकट अभी से दिखाई देने लगा है। जबकि गर्मी ने अभी दस्तक भी नहीं दी है। नगर की भौगोलिक स्थिति इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 25, 2018, 06:15 AM IST

समूचे जिला में जल का संकट अभी से दिखाई देने लगा है। जबकि गर्मी ने अभी दस्तक भी नहीं दी है। नगर की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है कि यदि अल्प वर्षा में भी पानी को रोकने के सार्थक प्रयास किए होते तो सूखा एवं अल्पवर्षा में भी पानी की कमी नहीं होती। सरकार के द्वारा जल रोको, वाटरशेड, स्टापडेम निर्माण, मेड बंधान, के नाम पर प्रतिवर्ष विभिन्न विभागों के माध्यम से खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन ये सारे प्रयास एक बाल्टी पानी को भी रोकने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।

जल के कार्य कर रही मालती, रजनी पटेल, भगतराम, बद्री, श्यामलाल पटैल, अभय जैन ने बताया कि कनौरा, सादपुर, सुनेरा, सिलापरी, चूना सगौनी से निकलने वाली बराना नदी अब तो ऐसी लगती है जैसे वह पूर्णतः मृत हो गई हो। बरौदा की शालिनी राजपूत, केदार सिंह, वीरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि जरारूधाम से रामनगर, मगरोन, हिनोती होकर निकलने वाली बकराऊ नदी में अब तो सिर्फ रेत और पत्थर नजर आ रहे हैं। आज से 10 साल पहले मई जून में भी इस नदी में पानी रहता था। जंगल में जब पानी की कमी आ जाती थी तो कई जंगली जानवर इस नदी से अपनी प्यास बुझाने आते थे। भगवान सिंह, भोपाल सिंह, कंछेदी सिंह, पूरन सिंह ने बताया कि करीब 18 किमी लंबी इस नदी पर झागरी, सगरोन, हिनौती, भरौटा एवं टिकरिया में पंचायत, कृषि विभाग, वन विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग से स्टापडेम का निर्माण किया गया, लेकिन इन स्टापडेम में कही गेट का पता नहीं, तो कहीं स्टापडेम लटक रहा नीचे से पानी बह जाता है, निर्माण के दौरान ही शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनता ही नहीं है। नदी का पानी सूख जाने के कारण अब बोर के द्वारा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है ताकि मवेशी, पशु पक्षियों को पानी मिल सके।

नलजल योजनाएं ठप

समाजसेवी प्रदीप जोगी, संतोष पटैल, अवधेश अहिवार, गीता पटेल ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार हटा, पटेरा, बटियागढ ब्लॉक में लगभग 100 से अधिक नल जल योजना कार्य कर रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत बताती है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा नलजल योजना केवल कागजों पर सिमटी हैं। सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत है, शिकायत पर केवल कागजी जादूगरी के आंकड़े भेजे जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को स्पाट निरीक्षण का समय ही नहीं मिल रहा है। जिला के पालक व अन्य मंत्री बैठकों में ही सीमित रह गए है। मनीषा साहू, माधुरी पटेल, गजेंद्र सिंह, ध्रुव चंदेल ने बताया कि बुंदेलखंड पैकेज पैकेज के द्वारा पूरे जंगल में करोड़ों के स्टापडेम, तालाब निर्माण कराए थे। इनका एवं पूरी नल जल योजना की जांच यदि सीबीआई से कराई जाए तो जनता के समाने आ जाए कि पानी के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए कैसे पानी में गए।

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