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चना-मसूर की कटाई शुरू, गेहूं की लहलहा रही फसल

गर्मी का असर तेज होते ही फसलें पकने लगी हैं। क्षेत्र के किसान रबी फसल की कटाई में जुट गए हैं। क्षेत्र में चने की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 26, 2018, 07:10 AM IST

गर्मी का असर तेज होते ही फसलें पकने लगी हैं। क्षेत्र के किसान रबी फसल की कटाई में जुट गए हैं। क्षेत्र में चने की कटाई जोरों पर चल रही है। जिसके कारण गांव के मजदूरों को भी रोजगार मिलने लगा है। बड़े किसानों के यहां एक साथ सौ-सौ मजदूरों को कटाई के काम में लगाया गया है। जिन्हें प्रतिदिन 120 से 140 रुपए तक मिल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बीते पखवाड़ा हुई मावठे की बारिश के बाद गेहूं की फसल अभी लहलहा रही है।

पानी मिलने के कारण गेहूं का दाना भी पुष्ठ हो गया है। जिससे बीते साल की अपेक्षा इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी बताई जा रही है। वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार बीते वर्ष की अपेक्षा उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। फसल पकने के समय प्रकृति के साथ देने के कारण किसानों को राहत मिली है। इसमें कई किसानों के खेतों की चने व मसूर की फसल पक चुकी है। जिसकी कटाई भी के साथ-साथ थ्रेसिंग भी शुरू हो गई है। हालांकि बाद की बोवनी वाले किसानों के खेतों में तो अभी भी हरियाली छाई हुई है। वहीं दूसरी ओर अभी गेहूं की फसलें भी लहलहा रहीं हैं। गौरतलब है कि जिले में इस बार सूखा पड़ा है। जिसके चलते किसानों को खरीफ फसल में काफी नुकसान हुआ था। सूखे के कारण बोवनी का रकबा बीते वर्ष की अपेक्षा घटा दिया गया है। इस बार कृषि विभाग ने जिले में रबी फसल की बोवनी का लक्ष्य 3 लाख 9 हजार 320 हेक्टेयर रखा है जबकि बीते वर्ष यह रकवा 3 लाख 17 हजार 210 हेेक्टेयर था। कृषि विभाग हर साल खेती शुरू होने से पहले ही उसका लक्ष्य तैयार कर लेता है। ताकि किसानों को समय पर जानकारियों उपलब्ध कराई जा सकें और उन्हें फसल उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा सके।

किसानों का कहना है कि इस बार कम बारिश होने के कारण खरीफ की अधिकांश फसलें सूख गईं थीं। सबसे ज्यादा नुकसान मूंग, उड़द व सोयाबीन को हुआ था। जिले में सबसे ज्यादा गेहूं व चने की फसल बोई जाती है। लेकिन सूखे के कारण गेहूं की बुआई का रकवा घट गया है। बीते वर्ष जिले में 95100 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई थी, लेकिन इस बार इसका लक्ष्य घटाकर 80 हजार हेक्टेयर रखा गया है। इस तरह गेहूं 15 हजार हेक्टेयर में कम बोया गया है। हिनौता गांव किसान बृजेश पटेल, रूपदयाल पटेल ने बताया कि इस क्षेत्र में ज्यादातर गेहूं, चने की फसल बोई जाती है लेकिन कम बारिश के कारण गेहूं का रकवा घट गया है।

कृषि

अधिकारियों ने कहा मावठे की बारिश से फसलों का बढ़ेगा उत्पादन, बीते साल की अपेक्षा इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी

इस बार बंपर फसलें

इस रबी फसल की शुरुआत में पानी गिरने के बाद पर्याप्त क्षेत्र में बोवनी हो गई थी। बीते पखवाड़ा बारिश होने के बाद फसलों की उत्पादन क्षमता काफी बढ़ गई। इस बार मसूर प्रति हेक्टेयर 10 से 12 क्विंटल उत्पादन की संभावना है। तो वहीं चना प्रति हेक्टैयर 14 से 15 एवं गेहूं प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल की संभावना है। फसलें काफी अच्छी हैं।- बीएल कुरील, उपसंचालक कृषि

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